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मई में Equity MFs में निवेश 40% घटा, 12 महीने का लो रिकॉर्ड; ₹30,954 करोड़ के साथ SIP इनफ्लो ने संभाली रफ्तार

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म्युचुअल फंड उद्योग में मई में कुल मिलाकर 64,131 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज हुई जबकि अप्रैल में 3.22 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था

Last Updated- June 10, 2026 | 4:14 PM IST
Mutual Funds Stocks

AMFI May 2026 Data: वैश्विक अनिश्चितताओं और भारतीय शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच म्युचुअल फंड निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी-ओरिएंटेड म्युचुअल फंड स्कीम्स में नेट इनफ्लो मई में एक साल के सबसे निचले स्तर 22,908 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह निवेश अप्रैल में दर्ज 38,440 करोड़ रुपये से 40 फीसदी कम रहा। निवेश में कमी के बावजूद, इक्विटी म्युचुअल फंड्स में लगातार 63वें महीने शुद्ध निवेश का सिलसिला जारी रहा।

SIP ने संभाली रफ्तार, मई में निवेश ₹30,954 करोड़

इक्विटी फंड्स में निवेश घटने के बावजूद, SIP निवेश मजबूत बना रहा। महीने के दौरान SIP के माध्यम से 30,954 करोड़ रुपये का निवेश आया। हालांकि मंथली SIP इनफ्लो में मामूली गिरावट देखने को मिली। अप्रैल में यह 31,115 करोड़ रुपये था। इससे पहले मार्च में SIP निवेश 32,087 करोड़ रुपये से घटा था, और उसी नरमी का रुझान मई में भी जारी रहा।

मिरे असेट में डिस्ट्रीब्यूशन एंड स्ट्रैटेजिक अलायंसेज की हेड सुरंजना बोरठाकुर कहती हैं, “30,954 करोड़ रुपये का एसआईपी निवेश वह आंकड़ा है जो सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है। यह दर्शाता है कि लंबी अवधि के निवेश का ढांचा अभी भी मजबूत है। खुदरा निवेशक बाजार से बाहर नहीं निकल रहे, बल्कि नियमित निवेश जारी रखते हुए औसत लागत का लाभ उठा रहे हैं और कंपाउंडिंग की ताकत पर भरोसा जता रहे हैं।”

हालांकि, लगातार दूसरी बार मासिक योगदान में कमी आने के बावजूद, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) म्युचुअल फंड उद्योग की ग्रोथ इंजन बनी रहीं। मई में SIP के तहत एसेट अंडर मैनजमेंट (AUM) बढ़कर 17.12 लाख करोड़ रुपये पहुंच गईं, जो उद्योग के कुल AUM का लगभग 21 फीसदी हिस्सा है।

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MF AUM घटकर ₹81.6 लाख करोड़

म्युचुअल फंड उद्योग में मई में कुल मिलाकर 64,131 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज हुई जबकि अप्रैल में 3.22 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था। इसकी मुख्य वजह डेट ओरिएंडेट स्कीम्स से 96,948 करोड़ रुपये की निकासी रही। इसके परिणामस्वरूप, उद्योग की एसेट अंडर मैनजमेंट (AUM) मई के अंत में घटकर 81.6 लाख करोड़ रुपये रह गईं, जो एक महीने पहले 81.92 लाख करोड़ रुपये थीं।

AMFI के चीफ एग्जीक्यूटिव वेंकट चलसानी ने इंडस्ट्री के AUM में मामूली गिरावट की वजह वैश्विक अनिश्चितताओं और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को बताया।

Equity MFs में निवेश 12 महीने का लो पर

AMFI के आंकड़ों के अनुसार, मई में इक्विटी-ओरिएंटेड म्युचुअल फंड स्कीम्स में शुद्ध निवेश 22,908 करोड़ रुपये रहा। यह अप्रैल में 38,440 करोड़ रुपये, मार्च में 40,450 करोड़ रुपये, फरवरी में 25,978 करोड़ रुपये और जनवरी में 24,028 करोड़ रुपये था। ताजा निवेश मई 2025 के बाद सबसे कम है जब इक्विटी म्युचुअल फंड में 19,013 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था।

इक्विर्स वेल्थ के एमडी और बिजनेस हेड अंकुर पुंज ने कहा, “इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश की रफ्तार में कमी, बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच निवेशकों की सतर्क सोच को दिखाती है।”

उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक घटनाक्रमों, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर चिंताओं के कारण कई निवेशकों ने नए निवेश करने के बजाय ‘इंतजार करो और देखो’ की रणनीति अपनाई है।

बोरठाकुर कहती हैं, “इक्विटी म्युचुअल फंड्स में शुद्ध निवेश 22,908 करोड़ रुपये रहा, जो अप्रैल की तुलना में 40 फीसदी कम है। पहली नजर में यह गिरावट काफी बड़ी लगती है, लेकिन इसके पीछे का संदर्भ समझना जरूरी है। मई के दौरान बाजार में उल्लेखनीय सुधार (करेक्शन) देखने को मिला। सेंसेक्स में करीब 2.5-3 फीसदी और निफ्टी में लगभग 2.5 फीसदी की गिरावट आई। इसके साथ ही भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।”

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फ्लेक्सी कैप सबसे आगे, ₹5,175 करोड़ का निवेश

इक्विटी योजनाओं में ‘फ्लेक्सी-कैप’ फंड में सबसे ज्यादा 5,175 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, इसके बाद ‘स्मॉल कैप’ फंड में 4,945 करोड़ रुपये और मिड कैप फंड में 4,385 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। लार्ज कैप फंड में तुलनात्मक रूप से कम 1,593 करोड़ रुपये का निवेश आया। दूसरी ओर, टैक्स वाली इक्विटी योजनाओं (ELSS) में मई में शुद्ध निकासी देखी गई।

मई 2026: इ​क्विटी MF में इनफ्लो/आउटफ्लो

कैटेगरी नेट इनफ्लो (₹ करोड़)
मल्टी कैप फंड 2,291.01
लार्ज कैप फंड 1,592.93
लार्ज एंड मिड कैप फंड 3,278.22
मिड कैप फंड 4,385.06
स्मॉल कैप फंड 4,945.57
डिविडेंड यील्ड फंड -97.46
वैल्यू / कॉन्ट्रा फंड 509.57
फोकस्ड फंड 830.25
सेक्टोरल / थीमैटिक फंड 647.87
ELSS -650.78
फ्लेक्सी कैप फंड 5,175.54
कुल   22,907.77

(सोर्स: एम्फी)

बोरठाकुर ने बताया कि उद्योग की प्रमुख कैटीगरी मानी जाने वाली फ्लेक्सी कैप स्कीम्स में निवेश लगभग आधा होकर 10,148 करोड़ रुपये से घटकर 5,176 करोड़ रुपये रह गया। निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ने पर आमतौर पर सबसे ज्यादा असर थीमैटिक और वैल्यू/कॉन्ट्रा फंड कैटेगिरयों पर पड़ता है और इस बार भी यही देखने को मिला।

हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स में निवेश अपेक्षाकृत मजबूत बना रहा। यह एक महत्वपूर्ण संकेत देता है कि निवेशकों का इन कैटेगरी के लंबी अवधि के विकास की संभावनाओं पर भरोसा अभी भी कायम है।”

Gold ETFs से ₹725 करोड़ की निकासी

इस बीच, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETFs) में मई में 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई जबकि अप्रैल में इसमें 3,040 करोड़ रुपये का निवेश आया था। यह इस एसेट क्साल में निवेशकों की कम होती रुचि को दर्शाता है। साथ ही, साल 2026 में यह पहली बार है जब गोल्ड ईटीएफ से शुद्ध निकासी दर्ज की गई है।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया की सीनियर एनालिस्ट नेहल मेश्राम ने कहा कि सोने की कीमतों में पहले आई तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में बदलाव – जिसमें सुरक्षित निवेश वाले एसेट्स से कुछ पैसा दूसरी जगह लगाना शामिल है – की वजह से यह आउटफ्लो हो सकता है।

डेट फंड्स से ₹96,949 करोड़ की भारी-भरकम निकासी

डेट-ओरिएंटेड म्युचुअल फंड्स में मई के दौरान तेज बदलाव देखने को मिला और इनमें 96,949 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसके विपरीत, अप्रैल में इन फंड्स में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का मजबूत निवेश आया था।

मेश्राम ने कहा, “यह गिरावट वित्त वर्ष के अंत के बाद आई अतिरिक्त तरलता (लिक्विडिटी) के सामान्य होने को दर्शाती है। संस्थागत निवेशकों और कॉरपोरेट ट्रेजरी ने अल्पकालिक निवेश विकल्पों में अपनी होल्डिंग कम की है, जिससे यह निकासी देखने को मिली।”

निकासी मुख्य रूप से लिक्विडिटी और अल्पकालिक ट्रेजरी आधारित फंड कैटेगरी में केंद्रित रही। लिक्विड फंड्स से सबसे ज्यादा 29,681 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई। इसके बाद मनी मार्केट फंड्स से 24,692 करोड़ रुपये और ओवरनाइट फंड्स से 15,525 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई।

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First Published - June 10, 2026 | 4:08 PM IST

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