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वैल्यू और कॉन्ट्रा फंड्स में पांच साल के लिए करें निवेश, सितंबर में इनफ्लो 84.7% बढ़ा

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इस श्रेणी में 39 फंडों की कुल प्रबंधनाधीन परिसंप​त्तियां (एयूएम) 2.07 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं

Last Updated- October 23, 2025 | 9:31 PM IST
Passive Mutual Fund

वैल्यू और कॉन्ट्रा फंडों में निवेश अगस्त में 1,141 करोड़ रुपये था जो बढ़कर सितंबर में 2,108 करोड़ रुपये हो गया। इस प्रकार एक महीना पहले के मुकाबले निवेश में करीब 84.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। म्युचुअल फंडों के संगठन एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है। इस श्रेणी में 39 फंडों की कुल प्रबंधनाधीन परिसंप​त्तियां (एयूएम) 2.07 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक (वित्तीय सेवा) पीयूष गुप्ता ने कहा, ‘यह वृद्धि जून तिमाही में देखे गए निचले स्तर से सुधार का संकेत देती है। निवेश प्रवाह मार्च के स्तर पर वापस आ गया है।’

मध्यम से लंबी अवधि (5, 10 और 20 वर्ष) के दौरान वैल्यू फंड ने व्यापक बाजार के मुकाबले दमदार रिटर्न दिया है। यूटीआई ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और फंड मैनेजर (इक्विटी) अमित प्रेमचंदानी ने कहा, ‘हाल में एक साल तक बाजार में गिरावट के दौरान एक श्रेणी के तौर पर वैल्यू ने काफी हद तक बाजार के अनुरूप प्रदर्शन किया।’

साल 2016 से 2020 के बीच गुणवत्ता पर केंद्रित शेयरों ने वैल्यू इन्वेस्टिंग से बेहतर प्रदर्शन किया था। कोविड अवधि के बाद कमाई में सुधार होने और नए सिरे से रेटिंग के कारण चक्रीय और मूल्य पर केंद्रित क्षेत्रों में जोरदार उछाल आया। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड के प्रमुख (निवेश रणनीति) चिंतन हरिया ने कहा, ‘पिछले 4 वर्षों के दौरान उनके प्रदर्शन की ताकत स्पष्ट रही है। यही वजह है कि वैल्यू ने एक बार फिर निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है।’

कैसे काम करता है वैल्यू फंड

वैल्यू फंड का निवेश मुख्य तौर पर दो सिद्धांतों- इंट्रिन्सिक वैल्यू और मार्जिन ऑफ सेफ्टी- से निर्दे​शित होता है। हरिया ने कहा, ‘शेयरों को ऐसे समय में चयन किया जाता है जब वे अपने इंट्रिन्सिक वैल्यू से कम मूल्य पर कारोबार करते हैं। मार्जिन ऑफ सेफ्टी वास्तव में इंट्रिन्सिक वैल्यू और बाजार मूल्य के बीच के अंतर को दर्शाता है। अंतर जितना अधिक होगा, मार्जिन ऑफ सेफ्टी उतना ही अधिक होगा।’

फंड मैनेजर प्राइस-टू-बुक वैल्यू, प्राइस-टू-अर्निंग्स अनुपात आदि मानदंडों के जरिये कम मूल्यांकन वाले शेयरों की पहचान करते हैं। गुप्ता ने कहा, ‘वैल्यू फंड उन शेयरों को खरीदते हैं जो अपने इंट्रिन्सिक वैल्यू से काफी छूट पर कारोबार करते हैं, लेकिन जहां लंबी अव​धि में वृद्धि की क्षमता होती है।’

क्यों​ करें निवेश

वैल्यू इन्वेस्टिंग फिलहाल उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जो पसंदीदा नहीं हैं मगर जहां लंब अव​धि में मूल्य की संभावनाएं दिखती हैं। हरिया ने कहा, ‘बाजार चक्र और धारणा में बदलाव होने के साथ-साथ इसमें आम तौर पर अच्छा रिटर्न मिलता है।’

वित्त वर्ष 2026 में कमाई की उम्मीदें कम हो गई हैं। ऐसे में अनुमान और वास्तविक प्रदर्शन के बीच अंतर कम हो गया है। राजकोषीय और मौद्रिक नीतियां अब वृद्धि और खपत का समर्थन करती हैं। प्रेमचंदानी ने कहा, ‘हम वृद्धि में एक चक्रीय उछाल की उम्मीद करते हैं जो कमाई तक पहुंचना चाहिए।’

गुप्ता ने कहा कि वैल्यू फंड ग्रोथ होल्डिंग्स को पूरा करते हैं। इससे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की निवेश शैलियों में विविधता लाने में मदद मिलती है।

कमजोर प्रदर्शन

जब बाजार वृद्धि का समर्थन करता है तो वैल्यू फंड का प्रदर्शन होने लगता है। इसके अलावा, ये फंड एक विरोधी नजरिये को अपनाते हैं और उन शेयरों में निवेश करते हैं जो कम मूल्यांकन वाले दिखते हैं। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रधान प्रबंधक (अनुसंधान) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ‘उन्हें लंबे समय तक कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि कम मूल्यांकन वाले शेयरों को ठीक होने में समय लग सकता है।’

लंबी अव​धि के लिए निवेश

ये फंड लंबी अवधि के निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं। श्रीवास्तव ने कहा, ‘वैल्यू फंड में सफलतापूर्वक निवेश करने के लिए धैर्य के साथ-साथ दीर्घकालिक मानसिकता का होना भी महत्त्वपूर्ण है। कम मूल्यांकन वाले शेयरों की नए सिरे से रेटिंग में समय लगता है। इसलिए निवेशकों के पास कम से कम 5 से सात साल का दायरा होना चाहिए।’

मनीएडुस्कूल के संस्थापक अर्णव पंड्या ने कहा, ‘जो निवेशक मूल्यांकन संबंधी रणनीति को नहीं समझते हैं अथवा जो निवेश को लंबी अव​धि तक बनाए नहीं रख सकते या जो रणनीति के अंजाम तक इंतजार नहीं कर सकते हैं, उन्हें इससे बचना चाहिए।’

विशेषज्ञों की सलाह

जिन निवेशकों ने पहले ही ग्रोथ में निवेश कर दिया है, उन्हें अपनी निवेश शैलियों में विविधता लानी चाहिए। प्रेमचंदानी ने कहा, ‘ग्रोथ और वैल्यू अलग-अलग निवेश शैलियां हैं जो लघु अव​धि से मध्यम अवधि में कमजोर से शानदार चक्रों का पालन करती हैं।’ उन्होंने कहा कि ये फंड निवेशक के मूल पोर्टफोलियो का हिस्सा होने चाहिए।

इन फंडों में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) नजरिये को अपनाने से निवेशकों को बेहतर लाभ होगा। पंड्या ने कहा, ‘विभिन्न बाजार परिस्थितियों के तहत लागत को कम करने के लिए समय के साथ नियमित रूप से निवेश करें।’ उन्होंने सुझाव दिया कि कुल इक्विटी पोर्टफोलियो का 5 फीसदी तक इन फंडों में निवेश किया जा सकता है।

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First Published - October 23, 2025 | 9:12 PM IST

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