भारतीय शेयर बाजार में म्युचुअल फंड के जरिए निवेश करने वाले रिटेल निवेशकों ने पिछले दो साल में जीरो रिटर्न के बावजूद उल्लेखनीय धैर्य दिखाया है। इतिहास बताता है कि ऐसे लंबे समय तक कमजोर रिटर्न के बाद अक्सर बुल रन यानी तेजी देखने को मिलता है। हालांकि एनालिस्ट्स का कहना है कि कमजोर रिटर्न आने वाले महीनों में निवेशकों के धैर्य की परीक्षा ले सकता है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के एनालिस्ट्स के अनुसार, निवेशकों ने कमजोर रिटर्न के बावजूद अपने सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) जारी रखे हैं और बाजार में गिरावट के दौरान एकमुश्त (lump-sum) निवेश भी बढ़ाया है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “यह अनुशासित निवेश की ओर एक स्ट्रक्चरल बदलाव को दर्शाता है, लेकिन अगर रिटर्न लंबे समय तक कमजोर बने रहते हैं, तो नए और पुराने दोनों तरह के रिटेल निवेशकों का भरोसा आगे और परखा जा सकता है।”
AMFI के हालिया आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में रिटेल निवेश मजबूत बना रहा और सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश रिकॉर्ड 32,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
यह मजबूती अलग-अलग कैटेगरी में भी दिखी। हालांकि 2026 की शुरुआत में ज्यादातर म्युचुअल फंड सेगमेंट में निवेशकों का रुझान पैसिव फंड्स, मल्टी-एसेट स्ट्रैटेजीज और फ्लेक्सी-कैप फंड्स की ओर शिफ्ट होता नजर आया।
इक्विटी-ओरिएंटेड म्युचुअल फंड स्कीम्स में 2026 में अब तक 90,500 करोड़ रुपये का निवेश आया है। इसमें सबसे ज्यादा योगदान फ्लेक्सी-कैप फंड्स (24,700 करोड़ रुपये), मिड-कैप फंड्स (13,300 करोड़ रुपये), स्मॉल-कैप फंड्स (13,100 करोड़ रुपये) और लार्ज एंड मिड-कैप फंड्स (11,600 करोड़ रुपये) का रहा है।
वहीं, हाइब्रिड फंड्स में 2026 के दौरान 12,800 करोड़ रुपये का निवेश आया है। एक्टिव और पैसिव फंड्स के बीच तुलना करें तो एक्टिव फंड्स में 1,11,500 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि पैसिव फंड्स में 46,200 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया।
म्युचअल फंड में निवेश ‘धैर्य का खेल’
कोटक की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले दो वर्षों में रिटर्न काफी निराशाजनक रहे हैं। ब्रोकरेज के इक्विटी-ओरिएंटेड फंड्स के विश्लेषण से पता चलता है कि जुलाई 2024 से मार्च 2026 के बीच बाजार में कदम रखने वाले निवेशकों को कई मामलों में कमजोर या यहां तक कि नेगेटिव रिटर्न का भी सामना करना पड़ा है।
खास तौर पर स्मॉल-कैप और थीमेटिक फंड्स – जिन्होंने निवेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आकर्षित किया था– ने पिछले 21 महीनों में “कुल इक्विटी फंड्स की तुलना में कहीं ज्यादा खराब प्रदर्शन” किया है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है, “अगर रिटर्न लंबे समय तक कमजोर बने रहते हैं, तो नए और पुराने दोनों तरह के रिटेल निवेशकों के भरोसे की और परीक्षा हो सकती है।”
इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Q1CY26 (कैलेंडर ईयर 2026 की पहली तिमाही) में म्युचुअल फंड्स में भागीदारी स्थिर बनी रही, जबकि सीधे शेयरों (डायरेक्ट इक्विटी) में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, “मार्च 2026 में अधिकांश फंड कैटेगरी में रिटेल निवेश बढ़ा है। वहीं Q1CY26 में पैसिव फंड्स, मल्टी-एसेट फंड्स और फ्लेक्सी-कैप फंड्स में आवंटन (allocation) में तेज वृद्धि देखी गई। इसी दौरान FY26 में एक्टिव रिटेल निवेशकों का आधार घटा है, जो FY21-25 के दौरान दिखे DIY (खुद से निवेश करने) ट्रेंड के धीरे-धीरे कमजोर पड़ने का संकेत देता है।”
ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि हाल के महीनों में मजबूत इनफ्लो ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की लगातार बिकवाली को काफी हद तक संतुलित किया है, लेकिन म्युचुअल फंड्स के भीतर घटते कैश स्तर उनकी भविष्य की बाजार अस्थिरता को संभालने की क्षमता को सीमित कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, “एफपीआई तब तक भारत को लेकर सतर्क रुख बनाए रख सकते हैं, जब तक भारत की आय (earnings) का आउटलुक और अन्य प्रमुख उभरते बाजारों (Emerging Markets) के मुकाबले वैल्यूएशन में ठोस सुधार नहीं होता। दूसरी ओर, म्युचुअल फंड्स के कैश स्तर घट गए हैं, जिससे एफपीआई की लगातार बिकवाली के खिलाफ सुरक्षा कम हो गई है।”
चिंताओं के बावजूद, मॉर्गन स्टेनली के विश्लेषकों ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत एक संभावित बुल मार्केट के मुहाने पर हो सकता है। उनके अनुसार, पिछले 12 महीनों का प्रदर्शन, वैल्यूएशन, निवेशकों की पोजिशनिंग और कमाई– ये सभी फैक्टर आने वाले महीनों में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी रिकवरी का संकेत दे रहे हैं।
8 अप्रैल की रिपोर्ट में कहा गया है, “पॉजिटिव ग्रोथ संकेतों की निरंतरता, पॉलिसी में हो रहा सुधार, इस बात का सबूत है कि एआई (AI) भारत को नुकसान नहीं पहुंचा रहा बल्कि उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर रहा है। एआई ट्रेड में आई गिरावट और शेयर बायबैक में उछाल, जिससे शेयरों की नई मांग पैदा हो रही है– ये सभी भारत में बुल मार्केट के प्रमुख ट्रिगर हो सकते हैं।”
इतिहास भी यही बताता है कि कम से कम 18 महीनों तक कमजोर या ठहरे हुए रिटर्न के बाद भारतीय शेयर बाजारों में मल्टीबैगर (कई गुना रिटर्न) देखने को मिले हैं।
एडलवाइस एसेट मैनेजमेंट के 2001 से 2024 तक के विश्लेषण के अनुसार, भारतीय शेयर बाजारों ने 18 महीनों तक कमजोर रिटर्न देने के बाद तेज उछाल दिखाया है। आंकड़ों बताते हैं कि 18 महीने के सुस्त दौर के बाद बाजारों ने सिर्फ 1 महीने में ही करीब 81 फीसदी तक का शानदार रिटर्न दिया और 36 महीनों में यह रिटर्न बढ़कर लगभग 248 फीसदी तक पहुंच गया।
| Start Date | End Date | 18M Return | Next 12M Return | Next 36M Return |
|---|---|---|---|---|
| 31-Jul-01 | 31-Dec-02 | 1.92% | 72% | 159% |
| 31-Aug-01 | 31-Jan-03 | -1.13% | 74% | 188% |
| 31-Oct-01 | 31-Mar-03 | 0.65% | 81% | 248% |
| 31-Jan-07 | 30-Jun-08 | -1.03% | 6% | 40% |
| 31-Mar-08 | 31-Aug-09 | -1.53% | 16% | 13% |
| 30-Apr-08 | 30-Sep-09 | -1.59% | 19% | 12% |
| 28-Feb-11 | 31-Jul-12 | -1.95% | 10% | 63% |
| 30-Apr-11 | 30-Sep-12 | -0.80% | 1% | 39% |
| 31-May-11 | 31-Oct-12 | 1.07% | 12% | 44% |
| 31-Dec-14 | 31-May-16 | -1.48% | 18% | 46% |
| 30-Jun-15 | 30-Nov-16 | -1.72% | 24% | 47% |
| 30-Sep-21 | 28-Feb-23 | -1.78% | 27% | 48% |
| 31-Oct-21 | 31-Mar-23 | -1.76% | 29% | 47% |
| 31-Aug-24 | 31-Jan-26 | 0.34% | ? | ? |
Source: Edelweiss AMC
वहीं, मॉर्गन स्टेनली ने दिसंबर 2026 तक के लिए BSE Sensex का अपना बेस-केस टारगेट 95,000 पर बरकरार रखा है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “यह स्तर दर्शाता है कि BSE Sensex का ट्रेलिंग P/E रेशियो 23.5 गुना होगा, जो 25 साल के औसत 22 गुना से ज्यादा है। यह प्रीमियम भारत के मध्यम अवधि के ग्रोथ चक्र पर अधिक भरोसा, भारत का कम बीटा, हाई टर्मिनल ग्रोथ रेट और स्थिर/पूर्वानुमान योग्य नीति माहौल को दर्शाता है।”
ब्रोकरेज के अनुसार, इसके बुल-केस में दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स का टारगेट 1,07,000 रखा गया है, जबकि बेयर-केस में यह 76,000 आंका गया है।
(डिस्क्लेमर: बिजनेस स्टैंडर्ड प्राइवेट लिमिटेड में कोटक समूह के नियंत्रण वाली इकाइयों की बहुलांश हिस्सेदारी है। ये राय और अनुमान संबंधित ब्रोकरेज या विश्लेषकों के हैं। बिज़नेस स्टैंडर्ड इनका समर्थन नहीं करता है। पाठकों से इन्हें ध्यान से समझने और अपने विवेक से निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।)