Gold ETF vs Gold Fund: अक्षय तृतीया का पर्व पारंपरिक रूप से सोना खरीदने और निवेश की नई शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। वर्षों से इस दिन लोग फिजिकल गोल्ड– जैसे ज्वेलरी, सिक्के और बार आदि में निवेश करते रहे हैं, लेकिन बदलते समय के साथ निवेश का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। अब नई पीढ़ी के निवेशक सुविधा, सुरक्षा और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए डिजिटल विकल्पों– जैसे Gold ETF और Gold Fund की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। यहीं से सवाल उठता है कि Gold ETF और Gold Fund में से बेहतर विकल्प कौन सा है? और क्या डिजिटल गोल्ड फिजिकल गोल्ड से ज्यादा फायदेमंद है?
गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड सोने में निवेश करने के डिजिटल तरीके हैं, जिनमें आपको असली सोना खरीदकर घर में रखने की जरूरत नहीं होती। Gold ETF एक ऐसा फंड होता है जो सीधे सोने की कीमत को ट्रैक करता है और इसे शेयर बाजार में स्टॉक की तरह खरीदा-बेचा जाता है। इसके लिए डिमैट अकाउंट जरूरी होता है। वहीं गोल्ड फंड (या फंड ऑफ फंड) ऐसे फंड होते हैं जो गोल्ड ईटीएफ में ही निवेश करते हैं और इसमें आप बिना डिमैट अकाउंट के भी SIP के जरिए पैसा लगाया जा सकता है। सरल शब्दों में, ETF सीधे बाजार से जुड़ा है, जबकि Gold Fund, ETF में निवेश का आसान रास्ता है।
निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड में कमोडिटीज हेड और फंड मैनेजर विक्रम धवन बताते हैं, “गोल्ड ईटीएफ सोने में निवेश का एक आसान और प्रभावी तरीका है, क्योंकि भारत में ज्यादातर ETFs असली (फिजिकल) सोने से पूरी तरह समर्थित होते हैं। इनमें हाई लिक्विडिटी और एक्सचेंज पर रियल-टाइम कीमत जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जिससे ये मल्टी-एसेट पोर्टफोलियो के लिए एक सुविधाजनक विकल्प बन जाते हैं। वहीं, गोल्ड फंड ऐसे फंड होते हैं जो गोल्ड ईटीएफ में ही निवेश करते हैं। ये उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं जो SIP के जरिए लंबे समय में धीरे-धीरे सोना जमा करना चाहते हैं।”
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मौजूदा बाजार परिस्थितियों में, जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो में बेहतर डायवर्सिफिकेशन लाना चाहते हैं और अनिश्चितता से बचाव करना चाहते हैं, उनके लिए सोने में निवेश एक अहम और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रहा है।
कोटक महिंद्रा एएमसी के ईटीएफ फंड मैनेजर सतीश डोंडापति कहते हैं, “गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं जो अपने पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन लाना चाहते हैं। ये फंड उन लोगों के लिए आदर्श हैं जो फिजिकल गोल्ड के स्टोरेज, शुद्धता और कीमत से जुड़ी परेशानियों से बचते हुए सोने में निवेश करना चाहते हैं। साथ ही इनका खर्च अनुपात (expense ratio) भी कम होता है।”
टाटा एसेट मैनेजमेंट के कमोडिटीज फंड मैनेजर तपन पटेल भी इस राय से सहमत हैं। उनका कहना है कि जो निवेशक फिजिकल गोल्ड की झंझट से बचते हुए सोने में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड बेहतर विकल्प हैं, क्योंकि ये घरेलू सोने की कीमतों के अनुरूप रिटर्न देते हैं और वास्तविक (फिजिकल) सोने से समर्थित होते हैं।
पटेल आगे कहते हैं, “गोल्ड ईटीएफ उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं जो मार्केट-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स को पसंद करते हैं और जिनके पास डिमैट अकाउंट है, जबकि गोल्ड फंड उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हैं जो बिना सीधे ईटीएफ में निवेश किए एक आसान तरीका चाहते हैं।”
इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच अपने पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन लाने वाले निवेशकों को भी इन विकल्पों से फायदा हो सकता है, क्योंकि सोना लंबे समय में उतार-चढ़ाव के खिलाफ एक मजबूत हेज के रूप में काम करता है।
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पारंपरिक रूप से निवेशक फिजिकल गोल्ड को प्राथमिकता देते रहे हैं, लेकिन समय के साथ सोने में निवेश का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब नई पीढ़ी के निवेशक डिजिटल गोल्ड की ओर रुख कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, डिजिटल गोल्ड में स्टोरेज, मेकिंग चार्ज और सुरक्षा जैसी परेशानियां नहीं होतीं। इसके अलावा यह ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है, जिससे यह आधुनिक निवेशकों के लिए एक बेहतर विकल्प बन गया है।
धवन कहते हैं, “ज्वेलरी के रूप में फिजिकल गोल्ड की अपनी एक अहमियत है, लेकिन ज्वेलरी, बार और सिक्के निवेश के लिए सबसे प्रभावी विकल्प नहीं हैं, क्योंकि इनमें मेकिंग चार्ज, मेल्टिंग लॉस और ज्यादा ट्रांजैक्शन कॉस्ट शामिल होती है। जहां ज्वेलरी और सिक्के दिखने में आकर्षक होते हैं, वहीं निवेश के नजरिए से गोल्ड ईटीएफ ज्यादा बेहतर माने जाते हैं। खासकर एसेट एलोकेशन, पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन और हेज के तौर पर।”
क्लाइंट एसोसिएट्स में इन्वेस्टमेंट रिसर्च और एडवाइजरी के डायरेक्टर नितिन अग्रवाल ने कहा, “निवेश के नजरिए से, Gold ETF और Gold Fund जैसे डिजिटल विकल्प फिजिकल गोल्ड की तुलना में ज्यादा प्रभावी होते हैं। ये स्टोरेज, सुरक्षा और मेकिंग चार्ज जैसी व्यावहारिक समस्याओं को खत्म करते हैं। साथ ही बेहतर लिक्विडिटी, पारदर्शिता और स्टैंडराइज कीमत सुनिश्चित करते हैं।”
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गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड तीन प्रमुख फायदे देते हैं। पहला, ये मैक्रोइकोनॉमिक जोखिमों के खिलाफ एक प्रभावी हेज के रूप में काम करते हैं। खासकर भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता के दौरान। दूसरा, ये महंगाई और मुद्रा के अवमूल्यन से सुरक्षा प्रदान करते हैं। खासकर तब जब कमोडिटी की कीमतें बढ़ रही हों। तीसरा, इनका पारंपरिक एसेट क्लास से कम संबंध होने के कारण ये पोर्टफोलियो में बेहतर डाइवर्सिफिकेशन लाने में मदद करते हैं।
डोंडापति के अनुसार, Gold ETF और Gold Fund में निवेश के प्रमुख फायदे सुविधा, पारदर्शिता, डायवर्सिफिकेशन और टैक्स एफिशिएंसी हैं। ये SEBI द्वारा रेगुलेटेड होते हैं और वास्तविक सोने से समर्थित होने के कारण सुरक्षा, शुद्धता और सही प्राइस ट्रैकिंग सुनिश्चित करते हैं। साथ ही स्टोरेज और मेकिंग चार्ज जैसी झंझटों से भी बचाते हैं। गोल्ड ईटीएफ कुछ मामलों में फिजिकल गोल्ड की तुलना में टैक्स के लिहाज से बेहतर होते हैं, क्योंकि इन पर कैपिटल गेन टैक्स नॉन-इक्विटी एसेट्स की तरह लगता है। साथ ही, डिमैट फॉर्म में इन्हें रखने या ट्रेड करने पर वेल्थ टैक्स और GST नहीं लगता।
वहीं, धवन का कहना है कि सोने की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाई लिक्विडिटी है, जिसे Gold ETF और बेहतर बनाते हैं, क्योंकि ये एक्सचेंज पर आसानी से खरीदे-बेचे जा सकते हैं। उनके मुताबिक, Gold ETF और Gold Fund दोनों ही भारतीय म्युचुअल फंड सिस्टम के तहत सुरक्षा, पारदर्शिता और आसान लेनदेन की सुविधाएं प्रदान करते हैं।
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रिटर्न के लिहाज से भी Gold ETFs ने हाल के वर्षों में मजबूत प्रदर्शन किया है। ICRA एनालिटिक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय बाजार में कुल 26 गोल्ड ईटीएफ उपलब्ध हैं, जिनमें से 6 स्कीम्स 2025-26 में लॉन्च हुई हैं। गोल्ड ईटीएफ के रिटर्न के एक विश्लेषण से पता चलता है कि अधिकांश फंड्स में 1 साल का औसत रिटर्न करीब 58.81% से 62.85% के बीच रहा है। वहीं, 5 साल का CAGR रिटर्न ज्यादातर फंड्स में लगभग 25.78% से 26.11% के दायरे में रहा है।
| Scheme Name | 1 Year (%) | 3 Years (%) | 5 Years (%) |
|---|---|---|---|
| Axis Gold ETF | 60.33 | 33.98 | 26.03 |
| ICICI Prudential Gold ETF | 60.65 | 33.74 | 26.08 |
| Mirae Asset Gold ETF | 60.33 | 33.69 | — |
| Kotak Gold ETF | 60.45 | 33.63 | 25.99 |
| UTI Gold ETF | 61.60 | 33.51 | 25.91 |
| Quantum Gold Fund – Growth | 60.24 | 33.47 | 25.98 |
| Invesco India Gold ETF | 60.02 | 33.45 | 26.06 |
| Nippon India ETF Gold BeES | 60.18 | 33.41 | 25.78 |
| Aditya Birla Sun Life Gold ETF | 62.85 | 33.35 | 25.93 |
| HDFC Gold ETF | 62.59 | 33.34 | 25.83 |
(नोट: रिटर्न के आंकड़े- 31 मार्च 2026 की NAV पर आधारित)
Source: MFI360Explorer
वैश्विक बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव, महंगाई का दबाव और अमेरिका-ईरान जैसे भू-राजनीतिक तनावों ने अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। ऐसे समय में सोना एक बार फिर “सेफ हेवन” एसेट के रूप में उभरकर सामने आया है, जो निवेशकों को बाजार की अस्थिरता से बचाने में मदद कर रहा है। यही कारण है कि इस अक्षय तृतीया पर निवेशक पारंपरिक सोने के बजाय स्मार्ट और आधुनिक निवेश विकल्पों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने में निवेश का मकसद तेज रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो को स्थिरता देना और जोखिम से बचाव करना होना चाहिए। अग्रवाल के अनुसार, Gold ETF और Gold Fund खास तौर पर उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं जो मैक्रोइकोनॉमिक और भू-राजनीतिक जोखिमों के खिलाफ हेज करना चाहते हैं। लंबी अवधि में सोना एक भरोसेमंद वैल्यू स्टोर और सुरक्षित निवेश के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाता है।
चांदी की तरह, सोना भी पोर्टफोलियो में एक रणनीतिक एसेट की तरह काम करता है, जो महंगाई, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं से पैदा होने वाले जोखिम को संतुलित करने में मदद करता है। मौजूदा दौर में बढ़ती भू-राजनीतिक और नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच, यह पोर्टफोलियो की स्थिरता बनाए रखने में अहम योगदान देता है।
डोंडापति के मुताबिक, सोना बाजार की अस्थिरता के दौरान एक प्रभावी हेज साबित होता है। आमतौर पर पोर्टफोलियो में 10-15% का आवंटन जोखिम को संतुलित करने और स्थिरता बढ़ाने में मदद करता है, जिससे यह एक लंबी अवधि का उपयोगी एसेट बनता है, न कि हाई ग्रोथ वाला निवेश।
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भू-राजनीतिक अनिश्चितता, जैसे युद्ध जैसी स्थितियों के दौरान सोना और चांदी आमतौर पर सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के रूप में काम करते हैं। हालांकि, हाल के समय में कई मैक्रो फैक्टर्स– जैसे मजबूत डॉलर, बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और लिक्विडिटी आधारित बाजार चाल– के कारण इनके पारंपरिक ट्रेंड में कुछ बदलाव देखने को मिला है।
पटेल कहते हैं, “ऐसे माहौल में निवेशकों को आक्रामक शॉर्ट-टर्म दांव लगाने के बजाय संतुलित और डायवर्सिफाइड रणनीति अपनाने पर विचार करना चाहिए। मल्टी-एसेट एलोकेशन रणनीति, जिसमें सोना और चांदी में लगभग 15-20 फीसदी निवेश (जिसमें सोने का हिस्सा ज्यादा हो) रखा जाए, अस्थिरता को संभालने और बाहरी झटकों से पोर्टफोलियो को बचाने में मदद कर सकती है।”
उन्होंने आगे कहा कि हालांकि शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन सोने को सपोर्ट करने वाले मूलभूत कारक मजबूत हैं, जिससे यह लंबी अवधि में पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन के लिए प्रासंगिक बना रहता है।
अतीत की अधिकांश संकट स्थितियों की तरह, डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो आमतौर पर केंद्रित निवेश की तुलना में उतार-चढ़ाव का बेहतर सामना करते हैं। अमेरिका–ईरान जैसे भू-राजनीतिक संघर्ष कमोडिटी, मुद्रा और इक्विटी बाजारों में तेज हलचल पैदा करते हैं, जिससे डायवर्सिफिकेशन पहली सुरक्षा पंक्ति बन जाता है।
धवन कहते हैं, “निवेशकों के लिए समझदारी भरी रणनीति यही है कि वे अनुशासित रहें, सोने में संतुलित निवेश को हेज के रूप में बनाए रखें, खबरों के आधार पर जल्दबाजी में फैसले न लें और इवेंट-आधारित शॉर्ट-टर्म दांव से बचें।”
सतीश डोंडापति कहते हैं, “सोने की कीमतें अपने ऑल-टाइम हाई से कुछ नीचे आई हैं। मौजूदा स्तरों पर, जो निवेशक पहले की तेजी का फायदा नहीं उठा पाए, वे लंबी अवधि के नजरिए से और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट (SIP) के जरिए Gold ETF में निवेश पर विचार कर सकते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि हालांकि कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन जारी अनिश्चितताओं के कारण अल्पावधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और समय अवधि के अनुसार अनुशासित एसेट एलोकेशन रणनीति अपनानी चाहिए और प्रेशियस मेटल्स में कुल निवेश को करीब 15-20 फीसदी तक सीमित रखना चाहिए।