पैसिव म्युचुअल फंड योजनाओं की बढ़ती संख्या पर रोक लगाने के लिए बाजार नियामक सेबी कदम उठा रहा है। इसके लिए इंडेक्स फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) पर भी पोर्टफोलियो ओवरलैप का नियम लागू करने पर विचार किया जा रहा है। इस नियम के तहत एक से दूसरी योजना में अधिकतम 50 फीसदी तक दोहराव हो सकता है और यह नियम अभी ऐक्टिव फंडों पर लागू है।
उद्योग के सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित पाबंदी शुरू में सिर्फ सेक्टर और थीम आधारित पैसिव योजनाओं पर लागू हो सकती है। पैसिव निवेश की एक और बड़ी श्रेणी स्मार्ट-बीटा फंड हैं और इनमें भी यह सीमा लगाई जा सकती है कि कोई एएमसी कितनी संख्या में योजनाएं शुरू कर सकती है। एक म्युचुअल फंड कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ये उद्योग के कुछ सुझाव हैं। हालांकि, नियामक कोई दूसरा तरीका भी अपना सकता है। इस बारे में जानकारी के लिए सेबी और एम्फी को भेजे गए सवालों का जवाब नहीं मिला।
इस साल की शुरुआत में सेबी ने ऐक्टिव सेक्टर और थीमैटिक फंडों के लिए 50 फीसदी ओवरलैप का नियम लागू किया था, ताकि लगभग एक जैसी योजनाओं को शुरू किए जाने से रोका जा सके। उद्योग के एक और अधिकारी के मुताबिक नियामक अब पैसिव सेगमेंट के लिए भी इसी तरह के नियम बनाने पर विचार कर रहा है और उसने एम्फी से इस बारे में राय मांगी है।
पिछले कुछ वर्षों में नई फंड ऑफरिंग मुख्य रूप से पैसिव स्पेस में हुई है क्योंकि परिसंपत्ति प्रबंधक तेजी से बढ़ते इस सेगमेंट में बाजार हिस्सेदारी हासिल करना चाहते हैं। लॉन्च पर कोई पाबंदी न होने और प्रोडक्ट इनोवेशन की ज्यादा गुंजाइश की वजह से ऐसी फंड योजनाओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
पिछले छह सालों में विदेश के लिए योजनाओं समेत पैसिव स्कीमों की संख्या पांच गुना बढ़ गई है। अभी 740 पैसिव योजनाएं हैं और वे अब सभी म्युचुअल फंड योजनाओं की करीब 40 फीसदी हैं जबकि अप्रैल 2020 में यह आंकड़ा सिर्फ 8 प्रतिशत था। इन योजनाओं के लॉन्च में हुई बढ़ोतरी के साथ-साथ निवेशकों की दिलचस्पी भी काफी बढ़ी है। महामारी के बाद से पैसिव योजनाएं, जिनमें गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ और विदेशी फंड ऑफ फंड्स शामिल हैं, के तहत प्रबंधित परिसंपत्तियां (एयूएम) नौ गुना बढ़कर लगभग 15 लाख करोड़ रुपये हो गई हैं।
म्युचुअल फंड योजनाओं की बढ़ती संख्या पर सेबी की नजर सबसे पहले 2024 में तब पड़ी, जब शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी के बीच फंड लॉन्च की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। उस साल 50 से ज्यादा सेक्टर विशेष और थीम आधारित फंड और लगभग 130 पैसिव फंड लॉन्च किए गए थे। थीम बेस्ड और स्मार्ट-बीटा फंड जैसी सीमित और ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में फंड लॉन्च पर ज्यादा जोर होने से नियामक की चिंताएं बढ़ गईं। इन फंडों में निवेशकों का काफी पैसा भी आ रहा था।
बाजार में तेजी के दौर में में नए फंड ऑफर (एनएफओ) अक्सर निवेशकों का ज्यादा ध्यान खींचते हैं। इस दौरान फंड हाउस अक्सर ऐसे सेक्टर, थीम या फैक्टर से जुड़ी योजनाएं लॉन्च करते हैं, जिन्होंने पहले अच्छा रिटर्न दिया हो। इससे निवेशकों के लिए यह जोखिम बढ़ जाता है कि वे किसी दौर के चरम या उसके आस-पास निवेश करें और बाद में उन्हें उम्मीद के मुताबिक रिटर्न न मिले।
तब से, सेबी ने नए लॉन्च की रफ्तार को नियंत्रण में रखने के लिए कई उपाय किए हैं। नियामक ने एनएफओ में स्विच ट्रांजैक्शन पर वितरक कमीशन की सीमा तय कर दी है और बार-बार स्कीम लॉन्च को बढ़ावा देने वाले प्रोत्साहन से निपटने के लिए एनएफओ संग्रह को तय समय-सीमा के भीतर निवेश करना अनिवार्य बना दिया है।