इक्विटी म्युचुअल फंड (एमएफ) योजनाओं के नए निवेश में मार्च में तेज उछाल आई। निवेशकों ने बाजार में आई बड़ी गिरावट के बीच खरीदारी की। पिछले महीने शुद्ध पूंजी निवेश की आवक आठ महीने के ऊंचे स्तर 40,450 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। सकल निवेश भी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़कर लगभग 84,000 करोड़ रुपये हो गया।
इक्विटी में मार्च के दौरान शुद्ध पूंजी निवेश उससे पिछले महीने के मुकाबले 56 प्रतिशत अधिक रहा। यह जुलाई 2025 के बाद सबसे अधिक था। जुलाई 2025 में निवेशकों ने 42,702 करोड़ रुपये का निवेश किया था। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के शोध प्रमुख हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ‘पूंजी निवेश में यह उछाल दिखाता है कि खुदरा निवेशकों ने एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) योगदान के माध्यम से भागीदारी जारी रखी। उन्होंने वर्ष के अंत में पोर्टफोलियो आवंटन किया और हालिया गिरावट का इक्विटी में अतिरिक्त पूंजी लगाने के अवसर के रूप में उपयोग किया।’
नए फंड ऑफर (एनएफओ) के जरिए संग्रह को छोड़ दें तो मार्च में शुद्ध आवक किसी भी कैलेंडर माह के दौरान अब तक सबसे अधिक 38,503 करोड़ रुपये रही। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण घरेलू इक्विटी बाजार में मार्च में तेज गिरावट आई। बेंचमार्क निफ्टी 50 इंडेक्स महीने के अंत में 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ। एसआईपी का योगदान मार्च में 32,087 करोड़ रुपये की सर्वाधिक नई ऊंचाई पर पहुंचा, जिससे भी इक्विटी में निवेश को मदद मिली।
एचडीएफसी एएमसी के एमडी और सीईओ नवनीत मुनोट ने कहा, ‘भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण हुई अस्थिरता के बावजूद घरेलू निवेशक मजबूती से डटे रहे हैं और विश्वास के साथ निवेश जारी रखे हुए हैं। एसआईपी में निवेश की ओर यह संरचनात्मक बदलाव भारत के पूंजी बाजारों की दीर्घावधि मजबूती और गहराई के लिए अच्छा संकेत है।’
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के मुख्य कार्याधिकारी वेंकट चलसानी ने कहा कि इक्विटी निवेश लगातार 61वें महीने सकारात्मक रहा जिससे दीर्घकालिक धन सृजन में निवेशकों के निरंतर भरोसे का पता चलता है।
फ्लेक्सीकैप फंडों ने सभी इक्विटी फंड श्रेणियों में 10,054 करोड़ रुपये के प्रवाह के साथ सबसे अधिक राशि जुटाई। इसके बाद स्मॉलकैप और मिडकैप योजनाओं ने क्रमशः 6,264 करोड़ रुपये और 6,064 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया। हाइब्रिड क्षेत्र में मल्टी-ऐसेट एलोकेशन फंडों ने 5,213 करोड़ रुपये के साथ सबसे अधिक पूंजी निवेश प्राप्त किया। लेकिन इस दौरान निवेशकों ने आर्बिट्राज फंडों से 21,114 करोड़ रुपये भी निकाल लिए।
डेट फंडों में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई, जिसमें निवेशकों ने सभी कैटेगरी से अपना पैसा निकाल लिया। टाटा ऐसेट मैनेजमेंट के चीफ बिजनेस ऑफिसर आनंद वरदराजन ने कहा, ‘इंस्टीट्यूशनल बिजनेस में सीजन के दौरान तरलता की कमी के कारण फिक्स्ड इनकम में भारी निकासी देखी गई। यील्ड में बढ़ोतरी और तरलता के दबाव के चलते इस कैटेगरी के सभी फंड नेगेटिव में बंद हुए।’
डेट फंडों से भारी निकासी और अलग-अलग योजनाओं में ‘मार्क-टू-मार्केट’ नुकसान की वजह से उद्योग की परिसंपत्तियों में गिरावट आई। मार्च के आखिर में, कुल एयूएम 73.7 लाख करोड़ रुपये थी, जो पिछले महीने के मुकाबले 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट है।