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IPO से पहले AIFs वैल्यूएशन पर सेबी की सख्त नजर, ढिलाई से निवेशकों का भरोसा घटेगा

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उन्होंने जोर देकर कहा कि कई AIFs शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स और कम नकदी वाले एसेट्स (illiquid assets) में निवेश करते हैं

Last Updated- March 11, 2026 | 4:09 PM IST
SEBI Chairman Tuhin Kanta Pandey
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय (Tuhin Kanta Pandey) ने बुधवार को कहा कि अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIFs) को अपने निवेश के वैल्यूएशन में ज्यादा अनुशासन बरतने की जरूरत है, क्योंकि उनके पोर्टफोलियो की कई कंपनियां अब कैपिटल मार्केट में उतरने की तैयारी कर रही हैं।

सही वैल्यूएशन बेहद जरूरी

पांडेय ने कहा कि AIF इकोसिस्टम की विश्वसनीयता मजबूत और पारदर्शी वैल्यूएशन प्रक्रियाओं से शुरू होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कई AIFs शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स और कम नकदी वाले एसेट्स (illiquid assets) में निवेश करते हैं।

उन्होंने कहा, “कमजोर या अपारदर्शी वैल्यूएशन निवेशकों के भरोसे को कमजोर करते हैं। जब निवेश प्राप्त कंपनियां सार्वजनिक बाजारों की ओर बढ़ती हैं, तो वैल्यूएशन से जुड़ी चिंताएं कीमत तय होने की प्रक्रिया (प्राइस डिस्कवरी) को प्रभावित कर सकती हैं और भरोसे को भी कमजोर कर सकती हैं। इसलिए निष्पक्ष वैल्यूएशन बेहद जरूरी है।”

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PE समर्थित कंपनियों की IPO की तैयारी

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्राइवेट इक्विटी समर्थित कंपनियों की बड़ी संख्या आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए बाजार का रुख कर रही है। EY के अनुसार, कैलेंडर ईयर 2025 में सार्वजनिक बाजारों के माध्यम से प्राइवेट इक्विटी समर्थित एग्जिट के कुल 42 सौदे हुए, जिनकी कुल कीमत 3.89 अरब डॉलर रही।

प्रमुख एग्जिट करने वाली कंपनियों में ग्रो (Groww) की पेरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स, अर्बन कंपनी, टाटा कैपिटल, पाइन लैब्स, हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज, लेंसकार्ट सॉल्यूशंस और टेनेको क्लीन एयर इंडिया जैसी कंपनियां शामिल थीं।

लिस्टिंग से पहले मजबूत गवर्नेंस जरूरी

पांडेय ने यह भी जोर देकर कहा कि अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIFs) उन कंपनियों में कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानकों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं, जो भविष्य में शेयर बाजारों में लिस्ट हो सकती हैं।

उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे कंपनियां पब्लिक ओनरशिप की ओर बढ़ती हैं, उन्हें ज्यादा मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस मानकों के लिए तैयार रहना चाहिए। इसमें स्वतंत्र निदेशक मंडल, संबंधित पक्षों (related-party) से जुड़े लेनदेन पर मजबूत सुरक्षा उपाय और सख्त ऑडिट अनुशासन शामिल हैं। जो AIF शुरुआती चरण में ही इन प्रथाओं को अपनाते हैं, वे बाजार के लिए तैयार कंपनियां बनाने में मदद करते हैं।”

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लचीले नियमों के साथ सख्त मानक

सेबी चीफ ने यह भी कहा कि नियामक ने जहां जरूरी समझा, वहां लचीलापन भी दिया है। इसमें केवल मान्यता प्राप्त निवेशकों (accredited investors) के लिए हल्के नियामकीय ढांचे (light-touch regulations) और AIFs के लिए एनुअल रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को आसान बनाना शामिल है।

उन्होंने कहा कि बाजार के विकास के लिए मजबूत जोखिम प्रबंधन और सही वैल्यूएशन जरूरी है। निवेश करते समय सावधानी बरतनी चाहिए और पोर्टफोलियो का प्रबंधन ईमानदारी से होना चाहिए। जहां जरूरी हो, वहां पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस (ESG) से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। कुल मिलाकर बाजार की तेजी के साथ ऐसे मानकों का पालन होना चाहिए, जिनसे किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।

सेबी द्वारा मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाए जाने के बाद मान्यता प्राप्त निवेशकों (accredited investors) की संख्या तेजी से बढ़कर फरवरी 2026 तक 2,181 हो गई है, जो मई 2025 में 649 थी। सेबी इस ढांचे को और आसान बनाने तथा अप्रूवल की समयसीमा को तेज करने पर भी काम कर रहा है।

AIFs के लिए ‘लॉज एंड लॉन्च’ मॉडल पर विचार

पांडेय ने कहा कि सेबी कुछ AIFs योजनाओं के लिए ‘लॉज एंड लॉन्च’ मॉडल पर विचार कर रहा है। इसके तहत मर्चेंट बैंकरों द्वारा जारी ड्यू डिलिजेंस प्रमाणपत्रों पर भरोसा किया जा सकता है। हालांकि केवल मान्यता प्राप्त निवेशकों (accredited investors) के लिए बनाई गई योजनाओं में खुलासों और ड्यू डिलिजेंस की जिम्मेदारी AIF मैनेजर्स की ही रहेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह का मॉडल फंड लॉन्च की प्रक्रिया को तेज करने और निजी पूंजी को तेजी से जुटाने में मदद कर सकता है।

पांडेय ने AIF से यह भी अपील की कि वे स्टार्टअप्स और ऐसे सेक्टर्स में ज्यादा पूंजी लगाएं, जिनमें लॉन्ग टर्म निवेश की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, “भारत को स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल संक्रमण, टिकाऊ बुनियादी ढांचे और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए लॉन्ग टर्म पूंजी की आवश्यकता है। AIF घरेलू और वैश्विक पूंजी को इन क्षेत्रों की ओर प्रवाहित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।”

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First Published - March 11, 2026 | 4:08 PM IST

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