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मई में इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश 40% घटा, SIP बना मजबूत सहारा

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मई में एसआईपी के जरिये 30,954 करोड़ रुपये का निवेश आया जो अप्रैल के 31,115 करोड़ रुपये से थोड़ा कम है

Last Updated- June 10, 2026 | 11:19 PM IST
mutual fund

म्युचुअल फंडों की ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश मई में मासिक आधार पर 40 फीसदी घट गया। इसकी वजह एकमुश्त निवेश में कमजोरी और ज्यादा निवेश निकासी (रीडम्पशन) रही। इसका असर निवेश पर पड़ा। इक्विटी योजनाओं में सकल निवेश मासिक आधार पर 18 फीसदी घटकर 57,604 करोड़ रुपये रह गया जबकि रीडम्पशन 9 फीसदी के इजाफे के साथ 34,696 करोड़ रुपये रहा। इससे शुद्ध निवेश की आवक घटकर एक साल के निचले स्तर 22,908 करोड़ रुपये पर आ गई। ऐसा तब हुआ जब सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में कुल निवेश काफी हद तक स्थिर रहा। मई में एसआईपी के जरिये 30,954 करोड़ रुपये का निवेश आया जो अप्रैल के 31,115 करोड़ रुपये से थोड़ा कम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शुद्ध निवेश में कमी की वजह वैश्विक माहौल में अनिश्चितता के कारण आई अस्थिरता हो सकती है।

केयरएज रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक संजय अग्रवाल ने कहा, निवेश में कमी का कारण बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की सावधानी हो सकती है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें ज्यादा बनी हुई हैं और ये 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रही हैं। आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों और रुपये के अवमूल्यन से भी अनिश्चितता बढ़ी है।

अप्रैल में तेजी के बाद वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण मई में नई अस्थिरता पैदा हो गई जिससे बेंचमार्क इंडेक्स- निफ्टी 50 और सेंसेक्स –महीने के दौरान गिरावट के साथ बंद हुए। इक्विटी की सभी योजनाओं में शुद्ध निवेश की रफ्तार धीमी रही। इस श्रेणी में निवेश आधा होने के बावजूद शुद्ध निवेश में फ्लेक्सीकैप फंड का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा।

मिरे ऐसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) की वितरक और रणनीतिक गठजोड़ प्रमुख सुरंजना बड़ठाकुर ने कहा, उद्योग के लिए अहम माने जाने वाले फ्लेक्सीकैप फंड में निवेश 10,148 करोड़ रुपये से आधा होकर 5,176 करोड़ रुपये रह गया। इसका सबसे ज्यादा असर थीमैटिक और वैल्यू/कॉन्ट्रा श्रेणी पर पड़ा, जैसा कि सेंटीमेंट कमजोर होने पर हमेशा होता है। लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप फंड अपनी स्थिति बनाए रखने में कामयाब रहे। एसआईपी निवेश का बड़ा हिस्सा पाने वाले मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों के शुद्ध निवेश की आवक में करीब 30 फीसदी की कमी देखी गई।

दूसरी श्रेणी में शुद्ध निवेश में कमी ज्यादा स्पष्ट दिखी। अप्रैल के मुकाबले हाइब्रिड योजनाओं में शुद्ध निवेश लगभग आधा होकर 10,560 करोड़ रुपये रह गया जबकि पैसिव और दूसरी योजनाओं (इंडेक्स फंड, ईटीएफ और ओवरसीज़ एफओएफ) में निवेश 98 फीसदी गिरकर सिर्फ 362 करोड़ रुपये रह गया। डेट फंड, जिनमें अप्रैल में 2.47 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था, से मई में 96,949 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई। इसका मुख्य कारण लिक्विड, मनी मार्केट और कॉरपोरेट बॉन्ड फंडों से निकासी रही।

वेंचुरा के निदेशक जे. गबाजीवाला ने कहा, म्युचुअल फंड में निवेश में हर तरफ गिरावट आई है। ऐसा लगता है कि निवेशक अब उन बाजारों से थक चुके हैं, जो पिछले 2 सालों से एक ही दायरे में घूम रहे हैं। पिछले 2 महीनों से एसआईपी में भी लगातार कमी आई है। इस रुझान की वजह से और भी निवेश रुक सकते हैं। अगले दो महीने भारतीय बाजारों के लिए बहुत अहम होंगे क्योंकि हम मॉनसून और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजों का असर देखेंगे।

हालांकि, उद्योग को कोई चिंता नहीं है क्योंकि एसआईपी निवेश लगातार मजबूत बना हुआ है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के मुख्य कार्याधिकारी वेंकट चलसानी ने कहा, म्युचुअल फंड उद्योग की वृद्धि मजबूत एसआईपी निवेश के बल पर बनी हुई है, जो मई में 30,954 करोड़ रुपये रहा। एसआईपी में योगदान करने वाले खातों की संख्या 9.64 करोड़ पर स्थिर रही, जो दिखाता है कि लोग संपत्ति बनाने के एक व्यवस्थित तरीके के तौर पर म्युचुअल फंडों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति को देखते हुए हमारा ध्यान निवेशकों को ऐसी जानकारी देने पर है, जिससे वे अपने लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों पर टिके रह सकें।

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First Published - June 10, 2026 | 11:14 PM IST

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