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₹2 लाख नहीं, अब सिर्फ ₹1,000 से शुरू करें सोशल इम्पैक्ट फंड्स में निवेश; SEBI ने खोला SSE का रास्ता

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इसका मकसद सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) पर रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना है

Last Updated- April 21, 2026 | 4:05 PM IST
Socail Impact Funds
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो: एआई-जनरेटेड

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने सोशल इम्पैक्ट फंड्स (social impact funds) में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश राशि को 2 लाख रुपये से घटाकर 1,000 रुपये कर दिया है। इसका मकसद सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) पर रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना है। यह कदम सेबी के ICDR (इश्यू ऑफ कैपिटल एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2018 के तहत “जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट्स” में सब्सक्रिप्शन के लिए मिनिमम निवेश को सोशल इम्पैक्ट फंड की मिनिमम निवेश राशि के बराबर करना है, ताकि दोनों के नियम एक जैसे हो जाएं।

SEBI ने AIF नियमों में किया बदलाव

पहले, AIF नियमों के अनुसार व्यक्तिगत निवेशकों को सोशल इम्पैक्ट फंड में कम से कम 2 लाख रुपये निवेश करने होते थे, जो SSE पर लिस्टेड या रजिस्टर्ड गैर-लाभकारी संगठनों (NPOs) की प्रतिभूतियों में निवेश करता है। अब, 16 अप्रैल के अपने नोटिफिकेशन में सेबी ने इस सीमा को घटाकर 1,000 रुपये कर दिया है। इसे लागू करने के लिए सेबी ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) नियमों में संशोधन किया है।

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निवेशकों के लिए क्या है इसके मायने?

पहले सोशल इम्पैक्ट निवेश करना आसान नहीं था, क्योंकि इसमें लाखों रुपये लगाने पड़ते थे। अब नए नियम के बाद आप सिर्फ 1,000 रुपये से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। अब आपको रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म के जरिए वेरिफाइड सोशल प्रोजेक्ट्स में निवेश करने का मौका मिलता है। आप सामाजिक कार्यों को एक पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से सपोर्ट कर सकते हैं।

सरल शब्दों में, अब सोशल निवेश सिर्फ अमीर निवेशकों तक सीमित नहीं रहा, यह आपके लिए भी खुल गया है।

लेकिन यह सामान्य निवेश जैसा नहीं है। निवेश करने से पहले एक जरूरी बात समझ लें। आम निवेश का मकसद पैसा बढ़ाना होता है। लेकिन सोशल इम्पैक्ट निवेश, खासकर “जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट्स” में, आपका पैसा रिटर्न देने के लिए नहीं बल्कि सामाजिक प्रभाव पैदा करने और गैर-लाभकारी संस्थाओं को फंड देने के लिए है।

सरल शब्दों में, यह कमाई वाला निवेश नहीं, बल्कि एक पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से किया गया दान है।

NPOs की रजिस्ट्रेशन वैलिडिटी बढ़ी

इससे पहले, सेबी ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) पर गैर-लाभकारी संगठनों (NPOs) के लिए रजिस्ट्रेशन की वैधता बढ़ा दी थी। इसके तहत उन्हें बिना फंड जुटाए तीन साल तक NPO के रूप में रजिस्टर्ड रहने की अनुमति दी गई थी। साथ ही, जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) इंस्ट्रूमेंट्स जारी करने के लिए न्यूनतम सब्सक्रिप्शन की शर्त भी कम कर दी गई थी।

सेबी ने यह वैधता अवधि मौजूदा दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी, जिसके दौरान NPOs बिना फंड जुटाए SSE पर रजिस्टर्ड रह सकते हैं।

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NPOs के लिए फंड जुटाना हुआ आसान

इसके अलावा, नियामक ने जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) इंस्ट्रूमेंट्स के लिए न्यूनतम सब्सक्रिप्शन आवश्यकता को 75% से घटाकर 50% कर दिया है, ताकि NPOs के लिए फंड जुटाने में अधिक लचीलापन मिल सके।

सेबी ने कहा कि यह छूट केवल उन प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी, जहां लागत और परिणाम प्रति यूनिट के आधार पर स्पष्ट रूप से तय किए जा सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आंशिक सब्सक्रिप्शन (कम फंड जुटने) से प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

AIF के लिए एग्जिट नियम आसान बने

इसके अलावा, सेबी ने कहा कि ऐसे AIFs, जो अपने फंड की अवधि समाप्त होने के बाद कोई राशि अपने पास नहीं रखते, उन्हें निर्धारित नियमों का पालन करने की शर्त पर “इनऑपरेटिव” दर्जा लेने की अनुमति दी जा सकती है।

सेबी ने कहा, “एक अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड को बोर्ड द्वारा समय-समय पर तय किए गए तरीके और शर्तों के अनुसार ‘इनऑपरेटिव फंड’ के रूप में चिन्हित किया जा सकता है।”

यह कदम इस सिद्धांत पर आधारित है कि जहां प्रतिभूति बाजार में प्रवेश के लिए तय पात्रता मानदंड होते हैं, वहीं बाहर निकलने (जब कोई यूनिट अपनी गतिविधियां बंद करना चाहती है) की प्रक्रिया भी स्पष्ट, पूर्वानुमान योग्य और संचालन के लिहाज से प्रभावी होनी चाहिए।

(PTI इनपुट के साथ)

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First Published - April 21, 2026 | 4:05 PM IST

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