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मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले में सुनवाई न हुई तो ये कोर्ट की शक्तियों के उल्लंघन जैसा होगा- SC

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Last Updated- December 16, 2022 | 3:54 PM IST
Supreme Court

उच्चतम न्यायालय ने ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ (Individual freedom) की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए शुक्रवार को कहा कि अगर वह देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के उल्लंघन से जुड़े मामलों में कार्रवाई नहीं करता है, तो यह उसे हासिल विशेष संवैधानिक शक्तियों का ‘उल्लंघन’ करने जैसा होगा।

हम यहां क्यों हैं अगर हम अपनी अंतरात्मा की नहीं सुनते

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को खारिज करते हुए सवाल किया, ‘हम यहां क्यों हैं अगर हम अपनी अंतरात्मा की नहीं सुनते?’ पीठ ने कहा, ‘उच्चतम न्यायालय के लिए कोई भी मामला छोटा नहीं होता। अगर हम व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में कार्रवाई नहीं करते हैं और राहत नहीं देते हैं, तो हम यहां क्या कर रहे हैं?’ इस पीठ में न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा भी शामिल थे। पीठ ने कहा, ‘अगर हम व्यक्ति स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में कार्रवाई नहीं करते हैं तो हम अनुच्छेद-136 (राहत देने के लिए संविधान में प्रदत्त विशेष शक्तियां) का उल्लंघन करेंगे।’

न्यायालय ऐसा नहीं करेगा तो एक नागरिकों की स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी 

उसने कहा कि मामले के तथ्य शीर्ष अदालत को प्रत्येक नागरिक को मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के रक्षक के रूप में अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने का एक और मौका, एक ‘स्पष्ट मौका’ प्रदान करते हैं। पीठ ने कहा, ‘अगर न्यायालय ऐसा नहीं करेगा तो एक नागरिक की स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी। नागरिकों की शिकायतों से जुड़े छोटे, नियमित मामलों में इस अदालत के हस्तक्षेप से न्यायशास्त्रीय और संवैधानिक मुद्दों से संबंधित पहलू उभरकर सामने आते हैं।’ शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता इकराम को राहत देते हुए यह टिप्पणी की।

यह भी पढ़े: भारतीय स्टार्टअप ने भी कम किया परिचालन

इकराम को राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने यह टिप्पणी की

इकराम को विद्युत अधिनियम से जुड़े नौ आपराधिक मामलों में उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले की एक अदालत ने दोषी करार दिया था। अदालत ने इकराम को प्रत्येक मामले में दो साल के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। इकराम लगभग तीन साल से जेल में है। जेल अधिकारियों का कहना है कि उसकी सजा एक साथ के बजाय क्रमिक रूप से चलेगी, जिसकी वजह से उसे जेल में 18 साल गुजारने होंगे। इकराम ने मामले में उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसने उसे राहत देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश को पलटते हुए स्पष्ट किया कि इकराम की सजा एक साथ चलेगी। सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय को इस ‘घोर अन्याय’ को रोकने के लिए आगे आना चाहिए था।

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First Published - December 16, 2022 | 3:54 PM IST

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