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बाजार में उठापटक! कैसे बढ़ेगा पैसा? याद रखें एक्टिव-पैसिव फंड्स का बैलेंस्ड फॉर्मूला

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इस समय बाजारों पर फंडामेंटल फैक्टर्स से ज्यादा वैश्विक घटनाओं का असर दिख रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों को एक्टिव और पैसिव इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी का बैलेंस मिक्स अपनाना चाहिए

Last Updated- May 08, 2026 | 5:39 PM IST
Mutual Fund
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक्टिव और पैसिव दोनों म्युचुअल फंड स्ट्रैटेजी के मिक्स को अपनाना चाहिए। ICRA एनालिटिक्स के अनुसार, इस समय बाजारों पर फंडामेंटल फैक्टर्स से ज्यादा वैश्विक घटनाओं का असर दिख रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों को एक्टिव और पैसिव इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी का बैलेंस मिक्स अपनाना चाहिए। यह मिक्स निवेशकों के वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश अवधि के आधार पर होना चाहिए। इससे पोर्टफोलियो संतुलित रहेगा, लागत कम रहेगी और बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान भी निवेश मजबूत बना रहेगा। साथ ही लंबी अवधि में बेहतर वेल्थ क्रिएशन में मदद मिल सकती है।

एक्टिव-पैसिव स्ट्रैटेजी का मिक्स क्यों जरूरी?

फंड मैनेजमेंट के नजरिये से देखें तो बड़े, अच्छी तरह रिसर्च किए गए और अपेक्षाकृत स्थिर बाजारों में पैसिव स्ट्रैटेजी स्ट्रक्चरल रूप से ज्यादा प्रतिस्पर्धी मानी जाती हैं। वहीं, ऐसे माहौल में जहां बाजार अपेक्षाकृत ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला हो, संवेदनशील कारकों का असर ज्यादा हो और सूचनाएं तेजी से बदल रही हों, वहां एक्टिव मैनेजमेंट बेहतर वैल्यू जोड़ सकता है। निवेशक दोनों इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल कर अस्थिर और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपने वित्तीय लक्ष्यों तक पहुंच सकते हैं।

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एक्टिव-पैसिव में बैलेंस जरूरी

ICRA एनालिटिक्स के सीनियर वाइस प्रसिडेंट और मार्केट डेटा हेड अश्विनी कुमार ने कहा, “बाजार में बढ़ती अस्थिरता के दौर में सभी निवेशकों के लिए कोई एक समान समाधान नहीं हो सकता। निवेशकों को एक्टिव और पैसिव फंड्स के बीच चयन को ‘या तो यह, या वह’ जैसे फैसले के तौर पर नहीं देखना चाहिए।” 

कुमार ने आगे कहा कि हालांकि, इसके लिए अनुभव, डीप रिसर्च और विशेषज्ञता सबसे अहम शर्तें हैं। यह खासतौर पर तब ज्यादा भरोसा देता है, जब बाजारों की दिशा मूलभूत कारकों की बजाय वैश्विक घटनाओं से तय हो रही हो। ऐसे माहौल में निवेशकों को अल्पकालिक बाजार टाइमिंग पर कम और अपने वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम उठाने की क्षमता तथा निवेश अवधि के आधार पर एक्टिव और पैसिव स्ट्रैटेजीज के बैलेंस मिक्स पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। 

डिसिप्लिन एसेट एलोकेशन पर जोर

भू-राजनैतिक तनाव, कमोडिटी कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के कारण बढ़ी बाजार अस्थिरता के माहौल में म्युचुअल फंड निवेशकों को अपने निवेश फैसलों की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए और अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। 

रिपोर्ट में कहा गया कि निवेशकों को अपने निवेश फैसले जोखिम उठाने की क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर लेने चाहिए। बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के दौरान भावनात्मक या जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना जरूरी है। इसके बजाय निवेशकों को अल्पकालिक बाजार शोर पर ध्यान देने की बजाय डिसिप्लिन एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।

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वोलेटाइल मार्केट में एक्टिव फंड्स फायदेमंद

एक्टिव फंड्स बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान बेहतर वैल्यू जोड़ सकते हैं, क्योंकि इनमें सेक्टर एक्सपोजर को जरूरत के मुताबिक बदला जा सकता है। ज्यादा वैल्यूएशन वाले शेयरों से बचा जा सकता है और बाजार में पैदा हुए अवसरों का फायदा उठाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए फंड मैनेजर का मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड और अनुशासित निवेश प्रक्रिया होना जरूरी है।

वहीं, पैसिव फंड्स कम लागत में डायवर्सिफाइड मार्केट एक्सपोजर उपलब्ध कराते हैं और निवेशकों को फंड मैनेजर के कमजोर प्रदर्शन के जोखिम से बचाते हुए लंबे समय तक निवेशित रहने में मदद करते हैं।

Fund Category 1 Year (%) 3 Year (%) 5 Year (%)
Active Passive Active Passive Active Passive
Flexi Cap Fund -1.51 -3.11 14.96 8.49 12.54 7.52
Large & Mid Cap Fund -0.40 -0.86 16.27 1.99 14.78
Large Cap Fund -3.25 -4.11 12.47 10.43 11.72 7.90
Mid Cap Fund 1.92 1.96 20.02 18.03 17.49 10.43
Multi Cap Fund -1.25 -2.89 14.97 7.31
Small-cap Fund -2.16 -5.04 15.96 14.99 17.55 6.06

Source: MF360Explorer

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एक साल के प्रदर्शन में ज्यादातर कैटेगरी में एक्टिव फंड्स ने पैसिव फंड्स से बेहतर रिटर्न दिया। हालांकि दोनों तरह के फंड्स पर बाजार गिरावट का असर दिखा। मिडकैप फंड्स इस अवधि में सबसे बेहतर रहे, जहां एक्टिव और पैसिव दोनों ने करीब 1.9 फीसदी का पॉजिटिव रिटर्न दिया। वहीं, स्मॉलकैप और फ्लेक्सी कैप कैटेगरी में पैसिव फंड्स में ज्यादा गिरावट देखने को मिली।

तीन साल की अवधि में लगभग सभी कैटेगरी में एक्टिव फंड्स ने पैसिव फंड्स को पीछे छोड़ा। खासकर मिडकैप, मल्टीकैप और स्मॉलकैप फंड्स में एक्टिव रणनीतियों ने बेहतर प्रदर्शन किया। मिडकैप एक्टिव फंड्स ने करीब 20 फीसदी का रिटर्न दिया, जबकि पैसिव फंड्स का रिटर्न 18 फीसदी रहा।

पांच साल के नजरिये से देखें तो एक्टिव फंड्स का प्रदर्शन ज्यादातर कैटेगरी में पैसिव फंड्स से काफी बेहतर रहा। स्मॉलकैप और मिडकैप एक्टिव फंड्स ने सबसे मजबूत रिटर्न दिए। वहीं, पैसिव फंड्स ने भी सकारात्मक रिटर्न दिए, लेकिन कई कैटेगरी में वे एक्टिव फंड्स से पीछे रहे।

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First Published - May 8, 2026 | 5:39 PM IST

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