शेयर बाजार में निवेशकों का रुख लगातार बदल रहा है और अब एक साफ ट्रेंड सामने आ रहा है। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि घरेलू और विदेशी निवेशक कंज्यूमर से जुड़े सेक्टर को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं, जबकि बड़े निवेश वाले सेक्टरों से दूरी बना रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि फिलहाल बाजार में सतर्कता बनी हुई है।
एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक, म्युचुअल फंड (MF) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) दोनों ही ऑटो, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल जैसे सेक्टर पर पॉजिटिव हैं। वहीं कैपिटल गुड्स, पावर यूटिलिटी और सीमेंट जैसे निवेश आधारित सेक्टर में उनका रुख नकारात्मक बना हुआ है।
| अवधि (वर्ष) | म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी (%) | विदेशी निवेशक (FPI) हिस्सेदारी (%) |
|---|---|---|
| 2012-13 | करीब 3-4 | करीब 18-19 |
| 2014-15 | करीब 4-5 | करीब 21-22 (उच्च स्तर) |
| 2017-18 | करीब 6-7 | करीब 19-20 |
| 2019-20 | करीब 8-9 | करीब 20-21 |
| 2021-22 | करीब 8-9 | करीब 18-19 |
| 2023-24 | करीब 10-11 | करीब 18-19 |
| 2025 | करीब 12 (उच्च स्तर) | करीब 18 (गिरावट का रुझान) |
पिछले कई सालों में भारतीय शेयर बाजार में म्युचुअल फंड की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है और अब यह अपने उच्च स्तर के करीब पहुंच गई है। वहीं दूसरी तरफ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घटती दिख रही है। पहले जहां बाजार में FPI का दबदबा ज्यादा था, अब घरेलू निवेशक, खासकर म्युचुअल फंड, ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारतीय बाजार में घरेलू निवेशकों की भूमिका मजबूत हो रही है, जबकि विदेशी निवेशकों का रुझान थोड़ा कमजोर पड़ा है।
रिपोर्ट बताती है कि पिछले 6 महीनों में म्युचुअल फंड्स ने फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इसके बदले उन्होंने ऑयल एंड गैस, मेटल, हेल्थकेयर, कैपिटल गुड्स और ऑटो सेक्टर में निवेश घटाया है। वहीं विदेशी निवेशकों ने कैपिटल गुड्स और ऑयल एंड गैस सेक्टर में निवेश बढ़ाया है, जबकि फाइनेंशियल सर्विसेज, कंज्यूमर सर्विसेज और ऑटो सेक्टर में हिस्सेदारी कम की है।
पिछले 6 महीनों में म्युचुअल फंड्स ने कंज्यूमर सर्विसेज, सर्विस सेक्टर, रियल एस्टेट, पावर और एफएमसीजी में जमकर खरीदारी की। वहीं मेटल, ऑयल एंड गैस, कैपिटल गुड्स और ऑटो सेक्टर में बिकवाली देखी गई। दूसरी तरफ, विदेशी निवेशकों ने मेटल, ऑयल एंड गैस और कैपिटल गुड्स सेक्टर में खरीदारी की, जबकि रियल एस्टेट, एफएमसीजी, सीमेंट, कंज्यूमर सर्विसेज और आईटी सर्विसेज में बिकवाली की।
मार्च 2026 में म्युचुअल फंड्स ने कुल हिस्सेदारी का करीब 2.3 प्रतिशत खरीदा। खासतौर पर टेलीकॉम, सर्विस, रियल्टी और कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर में निवेश बढ़ा। वहीं विदेशी निवेशकों ने इसी दौरान करीब 1.9 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची। सबसे ज्यादा बिकवाली रियल एस्टेट, फाइनेंशियल सर्विसेज, सीमेंट और ऑटो सेक्टर में देखी गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल विदेशी निवेश का रुख अस्थिर रह सकता है। इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है, जिससे ग्लोबल बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, हालात सामान्य होने पर विदेशी निवेश फिर से भारत की ओर लौट सकता है। इसके पीछे मजबूत आर्थिक स्थिति, कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीद और विदेशी निवेशकों की अभी कम हिस्सेदारी जैसे कारण बताए गए हैं।