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CAA क्या है, भारत में लागू हुए इस नए कानून से क्या बदलेगा?

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CAA Rules: नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA Bill) पहली बार 1955 के नागरिकता अधिनियम में संशोधन करने के लिए 2016 में पेश किया गया था।

Last Updated- March 11, 2024 | 7:28 PM IST
CAA-सीएए

भारत सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू करने की घोषणा की है। इसे 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस कानून के तहत, तीन पड़ोसी देशों – अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश – से आए छह अल्पसंख्यक समुदायों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। इन समुदायों में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं।

CAA क्या है?

नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA Bill) पहली बार 1955 के नागरिकता अधिनियम में संशोधन करने के लिए 2016 में पेश किया गया था। यह एक संयुक्त संसदीय समिति के माध्यम से पारित हुआ और 8 जनवरी, 2019 को लोकसभा द्वारा पास किया गया। हालांकि, यह 16वीं लोकसभा के भंग होने के साथ के साथ समाप्त हो गया। विधेयक को 9 दिसंबर, 2019 को 17वीं लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा फिर से पेश किया गया और 10 दिसंबर, 2019 को पास किया गया। राज्यसभा ने भी 11 दिसंबर, 2019 को विधेयक पास किया।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश करने वाले अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए पारित किया गया था। यह अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान। से छह धर्मों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) के प्रवासियों पर लागू होता है। पात्र होने के लिए, व्यक्ति का पिछले 12 महीनों से लगातार और पिछले 14 सालों में से 11 सालों से भारत में निवास होना चाहिए। हालांकि, कुछ मामलों में, निवास की आवश्यकता को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।

नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को संसद की मंजूरी मिल गई थी।

नागरिकता क्या है?

नागरिकता एक ऐसा रिश्ता है जो किसी व्यक्ति और किसी देश के बीच बनता है। यह रिश्ता कुछ अधिकारों और कुछ जिम्मेदारियों के साथ आता है। नागरिकों को देश के कानूनों और सुरक्षा व्यवस्था का संरक्षण मिलता है। नागरिकों को देश के नेताओं को चुनने का अधिकार होता है। नागरिक को सरकारी पदों पर काम करने के मौके मिलते हैं।

भारत में नागरिकता

भारत का संविधान पूरे भारत के लिए एक ही नागरिकता का प्रावधान करता है। इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति जो भारत में रहता है, चाहे वह किसी भी राज्य या क्षेत्र से हो, उसे भारत का नागरिक माना जाता है।

संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत, संसद को नागरिकता के अधिकार को नियंत्रित करने का अधिकार है। इसी अधिकार के तहत, 1955 में नागरिकता अधिनियम पारित किया गया था। यह कानून बताता है कि कौन भारत का नागरिक बन सकता है और कैसे।

सातवीं अनुसूची के अनुसार, संसद को नागरिकता से संबंधित कानून बनाने का अधिकार है। 1987 तक, भारत में जन्मे किसी भी व्यक्ति को नागरिक माना जाता था। लेकिन, बांग्लादेश से अवैध प्रवासन की चिंता के कारण, कानूनों में बदलाव किया गया। इसके बाद, नागरिकता के लिए यह आवश्यक हो गया कि कम से कम माता-पिता में से एक भारतीय हो। 2004 में, कानून में और बदलाव किया गया। अब, नागरिकता के लिए यह आवश्यक है कि माता-पिता में से एक भारतीय हो। दूसरा माता-पिता अवैध अप्रवासी न हो।

भारत में अवैध प्रवासी कौन है?

अवैध प्रवासी वे विदेशी होते हैं जो भारत में बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के प्रवेश करते हैं या जो वैध दस्तावेजों के साथ प्रवेश करते हैं, लेकिन अनुमत समय अवधि से अधिक समय तक रुकते हैं। अवैध प्रवासियों को विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के तहत जेल में डाला जा सकता है या निर्वासित किया जा सकता है।

नागरिकता प्राप्त करने के कानून क्या हैं?

मौजूदा कानूनों के अनुसार, अवैध प्रवासी नागरिकता के लिए आवेदन नहीं कर सकते। उन्हें पंजीकरण या देशीयकरण के माध्यम से भारतीय नागरिक बनने से रोका जाता है। विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम ऐसे लोगों को प्रतिबंधित करते हैं और अवैध प्रवासियों को जेल या निर्वासन में डालने का प्रावधान करते हैं।

पंजीकरण के माध्यम से नागरिकता:

नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 5 (ए): भारतीय मूल का कोई भी व्यक्ति जो पंजीकरण के लिए आवेदन करने से पहले सात साल से भारत में सामान्य रूप से निवासी है, नागरिक बन सकता है। उन्हें नागरिकता के लिए आवेदन जमा करने से पहले लगातार 12 महीने तक भारत में रहना चाहिए।

देशीयकरण के माध्यम से नागरिकता:

नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत देशीयकरण के माध्यम से भी व्यक्ति नागरिकता प्राप्त कर सकता है। इसमें पात्र होने के लिए, आवेदक को पिछले 12 महीनों के दौरान, साथ ही पिछले 14 वर्षों में से 11 वर्षों के दौरान भारत में रहना चाहिए।

CAA का क्या मकसद है?

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) का उद्देश्य नागरिकता अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम में बदलाव करना है। यह बदलाव उन अवैध प्रवासियों के लिए नागरिकता प्राप्त करना आसान बनाता है जो तीन पड़ोसी देशों – बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान – के धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित हैं।

CAA की विशेषताएं क्या हैं?

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) का उद्देश्य भारत के पड़ोसी देशों से आए धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्राप्त करना आसान बनाना है। यह अधिनियम नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन करता है।

यह कानून किन लोगों पर लागू होता है?

यह कानून अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के उन अवैध प्रवासियों पर लागू होता है जिन्हें धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत में शरण लेने पर मजबूर होना पड़ा।
यह उन लोगों को अवैध प्रवासन की कार्यवाही से बचाने के लिए बनाया गया है।

इस कानून के तहत क्या बदलाव किए गए हैं?

  • देशीयकरण की आवश्यकता: इन छह धर्मों से संबंधित आवेदकों के लिए देशीयकरण की आवश्यकता को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
  • नागरिकता के लिए कट-ऑफ तारीख: नागरिकता के लिए कट-ऑफ तारीख 31 दिसंबर 2014 है, जिसका मतलब है कि आवेदक को उस तारीख को या उससे पहले भारत में प्रवेश करना चाहिए था।

नागरिकता प्राप्त करने पर क्या होगा?

  • ऐसे व्यक्तियों को भारत में उनके प्रवेश की तारीख से भारत का नागरिक माना जाएगा।
  • उनके अवैध प्रवास या नागरिकता के संबंध में उनके खिलाफ सभी कानूनी कार्यवाही बंद कर दी जाएंगी।

OCI कार्ड धारकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

इस कानून में यह भी कहा गया है कि OCI कार्ड रखने वाले लोग – जो भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को भारत में अनिश्चित काल तक रहने और काम करने की अनुमति देता है – यदि वे बड़े और छोटे अपराधों और उल्लंघनों के लिए स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं, तो वे अपना स्टेटस खो सकते हैं।

अपवाद

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) के तहत छूट वाले क्षेत्र

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) कुछ क्षेत्रों को इसके प्रावधानों से छूट देता है। ये क्षेत्र हैं:

1. असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्र:

  • संविधान की छठी अनुसूची में शामिल क्षेत्रों को CAA से छूट दी गई है।
  • इन क्षेत्रों में कार्बी आंगलोंग (असम में), गारो हिल्स (मेघालय में), चकमा जिला (मिजोरम में), और त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र जिला शामिल हैं।

2. इनर लाइन परमिट (ILP) के तहत आने वाले क्षेत्र:

बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत ILP के तहत आने वाले क्षेत्रों को भी CAA से छूट दी गई है।

इन क्षेत्रों को छूट देने का कारण:

  • इन क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों का बड़ा हिस्सा रहता है, जिनकी अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराएं हैं।
  • CAA को इन समुदायों के अधिकारों और पहचान को खतरे में डालने के रूप में देखा जाता है।
  • ILP क्षेत्रों में बाहरी लोगों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए पहले से ही कानून मौजूद हैं।

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First Published - March 11, 2024 | 7:28 PM IST

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