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म्युचुअल फंड में छोटे शहरों का धमाका: पहली बार फोलियो संख्या में बड़े शहरों (T-30) को छोड़ा पीछे

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भारतीय म्युचुअल फंड उद्योग में पहली बार छोटे शहरों (B-30) के निवेशक फोलियो की संख्या बड़े शहरों (T-30) से अधिक हो गई है, जो वित्तीय समावेशन को दर्शाता है

Last Updated- March 08, 2026 | 11:11 PM IST
Mutual Fund
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

म्युचुअल फंड (एमएफ) निवेशक फोलियो के मामले में छोटे शहरों के निवेशकों ने शीर्ष शहरों के मुकाबले बढ़त बना ली है। इससे हाल के वर्षों में प्रमुख शहरों से दूर के क्षेत्रों में निवेशक भागीदारी में तेज बढ़ोतरी का पता चलता है। 

फंड उद्योग निवेशकों को दो व्यापक उपसमूहों में रखता है- टी-30 और बी-30। सबसे अधिक फंड निवेश वाले शीर्ष 30 शहरों को टी-30 कहा जाता है। बाकी को बी-30 के रूप में रखा गया है।

उद्योग के नवीनतम आंकड़ों से पता चला है कि जनवरी 2026 में बी-30 शहरों का कुल व्यक्तिगत निवेशक फोलियो में 50.1 प्रतिशत हिस्सा था, जिससे यह जाहिर होता है कि फोलियो की कुल हिस्सेदारी में पहली बार छोटे शहर टी-30 से आगे निकल गए हैं।

पिछले कुछ वर्षों में बी-30 फोलियो का हिस्सा लगातार बढ़ा है। दिसंबर 2019 में इन शहरों के निवेशकों का फंड उद्योग के कुल फोलियो में 41 प्रतिशत हिस्सा था। यह अनुपात धीरे-धीरे बढ़कर दिसंबर 2023 तक 44.9 प्रतिशत हो गया। पिछले दो वर्षों में इसमें और तेजी आई है।

स्वतंत्र रूप से देखें तो बी-30 शहरों में फोलियो की संख्या में भी तेजी से वृद्धि देखी गई है। यह संख्या दिसंबर 2019 में 3.55 करोड़ से बढ़कर जनवरी 2026 में 13.27 करोड़ हो गई, जो इस अवधि में लगभग चार गुना बढ़ोतरी है। शीर्ष शहरों से इतर निवेशक प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों और एसआई खातों सहित सभी मानकों पर ऊंची वृद्धि दर्ज कर रहे हैं।

बी-30 के शहर नवंबर 2023 में एसआईपी खातों की संख्या में टी-30 के शहरों से आगे निकल गए थे। उद्योग के कारोबारियों का कहना है कि वितरण नेटवर्क के विस्तार, निवेशक जागरूकता में वृद्धि और निरंतर निवेशक शिक्षा अभियानों ने इन क्षेत्रों में म्युचुअल फंडों की पैठ में सुधार लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

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First Published - March 8, 2026 | 11:09 PM IST

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