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SEBI का बड़ा फैसला: नई इंसेंटिव स्कीम की डेडलाइन बढ़ी, अब 1 मार्च से लागू होंगे नियम

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नई इंसेंटिव स्कीम नए व्यक्तिगत निवेशकों को B-30 शहरों से और किसी भी शहर की नई महिला निवेशकों को ऑनबोर्ड करने के लिए है

Last Updated- January 08, 2026 | 6:49 PM IST
Passive Mutual Fund

मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने म्युचुअल फंड इंडस्ट्री से जुड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स को बड़ी राहत दी है। सेबी ने बुधवार को म्युचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए नए अतिरिक्त इंसेंटिव स्ट्रक्चर (additional incentives structure) को लागू करने की समयसीमा 1 मार्च तक बढ़ा दी। यह स्ट्रक्चर नए व्यक्तिगत निवेशकों को B-30 शहरों से और किसी भी शहर की नई महिला निवेशकों को ऑनबोर्ड करने के लिए है। पहले यह नया इंसेंटिव स्ट्रक्चर 1 फरवरी 2026 से लागू होने वाला था। म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में उपयोग की जाने वाली कैटेगरी के अनुसार, B-30 उन जगहों को कहा जाता है जो टॉप-30 शहरों से बाहर हैं।

सेबी ने क्यों बढ़ाई डेडलाइन?

म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की ओर से मिली प्रतिक्रिया में कहा गया था कि नए इंसेंटिव नियमों को लागू करने के लिए जरूरी सिस्टम और प्रक्रियाएं तैयार करने में दिक्कत आ रही है। इसी वजह से सेबी ने इसे लागू करने की समयसीमा आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

सेबी के अनुसार, ये नए नियम अब 1 मार्च 2026 से लागू होंगे।

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डिस्ट्रीब्यूटर्स को कितना मिलेगा इंसेंटिव?

नए नियमों के तहत, एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMCs) नए निवेशक लाने वाले डिस्ट्रीब्यूटर्स को इंसेंटिव देंगी। इसके लिए पहले लंपसम निवेश या पहले साल की SIP राशि का 1 फीसदी, अधिकतम 2,000 रुपये तक दिया जाएगा। यह इंसेंटिव तभी मिलेगा जब निवेशक कम से कम एक साल तक निवेश बनाए रखेगा। यह कमीशन AMCs द्वारा निवेशक शिक्षा के लिए पहले से अलग रखे गए 2 बेसिस पॉइंट से दिया जाएगा और यह मौजूदा ट्रेल कमीशन के अतिरिक्त होगा।

हालांकि, B-30 शहरों की किसी महिला निवेशक पर दोहरा इंसेंटिव नहीं दिया जाएगा। साथ ही, यह अतिरिक्त कमीशन ईटीएफ, कुछ फंड ऑफ फंड्स और बहुत कम अवधि की स्कीमों जैसे ओवरनाइट, लिक्विड, अल्ट्रा-शॉर्ट और लो ड्यूरेशन फंड्स पर लागू नहीं होगा।

(PTI इनपुट के साथ)

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First Published - January 8, 2026 | 6:47 PM IST

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