Gold ETF: एक साल से ज्यादा समय तक लगातार निवेश आकर्षित करने के बाद गोल्ड ईटीएफ में मई में 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई। इससे 13 महीनों से जारी पॉजिटिव निवेश का सिलसिला टूट गया। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की ऊंची कीमतों के बीच निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली, सोने की खरीद को लेकर संयम बरतने की सरकार की अपील और कुछ फंड हाउसों द्वारा नए निवेश पर लगाई गई अस्थायी रोक ने इस एसेट क्लास में निवेश की रफ्तार को धीमा किया। यह अप्रैल 2025 के बाद पहली शुद्ध निकासी है। अप्रैल 2025 में गोल्ड ईटीएफ से 5.82 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी।
उद्योग निकाय एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में गोल्ड ईटीएफ से 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई, जबकि अप्रैल में इनमें 3,040 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था। मार्च में यह निवेश 2,266 करोड़ रुपये, फरवरी में 5,255 करोड़ रुपये और जनवरी में 24,040 करोड़ रुपये रहा था।
जनवरी में मजबूत इनफ्लो के बाद अगले महीनों में इसकी रफ्तार धीरे-धीरे कम होती गई, जो यह संकेत देती है कि निवेशकों द्वारा इस एसेट क्लास में अतिरिक्त निवेश (इंक्रीमेंटल एलोकेशन) की गति धीमी पड़ रही थी।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस बदलाव के पीछे सोने की कीमतों में पहले आई तेज बढ़त के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) करना और जोखिम लेने की बढ़ती इच्छा प्रमुख कारण रहे। इसके चलते कुछ निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्प (सेफ-हेवन एसेट्स) माने जाने वाले सोने से धन निकालकर अन्य एसेट्स की ओर रुख किया।
आनंद राठी वेल्थ के ज्वाइंट सीईओ फिरोज अजीज ने कहा कि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने, सरकार की सोना न खरीदने की अपील और कुछ एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) द्वारा ईटीएफ में निवेश रोकने के कारण निवेशक ज्यादा व्यावहारिक नजरिया अपनाते दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, “सोने में तेज उछाल के बाद भविष्य में मिलने वाले रिटर्न उतने आकर्षक नहीं दिख रहे हैं, जितने पिछले एक वर्ष में रहे थे। इसके अलावा, कुछ निवेशक मुनाफावसूली कर अपनी पूंजी को अन्य निवेश अवसरों, खासकर हालिया गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन पर पहुंच चुके इक्विटी बाजारों की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं।”
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया की सीनियर एनालिस्ट नेहल मेश्राम ने कहा कि सोने में निवेश बनाए रखने की बढ़ती अवसर लागत (ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट), खासकर ऐसे माहौल में जहां फिक्स्ड इनकम साधनों पर अपेक्षाकृत आकर्षक यील्ड मिल रहा है, निवेशकों के पीछे हटने की एक वजह हो सकती है।
उन्होंने कहा कि निवेश का पैटर्न यह भी संकेत देता है कि पहले किए गए निवेश का एक बड़ा हिस्सा सामरिक (टैक्टिकल) प्रकृति का था। ऐसे निवेश आमतौर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव और अल्पकालिक व्यापक आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) संकेतों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसलिए बाजार परिस्थितियों में बदलाव आते ही इनसे निकासी देखने को मिल सकती है।
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इसके बावजूद, मई के अंत तक गोल्ड ईटीएफ के तहत एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 1,84,571 करोड़ रुपये हो गईं जो अप्रैल के अंत में 1,78,110 करोड़ रुपये थीं। कुल मिलाकर, मई 2025 से अब तक गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया है, जो निवेशकों के बीच इस एसेट क्लास की मजबूत मांग को दर्शाता है।
गोल्ड ईटीएफ ऐसे पैसिव इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट हैं जो घरेलू फिजिकल सोने की कीमतों पर नजर रखते हैं। ये सोने की कीमतों पर आधारित होते हैं और सोने में निवेश करते हैं। एक गोल्ड ईटीएफ यूनिट लगभग एक ग्राम सोने के बराबर होता है और यह उच्च शुद्धता वाले फिजिकल सोने द्वारा समर्थित होता है। यह स्टॉक निवेश के लचीलेपन और सोने में निवेश की सरलता दोनों का लाभ प्रदान करता है।
(PTI इनपुट के साथ)