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ओपन एंडेड, क्लोज एंडेड, डायरेक्ट प्लान, रेगुलर प्लान; निवेश से पहले समझ लें म्युचुअल फंड के ये टर्म्स

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SIP, NAV, टैक्स और प्लान्स की सही समझ से ही मिलेगा बेहतर रिटर्न और कम जोखिम

Last Updated- April 27, 2026 | 12:12 PM IST
mutual funds
Representational Image

Mutual Funds: म्युचुअल फंड्स में निवेश शुरू करने के बारे में सोचते हैं, तो एसआईपी, लम्पशम, एनएवी, डायरेक्ट प्लान, रेगुलर प्लान जैसे कुछ टर्म सामने आते हैं। अब आप यह सोच रहे होंगे कि आ​खिर से टर्म क्या हैं और म्युचुअल फंड में निवेश करने से पहले इनके बारे में क्यों जानना-समझना चाहिए। दरअसल, म्युचुअल फंड्स से जुड़े ये कुछ बुनियादी टर्म हैं, जिनके बारे में निवेशक को पता होना चाहिए। जिससे कि उसे अपने निवेश और वित्तीय लक्ष्य को लेकर स्पष्टता रहे। म्युचुअल फंड में निवेश पर भी बाजार के उतार-चढ़ाव का असर होता है. आइए जानते हैं म्‍युचुअल फंड से जुड़े कुछ टर्म्‍स के मतलब…

SIP and Lumpsum

Mutual Funds में निवेश के दो प्रमुख तरीके होते हैं। पहला, एकमुश्त (लम्पशम) निवेश, जिसमें आप एक बार में पूरी राशि निवेश करते हैं। दूसरा तरीका SIP यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान है, जिसमें आप हर महीने एक निश्चित राशि निवेश करते हैं। SIP के जरिए महज 100 रुपये से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। लंबी अवधि के लिए SIP निवेश में कंपाउंडिंग का लाभ मिलता है। हालांकि, अगर बाजार लगातार ऊपर जा रहा हो, तो एकमुश्त निवेश ज्यादा रिटर्न दे सकता है।

Open-ended and Close-ended

निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि फंड का प्रकार क्या है। ओपन एंडेड फंड में आप कभी भी निवेश कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर पैसे निकाल सकते हैं। वहीं, क्लोज एंडेड फंड में निवेश केवल NFO (न्यू फंड ऑफर) के दौरान ही किया जा सकता है और इसमें एक निश्चित लॉक-इन अवधि होती है।

यह पढ़ें: क्या आपका Mutual Funds पोर्टफोलियो सच में डाइवर्सिफाइड है? एक्सपर्ट बता रहे ओवरलैप का सच

Direct and Regular Plan

Mutual Funds में डायरेक्ट और रेगुलर दो तरह के प्लान होते हैं। रेगुलर प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन शामिल होता है, जो आमतौर पर 0.5% से 1% या उससे ज्यादा हो सकता है। यह लागत हर साल आपके रिटर्न को प्रभावित करती है।

वहीं, डायरेक्ट प्लान में आप सीधे AMC (एसेट मैनेजमेंट कंपनी) से निवेश करते हैं, इसलिए इसमें कोई कमीशन नहीं लगता और रिटर्न थोड़ा बेहतर हो सकता है।

NAV

NAV यानी नेट एसेट वैल्यू, म्युचुअल फंड की एक यूनिट की कीमत होती है। इसी के आधार पर यह तय होता है कि आपने कितनी यूनिट खरीदी या बेची है। इसे कुल एसेट वैल्यू में से देनदारियां घटाकर और फिर कुल यूनिट्स की संख्या से भाग देकर निकाला जाता है। आसान शब्दों में, फंड के कुल निवेश (पोर्टफोलियो) की मार्केट वैल्यू को उसकी कुल यूनिट्स से भाग देकर हर यूनिट की कीमत तय की जाती है।

अक्सर Mutual Funds की शुरुआती यूनिट कीमत ₹10 से शुरू होती है और जैसे-जैसे फंड का एसेट बढ़ता है, NAV भी बढ़ता जाता है। आमतौर पर, जो फंड ज्यादा लोकप्रिय होता है, उसका NAV भी समय के साथ ज्यादा हो सकता है। NAV का इस्तेमाल ज्यादातर ओपन-एंडेड फंड्स में किया जाता है। इन फंड्स में यूनिट्स शेयरधारकों के बीच ट्रेड नहीं होतीं, बल्कि सीधे फंड से खरीदी या बेची जाती हैं। NAV निवेशकों को यह समझने में मदद करता है कि उन्हें अपने निवेश को बनाए रखना चाहिए या निकालना चाहिए।

 

(डिस्क्लेमर: यह डीटेल जानकारी के मकसद से है। यह किसी भी तरह से निवेश की सलाह नहीं है। म्युचुअल फंड में निवेश जो​खिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

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First Published - April 27, 2026 | 12:12 PM IST

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