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HSBC MF की ETF सेगमेंट में एंट्री, लॉन्च किए Gold ETF और FoF; सेफ-हेवन एसेट्स की बढ़ती मांग पर नजर

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HSBC Gold ETF का न्यू फंड ऑफर (NFO) 16 मार्च से 18 मार्च 2026 तक खुला रहेगा। वहीं HSBC Gold ETF Fund of Fund का NFO 19 मार्च से 25 मार्च 2026 के बीच निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा

Last Updated- March 16, 2026 | 6:11 PM IST
gold ETF
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

NFO Alert: भारत में सोने पर आधारित निवेश विकल्पों की बढ़ती मांग के बीच HSBC Mutual Fund ने एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) सेगमेंट में एंट्री कर ली है। एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने निवेशकों को बाजार की अस्थिरता से बचाव और पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन का विकल्प देने के लिए सोने पर आधारित दो नई योजनाएं लॉन्च की हैं। फंड हाउस ने HSBC Gold ETF और HSBC Gold ETF Fund of Fund पेश किए हैं। यह भारत में कंपनी के पहले ETF प्रोडक्ट हैं।

HSBC Gold ETF का न्यू फंड ऑफर (NFO) 16 मार्च से 18 मार्च 2026 तक खुला रहेगा। वहीं HSBC Gold ETF Fund of Fund का NFO 19 मार्च से 25 मार्च 2026 के बीच निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा।

फंड कैसे काम करेंगे?

HSBC Gold ETF मुख्य रूप से फिजिकल गोल्ड और गोल्ड से जुड़े इंस्ट्रूमेंट में निवेश करेगा। इस फंड का प्रदर्शन घरेलू बाजार में सोने की कीमतों के आधार पर तय होगा। योजना की कम से कम 95% संपत्ति सोने या उससे जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की जाएगी, जबकि अधिकतम 5% राशि मनी मार्केट सिक्योरिटीज में लगाई जा सकती है।

वहीं HSBC Gold ETF Fund of Fund अपनी कम से कम 95% संपत्ति HSBC Gold ETF की यूनिट्स में निवेश करेगा। बाकी बची हुई राशि डेट या मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाई जा सकती है। इन दोनों स्कीम्स का मैनजमेंट दीपन पारिख करेंगे।

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₹5,000 से निवेश शुरू

HSBC Gold ETF को NSE और BSE पर लिस्ट किया जाएगा और वहां इसका कारोबार (ट्रेडिंग) होगा। वहीं इसका फंड ऑफ फंड (FoF) वर्जन सीधे एसेट मैनेजमेंट कंपनी के जरिए लिया जा सकेगा। इसमें निवेशक लंपसम निवेश, SIP, SIP टॉप-अप, STP और SWP जैसे कई निवेश विकल्पों के माध्यम से निवेश कर सकते हैं।

न्यू फंड ऑफर (NFO) के दौरान निवेशक कम से कम 5,000 रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं। इसके बाद 1 रुपये के मल्टीपल में आगे निवेश किया जा सकता है।

गोल्ड एसेट एलोकेशन का अहम हिस्सा

एचएसबीसी म्युचुअल फंड के सीईओ कैलाश कुलकर्णी ने कहा कि सोना लंबे समय से भारतीय घरों में महत्वपूर्ण जगह रखता है। अब इसे निवेश पोर्टफोलियो में एसेट एलोकेशन का अहम हिस्सा भी माना जा रहा है। इससे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता (डायवर्सिफिकेशन) लाने का मौका मिलता है।

उन्होंने कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव के समय सोना सुरक्षा देने वाला निवेश माना जाता है। इसलिए यह लंबे समय में संपत्ति को सुरक्षित रखने और बढ़ाने में मदद कर सकता है। गोल्ड ETF के जरिए निवेशक बिना फिजिकल गोल्ड खरीदने या संभालने की परेशानी के सोने में निवेश कर सकते हैं। इससे निवेशकों को मजबूत पोर्टफोलियो बनाने और अपने वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलती है।

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पोर्टफोलियो में सोना लाए संतुलन

एचएसबीसी म्युचुअल फंड के CIO (इक्विटी) वेणुगोपाल मंगत ने कहा कि सोने का शेयर बाजार से आमतौर पर कम संबंध (लो कोरिलेशन) होता है। इसलिए यह पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन लाने और बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव के समय जोखिम से बचाव के लिए उपयोगी माना जाता है।

उन्होंने कहा कि अगर निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने का एक संतुलित हिस्सा बनाए रखते हैं, तो इससे कुल जोखिम को संभालने और लंबे समय में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि HSBC Gold ETF और HSBC Gold ETF Fund of Fund के जरिए निवेशकों को घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में होने वाले बदलाव से जुड़ने का आसान और लचीला तरीका मिलेगा। इससे उन्हें अपने पोर्टफोलियो में बेहतर डायवर्सिफिकेशन और जोखिम को बेहतर ढ़ग से संभालने में मदद मिल सकती है।

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First Published - March 16, 2026 | 6:11 PM IST

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