भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों के पारंपरिक सुरक्षित निवेश विकल्प की ओर रुख करने से जनवरी-मार्च तिमाही में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETFs) में 31,561 करोड़ रुपये का निवेश हुआ जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग छह गुना ज्यादा है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, तिमाही आधार पर इनफ्लो 36 फीसदी बढ़कर 23,132 करोड़ रुपये हो गया।
इसके अलावा, वर्ष के दौरान गोल्ड ईटीएफ का परिसंपत्ति आधार (एसेट बेस) और निवेशक खातों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इस कैटेगरी में मार्च महीने में 2,266 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया जो फरवरी के 5,255 करोड़ रुपये और जनवरी के 24,040 करोड़ रुपये से कम है।
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कुल इनफ्लो 31,561 करोड़ रुपये रहा जो जनवरी-मार्च 2025 के 5,654 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा है। क्रमिक रूप से इनफ्लो की गति में हालांकि कुछ नरमी आई है लेकिन सोने के उत्पादों में निवेशकों की रुचि पॉजिटिव बनी हुई है। मार्च में धीमे इनफ्लो का कारण वर्ष की शुरुआत में मजबूत निवेश के बाद सामान्यीकरण और नए निवेश में कुछ कमी को माना जा रहा है।
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मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया की सीनियर एनालिस्ट नेहल मेश्राम ने कहा, ”जनवरी में असामान्य रूप से ज्यादा निवेश देखा गया। इसकी मुख्य वजह जोखिम से बचने की प्रवृत्ति, पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग और सोने की कीमतों में तेजी रही। फिर भी मार्च में पॉजिटिव इनफ्लो यह दर्शाता है कि बाजार की अनिश्चितता एवं व्यापक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच सोना डायवर्सिफिकेशन के टूल के रूप में निवेशकों को आकर्षित करता रहा है।”
द वेल्थ कंपनी म्युचुअल फंड के सीआईओ-डेट, उमेश शर्मा ने कहा कि मार्च में गोल्ड ईटीएफ में आने वाला निवेश कुछ धीमा पड़ गया और यह पिछले महीनों के स्तर से कम रहा। उनके अनुसार, इसकी वजह यह हो सकती है कि वैल्यूएशन के लिहाज से सोने के मुकाबले इक्विटी ज्यादा आकर्षक हो गई।
मजबूत निवेश से मार्च 2026 के अंत तक ‘गोल्ड फंड’ की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) लगभग तीन गुना बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपये हो गईं, जो एक वर्ष पहले 58,888 करोड़ रुपये थीं।
हाल के वर्षों में मजबूत रिटर्न देने वाले सोने ने निवेशकों की खास दिलचस्पी आकर्षित की है, जिसका असर फोलियो की संख्या में लगातार बढ़ोतरी के रूप में दिख रहा है। साल भर में गोल्ड ईटीएफ के फोलियो 54.28 लाख बढ़कर मार्च 2026 में 1.24 करोड़ हो गए, जो मार्च 2025 में 69.69 लाख थे। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान सोने से जुड़े फंड्स की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
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मेश्राम के अनुसार, गोल्ड ईटीएफ आकर्षक बने हुए हैं क्योंकि वे फिजिकल सोना रखने की जटिलताओं के बिना इसमें निवेश का एक लिक्विड, पारदर्शी और सुविधाजनक तरीका प्रदान करते हैं।
उन्होंने आगे कहा, “व्यापक नजरिए से देखें तो 2026 की पहली तिमाही में कुल निवेश 31,561 करोड़ रुपये रहा, जो यह दर्शाता है कि इनफ्लो में मंथली धीमापन आने के बावजूद इस कैटेगरी का कुल प्रदर्शन तिमाही में मजबूत रहा है। यह रुझान बताता है कि सोने का इस्तेमाल अब भी निवेशक एक रणनीतिक आवंटन (strategic allocation) के साथ-साथ एक सामरिक बचाव (tactical hedge) के रूप में कर रहे हैं।”
घरेलू बाजार में फिजिकल सोने की कीमत को ट्रैक करने के लिए गोल्ड ईटीएफ बनाए गए हैं। यह एक पैसिव इन्वेस्टमेंट विकल्प हैं। ये सोने की कीमतों पर आधारित होते हैं और गोल्ड बुलियन (भौतिक सोना) में निवेश करते हैं।
सरल शब्दों में, गोल्ड ईटीएफ ऐसी यूनिट्स होती हैं जो भौतिक सोने का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो कागजी या डिमैट रूप में हो सकती हैं। एक गोल्ड ETF यूनिट 1 ग्राम सोने के बराबर होती है और इसे उच्च शुद्धता वाले भौतिक सोने का समर्थन प्राप्त होता है। ये निवेशकों को शेयर बाजार जैसी लचीलापन (फ्लेक्सिबिलिटी) और सोने में निवेश की सादगी– दोनों का लाभ देते हैं।