facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Kotak MF ने उतारा नया इंडेक्स फंड, Alpha और Low-Volatility स्ट्रैटजी पर फोकस

Advertisement

कोटक म्युचुअल फंड के Kotak Nifty Alpha Low-Volatility 30 Index Fund का सब्सक्रिप्शन 29 मई से खुल गया है।

Last Updated- May 29, 2026 | 2:59 PM IST
Mutual Fund
प्रतीकात्मक फोटो

Mutual Fund NFO: कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (KMAMC) ने नया इंडेक्स फंड Kotak Nifty Alpha Low-Volatility 30 Index Fund लॉन्च किया है। यह एक ओपन-एंडेड इंडेक्स फंड है। इस योजना का न्यू फंड ऑफर (NFO) निवेशकों के लिए 29 मई 2026 को खुलेगा और 12 जून 2026 को बंद होगा। फंड हाउस का कहना है कि इस फंड में मिनिमम 1000 रुपये से शुरू कर सकते हैं। इस स्कीम में कोई ए​ग्जिट लोड नहीं है। इसका बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी अल्फा लो-वॉलेटिलिटी 30 इंडेक्स (TRI) है। इस स्कीम के फंड मैनेजर देवेंद्र सिंघल हैं।

क्या है अल्फा लो-वॉलेटिलिटी स्ट्रैटेजी

फंड हाउस का कहना हैकि Nifty Alpha Low-Volatility 30 Index उन 30 कंपनियों के प्रदर्शन को ट्रैक करता है, जिन्हें Alpha और Low-Volatility फैक्टर्स के आधार पर चुना जाता है। यहां Alpha का मतलब उन शेयरों से है जिनमें ब्रॉडर मार्केट से बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता होती है, जबकि लो-वॉलेटिलिटी उन शेयरों पर ध्यान देता है जिनमें कीमतों में अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव होता है।

इन दोनों फैक्टर्स को मिलाकर यह इंडेक्स बेहतर रिटर्न की संभावना और रिस्क मैनेजमेंट के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करता है। यह इंडेक्स रूलबेस्ड अप्रोच पर काम करता है और समय-समय पर इसकी रिबैलेंसिंग की जाती है।

किसे करना चाहिए निवेश?

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक निलेश शाह ने कहा कि कोटक म्युचुअल फंड में फोकस लगातार ऐसे निवेश विकल्प उपलब्ध कराने पर है जो निवेशकों की बदलती जरूरतों को पूरा कर सकें। Kotak Nifty Alpha Low-Volatility 30 Index Fund एक फैक्टर-आधारित रणनीति का पालन करता है, जो अल्फा और लो-वॉलेटिलिटी खासियतों को जोड़ता है। यह निवेशकों को एक स्ट्रक्चर्ड और ट्रांसपरेंट ढांचे के जरिए इक्विटी में निवेश का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि लंबे निवेश अवधि वाले निवेशक इस फंड पर विचार कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें… Explainer: सेबी क्यों बढ़ाना चाहता है भारत का बॉन्ड मार्केट, छोटे निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और फंड मैनेजर देवेंद्र सिंघल का कहना है कि यह स्ट्रैटेजी अल्फा और लो-वॉलेटिलिटी फैक्टर्स को मिलाकर ऐसे शेयरों की पहचान करती है, जिनमें बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता हो और जो बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान अपेक्षाकृत स्टेबल बने रह सकें।

उनका कहना है कि समय के साथ यह स्ट्रैटेजी ऐसा पोर्टफोलियो बनाने में मदद करती है जो निवेश के अवसरों का लाभ उठा सके और साथ ही अस्थिरता को भी नियंत्रित रखे। यह निवेशकों को एक डायवर्सिफाइड और फैक्टर-आधारित इक्विटी पोर्टफोलियो बनाने में मदद करता है।

यह फंड कहां निवेश करेगा?

फंड हाउस के मुताबिक, यह स्कीम खासतौर से Nifty Alpha Low-Volatility 30 Index में शामिल कंपनियों के शेयरों में निवेश करेगी। फंड का मकसद इंडेक्स के प्रदर्शन को करीब से ट्रैक करना है, इसलिए जिन शेयरों का इंडेक्स में जितना वेटेज होगा, फंड भी लगभग उसी अनुपात में निवेश करेगा। इसके अलावा फंड इंडेक्स से जुड़े फ्यूचर्स और ऑप्शंस जैसे डेरिवेटिव्स में भी निवेश कर सकता है, ताकि इंडेक्स को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सके। फंड जरूरत पड़ने पर इक्विटी और इक्विटी से जुड़े अन्य इन्स्ट्रूमेंट्स जैसे कन्वर्टिबल बॉन्ड, डिबेंचर और वारंट्स में भी निवेश कर सकता है।

सुरक्षित और लि​क्विडिटी बनाए रखने के लिए फंड केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी बॉन्ड, ट्रेजरी बिल, सरकारी प्रतिभूतियों, रीपो और रिवर्स रीपो जैसे निवेश विकल्पों में भी पैसा लगा सकता है। इसके साथ ही फंड सरकारी एजेंसियों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा जारी डेट सिक्योरिटीज, कॉरपोरेट बॉन्ड और नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स में भी सीमित निवेश कर सकता है।

Also Read: एक साल में 14% और तीन साल में 86% रिटर्न, अब Siemens पर क्या है ब्रोकरेज की राय?

 

फंड अपने कुछ पैसे अन्य म्युचुअल फंड योजनाओं की यूनिट्स, बैंकों में शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स (जैसेकि सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CD), कमर्शियल पेपर (CP), ट्रेजरी बिल, ट्राई-पार्टी रीपो, और SEBI और RBI से मंजूरी अन्य शॉर्ट निवेश इंस्ट्रूमेंट्स) में भी निवेश कर सकता है।

(डिस्क्लेमर: बिजनेस स्टैंडर्ड प्राइवेट लिमिटेड में कोटक समूह के नियंत्रण वाली इकाइयों की बहुलांश हिस्सेदारी है। यहां म्युचुअल फंड स्कीम की डिटेल दी गई है। ये निवेश की सलाह नहीं है। म्युचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

(बिजनेस स्टैंडर्ड प्राइवेट लिमिटेड में कोटक समूह के नियंत्रण वाली इकाइयों की बहुलांश हिस्सेदारी है।)

Advertisement
First Published - May 29, 2026 | 2:50 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement