NFO Alert: एसबीआई म्युचुअल फंड ने फाइनैंशियल सर्विस सेक्टर में शॉर्ट-टर्म डेट इंडेक्स को ट्रैक करने वाले दो कॉन्स्टेंट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड लॉन्च किए हैं। इन योजनाओं में SBI CRISIL-IBX Financial Services 3–6 Months Debt Index Fund और SBI CRISIL-IBX Financial Services 9–12 Months Debt Index Fund शामिल हैं। दोनों ओपन-एंडेड इंडेक्स फंड हैं, जिन्हें अपने-अपने CRISIL-IBX Financial Services डेट इंडेक्स को ट्रैक करने के लिए डिजाइन किया गया है। इन दोनों स्कीम का न्यू फंड ऑफर (NFO) 15 अप्रैल से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है और 20 अप्रैल को बंद होगा। इन स्कीम्स का लक्ष्य अपने अंडरलाइंग इंडेक्स के रिटर्न के जितना संभव हो उतना समान रिटर्न देना है। हालांकि, ट्रैकिंग एरर के कारण इसमें कुछ मामूली फर्क रह सकता है।
एनएफओ के दौरान न्यूनतम निवेश राशि 5,000 रुपये है और इसके बाद 1 रुपये के मल्टीपल में निवेश किया जा सकता है। अतिरिक्त निवेश के लिए न्यूनतम राशि 1,000 रुपये है और उसके बाद 1 रुपये के मल्टीपल में निवेश संभव है। निवेश दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, तिमाही, अर्धवार्षिक और सालाना SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के माध्यम से भी किया जा सकता है।
इन दोनों डेट इंडेक्स फंड के फंड मैनेजर राजीव राधाकृष्णन (CFA), CIO – फिक्स्ड इनकम हैं, जो जून 2008 से फंड हाउस से जुड़े हुए हैं।
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एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के एमडी और सीईओ नंद किशोर ने कहा, “इन दोनों फंड्स का लॉन्च उनके सरल, पारदर्शी और कम लागत वाले निवेश विकल्प देने के प्रयास को दिखाता है।” उन्होंने कहा कि ये योजनाएं निवेशकों को शॉर्ट-टर्म फाइनेंशियल सर्विसेज डेट में आसानी से निवेश करने का मौका देती हैं। ये फंड एक साफ और इंडेक्स-आधारित तरीके पर चलते हैं और अल्पकालिक निवेश जरूरतों के अनुसार बनाए गए हैं।
SBI CRISIL-IBX फाइनेंशियल सर्विसेज 3-6 महीने डेट इंडेक्स फंड अपने कुल एसेट का न्यूनतम 95% और अधिकतम 100% हिस्सा CRISIL-IBX फाइनेंशियल सर्विसेज 3-6 महीने डेट इंडेक्स में शामिल प्रतिभूतियों में निवेश करेगा। वहीं, SBI CRISIL-IBX फाइनेंशियल सर्विसेज 9-12 महीने डेट इंडेक्स फंड अपने कुल एसेट का न्यूनतम 95% और अधिकतम 100% हिस्सा CRISIL-IBX फाइनेंशियल सर्विसेज 9-12 महीने डेट इंडेक्स में शामिल प्रतिभूतियों में निवेश करेगा।
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दोनों फंडों में शेष अधिकतम 5% एसेट अन्य सुरक्षित साधनों में निवेश कर सकते हैं। इनमें डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे कमर्शियल पेपर, कमर्शियल बिल और सरकारी प्रतिभूतियां (G‑Secs, SDLs और ट्रेजरी बिल) शामिल हैं, जिनकी अवधि एक साल तक होती है। इसके अलावा कॉल/नोटिस मनी, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट और आरबीआई द्वारा समय-समय पर बताए गए अन्य समान साधनों में भी निवेश किया जा सकता है। इन निवेशों में कैश और कैश इक्विवेलेंट जैसे साधन, ट्राई-पार्टी रेपो और लिक्विड म्युचुअल फंड की यूनिट्स भी शामिल हो सकती हैं।
(डिस्क्लेमर: यहां NFO की डीटेल दी गई है। ये निवेश की सलाह नहीं है। म्युचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)