Mutual Funds Stocks: मई में शेयर बाजार में कमजोरी का असर म्युचुअल फंड निवेश पर भी देखने को मिला। लोगों ने निवेश तो जारी रखा, लेकिन पहले जितना उत्साह नहीं दिखा। खासकर इक्विटी और हाइब्रिड फंडों में पैसा आने की रफ्तार धीमी पड़ गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि एसआईपी के जरिए निवेश लगातार मजबूत बना रहा। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक मई में म्युचुअल फंड उद्योग का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 81.6 लाख करोड़ रुपये रहा। यह अप्रैल के मुकाबले थोड़ा कम रहा, लेकिन पिछले साल के मुकाबले अब भी 13 प्रतिशत ज्यादा है।
मई के दौरान शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी निवेशकों को थोड़ा सतर्क कर दिया। इसका असर सीधे म्युचुअल फंड निवेश पर दिखा। इक्विटी और हाइब्रिड फंडों में कुल शुद्ध निवेश घटकर करीब 27,800 करोड़ रुपये रह गया, जो अप्रैल के मुकाबले 40 प्रतिशत कम है। रिपोर्ट के मुताबिक नए निवेश में कमी आई, जबकि कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की। यही वजह रही कि कुल निवेश प्रवाह कमजोर पड़ा।
मई में इक्विटी फंडों में करीब 22,900 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। यह रकम बुरी नहीं है, लेकिन अप्रैल के मुकाबले काफी कम रही। फ्लेक्सी-कैप फंड सबसे ज्यादा पसंद किए गए। इनमें करीब 5,180 करोड़ रुपये आए। स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और दोनों श्रेणियों में अच्छी रकम आई। हालांकि थीमैटिक और सेक्टर आधारित फंडों का आकर्षण कुछ कम होता दिखा। इन फंडों में निवेश काफी घट गया।
बाजार चाहे ऊपर जाए या नीचे, एसआईपी निवेशक लगातार पैसा डालते रहे। मई में एसआईपी के जरिए करीब 30,950 करोड़ रुपये का निवेश आया। दिलचस्प बात यह है कि एसआईपी से आया पैसा कुल इक्विटी निवेश से भी ज्यादा रहा। रिपोर्ट का कहना है कि यह दिखाता है कि छोटे निवेशक अब बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय लंबे समय तक निवेश करने की रणनीति अपना रहे हैं।
अप्रैल में डेट फंडों में खूब पैसा आया था, लेकिन मई में तस्वीर बदल गई। मई के दौरान डेट फंडों से करीब 97,000 करोड़ रुपये निकल गए। आमतौर पर कंपनियां और बड़े निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से इन फंडों में पैसा लगाते और निकालते हैं, इसलिए इस तरह का उतार-चढ़ाव देखने को मिलता रहता है।
सोने की कीमतें बढ़ने से गोल्ड ईटीएफ की कुल संपत्ति बढ़ी है। हालांकि कुछ निवेशकों ने ऊंचे भाव पर मुनाफा भी वसूला, इसलिए गोल्ड ईटीएफ से थोड़ा पैसा निकला भी। इसके बावजूद इस श्रेणी का कुल आकार बढ़ा है।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का मानना है कि मई के आंकड़े थोड़ी सुस्ती जरूर दिखाते हैं, लेकिन म्युचुअल फंड उद्योग की लंबी अवधि की कहानी अब भी मजबूत है। लोग धीरे-धीरे अपनी बचत बैंक जमा और पारंपरिक विकल्पों से निकालकर म्युचुअल फंड और दूसरे वित्तीय उत्पादों में लगा रहे हैं। एसआईपी का चलन भी लगातार बढ़ रहा है। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले वर्षों में म्युचुअल फंड उद्योग तेजी से बढ़ता रहेगा और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों का कारोबार भी मजबूत रहेगा। इस सेक्टर में ब्रोकरेज को आईसीआईसीआई एएमसी, निप्पॉन एएमसी और एचडीएफसी एएमसी सबसे ज्यादा पसंद हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)