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नई ऊंचाई पर म्युचुअल फंड्स की इक्विटी खरीद, 2025 में ₹4.6 लाख करोड़ के शेयर खरीदे

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इक्विटी बाजारों के प्रदर्शन में म्युचुअल फंडों के मजबूत निवेश की अभी तक अहम भूमिका रही है, खासकर एफपीआई की बिकवाली को देखते हुए

Last Updated- November 28, 2025 | 10:04 PM IST
Mutual Fund

कैलेंडर वर्ष 2025 में म्युचुअल फंडों का शुद्ध इक्विटी निवेश अब तक 4.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह किसी भी साल का सबसे बड़ा आंकड़ा है और इसने 2024 के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। चालू कैलेंडर वर्ष म्युचुअल फंडों की तरफ से शेयर बाजार में सकारात्मक इक्विटी निवेश का लगातार 5वां साल है।

बाजार का सुस्त परिदृश्य और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली के बावजूद म्युचुअल फंड योजनाओं में निवेशकों के मजबूत निवेश के कारण म्युचुअल फंड निवेश की रफ्तार बनी हुई है। एफपीआई ने घरेलू शेयरों से 1.4 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है।

जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ निवेश रणनीतिकार श्रीराम बीकेआर ने कहा, हाल के वर्षों में फंड और घरेलू जैसे निवेशक बाजार में एक प्रमुख ताकत रहे हैं और कोविड के बाद बचत के वित्तीय योजनाओं में जाने की रफ्तार बढ़ी है।

इक्विटी बाजारों के प्रदर्शन में म्युचुअल फंडों के मजबूत निवेश की अभी तक अहम भूमिका रही है, खासकर एफपीआई की बिकवाली को देखते हुए। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई), जिनमें घरेलू म्युचुअल फंड, बीमा कंपनियां, पेंशन फंड आदि शामिल हैं) ने इक्विटी बाजार में अब तक 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक कानिवेश किया है।

सेंस एंड सिंप्लिसिटी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील सुब्रमण्यम ने कहा, डीआईआई, विशेष रूप से फंडों ने एफपीआई की बिकवाली के बड़े हिस्से की भरपाई की है, जिससे बाजार में अस्थिरता कम हुई है। इससे अस्थिर लेकिन सीमित दायरे में कारोबार हुआ है, जहां व्यापार टकराव और भू-राजनीतिक संघर्ष जैसी वैश्विक और घरेलू अनिश्चितताओं के बावजूद सूचकांक भारी गिरावट से बचे रहे हैं।

बेंचमार्क सूचकांकों निफ्टी-50 और सेंसेक्स साल 2025 में अब तक करीब 10 फीसदी चढ़े हैं।

व्हाइटओक कैपिटल एएमसी के सीईओ आशिष सोमैया के अनुसार, फंडों में बढ़ते निवेश के पीछे कई कारण हैं। इनमें बेहतर शिक्षा के साथ युवाओं की आबादी, बढ़ती जोखिम क्षमता, कम ब्याज दरें और डिजिटलीकरण शामिल हैं। उन्होंने कहा, बाजार के हर चक्र में कुछ ऐसे लोग होंगे, जिनकी जोखिम लेने की क्षमता गड़बड़ाई होगी और बुरा अनुभव हुआ होगा। लेकिन उपरोक्त अधिकांश रुझान टिकाऊ प्रतीत होते हैं और एक हद तक हम न केवल म्युचुअल फंडों के माध्यम से बल्कि एआईएफ, पीएमएस, बीमा और पेंशन फंडों के माध्यम से भी घरेलू निवेश को लेकर सकारात्मक हो सकते हैं।

म्युचुअल फंडों की लगातार खरीदारी ने फंडों की इक्विटी होल्डिंग को पहली बार 50 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचा दिया है। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर के अंत में इक्विटी परिसंपत्तियां 50.6 लाख करोड़ रुपये थीं जो दो साल से थोड़े ज्यादा समय में दोगुनी हो गई हैं।

श्रीराम ने कहा, फंडों की मजबूत खरीदारी से सूचीबद्ध कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और इसके परिणामस्वरूप सूचीबद्ध कंपनियों में डीआईआई की हिस्सेदारी कुछ तिमाहियों पहले के एफपीआई स्वामित्व स्तर से आगे निकल गई हैं।

इस उपलब्धि से इक्विटी बाजार में भागीदारी के लिए म्युचुअल फंडों की स्थिति सबसे पसंदीदा जरिये के रूप में जाहिर होती है। म्युचुअल फंडों के स्वामित्व में यह उछाल बढ़ते निवेशक आधार और व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) की विश्वसनीयता के कारण आई है।

कैलेंडर वर्ष 2025 (अक्टूबर तक) में ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में 2.9 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ है। 2024 में निवेशकों ने 3.9 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया, जो 2022 में निवेश की गई रकम का दोगुना से भी ज्यादा है।

2025 की शुरुआत में बाजार में गिरावट के दौरान एसआईपी निवेश में उतार देखा गया था, लेकिन अब हर महीने यह नए शिखर छू रहा है। अक्टूबर में एसआईपी के जरिये 29,529 करोड़ रुपये आए।

भारत के कुल बाजार पूंजीकरण में अब म्युचुअल फंडों की हिस्सेदारी करीब 11 फीसदी है। विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू फंडों के बढ़ते प्रभाव ने बाजार की मजबूती में योगदान दिया है। म्युचुअल फंडों और अन्य घरेलू संस्थानों की बढ़ती ताकत ने भारतीय शेयरों को विदेशी निवेश पर कम निर्भर बना दिया है।

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First Published - November 28, 2025 | 9:57 PM IST

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