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Gold Investment का क्रेज बढ़ा: 2025 में खपत का 40% हिस्सा निवेश का, भारत में उभरा नया ट्रेंड

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केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, वैश्विक स्तर पर निवेश मांग CY25 में 2,175 टन तक पहुंच गई, जिसने CY20 के 1,805 टन के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया

Last Updated- April 29, 2026 | 11:09 AM IST
Gold investment in India
बढ़ते निवेश खपत में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) और सिक्कों व बिस्कुट (बार) की खरीदारी ने अहम भूमिका निभाई। प्रतीकात्मक तस्वीर

Gold Investment: भारत में सोना अब सिर्फ गहने बनाने के लिए नहीं रह गया है। पहले लोग इसे शादी-ब्याह और सजावट के लिए खरीदते थे, लेकिन अब इसका इस्तेमाल निवेश के लिए भी बढ़ गया है। 2025 में Gold Investment की हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, भारत में सोने की खपत में निवेश की हिस्सेदारी CY24 के 29% से बढ़कर CY25 में 42% हो गई है। निवेश की मांग भारत के साथ ही साथ वैश्विक स्तर पर भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई, जिसमें गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) और सिक्कों व बिस्कुट (बार) की खरीदारी ने अहम भूमिका निभाई। यह बढ़त सुरक्षित निवेश की चाह, पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन लाने की जरूरत और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को दर्शाती है।

Gold ETFs सबकी पहली पंसद

केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, वैश्विक स्तर पर निवेश मांग CY25 में 2,175 टन तक पहुंच गई, जिसने CY20 के 1,805 टन के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इसमें गोल्ड ईटीएफ निवेश की अहम भूमिका रही, जिसका योगदान 800 टन से ज्यादा रहा। यह बढ़त पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन लाने की जरूरत, भू-राजनीतिक जोखिम और सुरक्षित निवेश की मांग जैसे कारकों से प्रेरित रही।

यह रुझान भारत में भी साफ दिखाई देता है, जहां पिछले दो वर्षों में निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ में मजबूत निवेश किया है। CY25 में भारत में 37.5 टन का निवेश जोड़ा गया, जो पिछले 10 वर्षों के कुल निवेश से भी ज्यादा है।

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गोल्ड डिमांड ऑल टाइम हाई पर

वैश्विक सोने की मांग CY25 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, जो सालाना आधार पर लगभग 8% बढ़कर करीब 5,000 मीट्रिक टन (MT) हो गई। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से मजबूत निवेश मांग के कारण रही। हालांकि सोने की कीमतों में तेज वृद्धि और व्यापक आर्थिक चुनौतियां भी बनी रहीं।

केंद्रीय बैंकों ने लगातार चौथे वर्ष बड़े पैमाने पर सोने की खरीद जारी रखी, जो भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच रिजर्व में डायवर्सिफिकेशन लाने में सोने की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

Gold Investment: ज्वेलरी से निवेश तक

ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग्स 801 टन बढ़ीं, जो अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, सुरक्षित निवेश और पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन की जरूरत के चलते सिक्कों और बार (सोने की ईंट) की खरीद 12 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

हालांकि, वैश्विक स्तर पर सोने की खपत की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। CY25 में ज्वेलरी की हिस्सेदारी सालाना आधार पर लगभग 19% घटकर 33% रह गई, जो 15 साल के औसत करीब 50% से काफी कम है। यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि उपभोक्ताओं ने ऊंची कीमतों के चलते गैर-जरूरी ज्वेलरी खरीद में कमी कर दी।

यह रुझान भारतीय बाजार में भी दिखाई दे रहा है, जहां CY25 में ज्वेलरी की हिस्सेदारी कुल सोने की खरीद में 60% से नीचे आ गई, जबकि लंबी अवधि का औसत करीब 70% रहा है।

केयरएज रेटिंग्स के डायरेक्टर अखिल गोयल ने भारतीय निवेशकों के सोने की खपत के पैटर्न पर कहा कि इसमें बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। CY25 में ज्वेलरी की हिस्सेदारी भारत की कुल सोने की खरीद में 60% से नीचे आ गई है, जबकि लंबी अवधि का औसत करीब 70% रहा है। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सोने की कीमतों में तेजी और निवेश पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन लाने की जरूरत के कारण सोने में निवेश की मांग आगे भी बनी रह सकती है। उनके अनुसार, FY27 तक कुल सोने की खपत में निवेश की हिस्सेदारी 35-40% तक पहुंच सकती है।

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Gold Investment: कीमतों में तेजी, ज्वेलरी मांग बरकरार

सोने की कीमतें अब एक लंबे समय तक बने रहने वाले ऊंचे स्तर के दौर में प्रवेश कर चुकी हैं। यह बदलाव सिर्फ अल्पकालिक सट्टेबाजी के कारण नहीं है, बल्कि इसमें मांग में बदलाव, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और वैश्विक स्तर पर चल रही आर्थिक व भू-राजनीतिक अनिश्चितता जैसे कारण शामिल हैं।

केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद भारत में ज्वेलरी की मांग मजबूत बनी हुई है। CY25 में ज्वेलरी की खरीद लगभग सालाना आधार पर 10% बढ़कर 4.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो दर्शाता है कि उपभोक्ता अपने खर्च का बड़ा हिस्सा सोने की ज्वेलरी पर खर्च करने को तैयार हैं।

CY21 से CY25 के बीच भारत में ज्वेलरी खरीद पर कुल खर्च 11% की CAGR से बढ़ा है, जो गोल्ड के प्रति लगातार बढ़ती रुचि को दिखाता है। हालांकि, मूल्य के आधार पर मांग मजबूत बनी रही, लेकिन मात्रा (वॉल्यूम) में CY25 में 15% की गिरावट आई है। यह दर्शाता है कि ज्वेलरी की मांग कीमतों के प्रति संवेदनशील है, और उपभोक्ता अब हल्के वजन और कम कैरेट वाली ज्वेलरी की ओर ज्यादा झुक रहे हैं।

मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद

केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, छह बड़े लिस्टेड ज्वेलर्स के नमूने में FY26 में सालाना आधार पर लगभग 35% और FY27 में 20-25% की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है। यह वृद्धि स्टोर्स के लगातार विस्तार, सेक्टर के तेजी से औपचारिक होने से मार्केट शेयर में बढ़त और लगातार ऊंची सोने की कीमतों के बावजूद उपभोक्ताओं की स्थिर मांग के कारण होगी।

ज्वेलर्स के इस ग्रुप का एवरेज ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन FY26 में 250-300 बेसिस पॉइंट तक बढ़ने का अनुमान है, जिसका कारण बिना हेज किए गए सोने पर इन्वेंट्री से होने वाले लाभ हैं। हालांकि, FY27 में लाभ सामान्य होने की संभावना है। अनुमान है कि ब्याज, लीज रेंटल, डेप्रिसिएशन और टैक्स से पहले का मार्जिन (PBILDT) 6.5-7% के दायरे में रहेगा। यह उम्मीद स्थिर सोने की कीमतों और नए स्टोर्स पर शुरुआती हाई ऑपरेटिंग खर्चों को देखते हुए की गई है।

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First Published - April 29, 2026 | 11:09 AM IST

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