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US-Focused Funds ने दिया 50% रिटर्न: अब कैसे चुनें सही फंड? AI बूम में निवेश का पूरा गाइड

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इस प्रदर्शन के पीछे कई कारण रहे। बड़ी टेक कंपनियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में तेज उछाल रिटर्न का प्रमुख कारण बना

Last Updated- April 20, 2026 | 8:14 PM IST
US Focused Fund
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

US-Focused Funds: अमेरिका-फोक्स्ड फंड्स ने पिछले एक साल में मजबूत रिटर्न दिए हैं। एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के हिसाब से टॉप-10 म्युचुअल फंड्स (जिन्हें भारतीय म्युचुअल फंड हाउस ऑफर करते हैं) ने इस अवधि में औसतन 50.2 फीसदी का रिटर्न दिया है।

AI की तेजी पर सवार रिटर्न

इस प्रदर्शन के पीछे कई कारण रहे। बड़ी टेक कंपनियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में तेज उछाल रिटर्न का प्रमुख कारण बना। एडलवाइस एसेट मैनेजमेंट के इक्विटी हेड और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर CIO त्रिदीप भट्टाचार्य ने कहा, “मजबूत आय, स्थिर आर्थिक वृद्धि और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सहायक नीतियों ने भी पिछले एक साल में ग्रोथ, वैल्यू और डाइवर्सिफाइड अमेरिकी इक्विटी फंड्स को मजबूत डबल-डिजिट रिटर्न देने में मदद की।”

माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, गूगल और मेटा जैसी कंपनियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च 2022 में लगभग 158 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2026 में अनुमानित 653 अरब डॉलर तक कर दिया है। हाइपरस्केलर कंपनियों के इस AI-आधारित पूंजी खर्च में तेजी से अमेरिकी शेयर बाजार को मजबूती मिली है।

वालट्रस्ट के डायरेक्टर और को-फाउंडर हुल भुटोरिया कहते हैं, “चिप्स, रैक्स, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, कूलिंग सिस्टम, फाइबर और डेटा सेंटर सेवाओं के सप्लायर्स को भी इस खर्च चक्र का फायदा मिला है।”

पिछले एक साल में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8.9 फीसदी कमजोर हुआ है। भुटोरिया ने कहा, “इस वजह से अमेरिका-फोक्स्ड फंड्स में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों को अतिरिक्त फायदा मिला है।”

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क्या ऐसे हाई रिटर्न आगे भी जारी रह सकते हैं?

अगर कुछ सकारात्मक परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो निकट भविष्य में रिटर्न मजबूत रह सकते हैं। भट्टाचार्य कहते हैं, “लगातार कमाई में वृद्धि, ब्याज दरों में कटौती के साथ अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सहायक रुख और AI से जुड़ी तेजी आगे भी प्रदर्शन को समर्थन दे सकते हैं।”

AI इंफ्रास्ट्रक्चर का लगातार विस्तार बाजार के कुछ हिस्सों को फायदा दे सकता है। भुटोरिया कहते हैं, “2026 में अमेरिकी कंपनियों का औसत कैपिटल एक्सपेंडिचर लगभग 8 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। इसमें AI डेटा सेंटर प्रमुख हैं, लेकिन अब यह खर्च पावर ग्रिड, कॉपर सप्लाई चेन, ऑटोमेशन और यूटिलिटी सेक्टर तक फैल रहा है।”

अमेरिका में लो-टेक मैन्युफैक्चरिंग में भी फिर से तेजी देखने को मिल रही है।

इन वजहों से घट सकता है रिटर्न?

ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से आगे भी इतने ऊंचे रिटर्न दोहराना मुश्किल हो सकता है। भट्टाचार्य कहते हैं, “बहुत अधिक वैल्यूएशन एक बार फिर ऐसे रिटर्न को रोक सकते हैं।”

AI में होने वाले निवेश में कमी सबसे बड़ा जोखिम माना जा रहा है। भुटोरिया कहते हैं, “अगर AI में किए गए निवेश से मिलने वाले रिटर्न स्पष्ट नहीं होते, तो बड़ी टेक कंपनियां अपने खर्च में कटौती कर सकती हैं।”

महंगाई फिर से बढ़ने पर नीतियां सख्त रह सकती हैं। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें शेयर बाजार की वैल्यूएशन और रिटर्न पर दबाव डाल सकती हैं।

भुटोरिया का कहना है कि ब्याज दरों में कटौती में देरी से उपभोग और रियल एस्टेट कमजोर हो सकते हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के दो सबसे बड़े घटक हैं। वहीं, भट्टाचार्य ने कहा कि अमेरिका में संभावित मंदी, कंपनियों की कमाई में गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव भी रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।

प्राइवेट क्रेडिट बाजार में नकदी की कमी (liquidity crunch) व्यापक बाजारों में असर डाल सकती है। अमेरिका का बढ़ता कर्ज बॉन्ड बाजार की स्थिति बदल सकता है और भविष्य की नीतियों पर भी असर डाल सकता है।

भुटोरिया ने कहा, “टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता व्यापार योजना, सप्लाई चेन और कॉर्पोरेट कमाई को अप्रत्याशित बना देती है।”

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सबसे ज्यादा जोखिम वाले सेक्टर

अमेरिकी बाजार के कुछ हिस्से अन्य की तुलना में ज्यादा कमजोर नजर आते हैं। भट्टाचार्य बताते हैं, “बहुत ज्यादा वैल्यूएशन वाले बड़ी टेक कंपनियों और AI से जुड़े ग्रोथ स्टॉक्स सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। उनकी ऊंची कीमतें उन्हें किसी भी नकारात्मक बदलाव या सख्त नीतियों के प्रति संवेदनशील बनाती हैं।”

ब्याज दरों पर निर्भर क्षेत्रों में, जैसे कि घरेलू उपकरण, ऑटोमोबाइल और होम इम्प्रूवमेंट, पहले से ही दबाव में दिखाई दे रहा है। अगर ब्याज दरों में कटौती में देरी होती रही, तो रियल एस्टेट सेक्टर कमजोर बना रह सकता है। भुटोरिया कहते हैं, “खाद्य और कृषि से जुड़े शेयरों पर इनपुट लागत बढ़ने के कारण मुनाफे का दबाव है।”

अमेरिका फोक्स्ड फंड कैसे चुनें?

शुरुआती निवेशकों को कम लागत वाले अमेरिका फोक्स्ड इंडेक्स फंड या ETF को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो S&P 500, Nasdaq या किसी व्यापक इंडेक्स में निवेश करते हैं। द वेल्थ कंपनी के डिप्टी सीईओ प्रसन्ना पाठक कहते हैं, “जोखिम को कम करने के लिए थीमैटिक या किसी एक सेक्टर में केंद्रित फंड्स की बजाय ब्रॉड मार्केट इंडेक्स या मल्टीकैप फंड्स चुनें।” पैसिव फंड्स में खर्च अनुपात (expense ratio) और ट्रैकिंग एफिशिएंसी भी महत्वपूर्ण होती है।

कुछ निवेश अनुभव हासिल करने के बाद ही निवेशकों को एक्टिव फंड्स की ओर बढ़ना चाहिए, वह भी तभी जब उनकी जोखिम लेने की क्षमता हो। इक्विरस वेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर और बिजनेस हेड अंकुर पुंज कहते हैं, “किसी फंड का कम से कम तीन साल पुराना होना, पर्याप्त AUM होना और लगातार अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी है।”

पाठक के अनुसार, निवेशकों को कंसन्ट्रेशन रिस्क पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि कई फंड्स अभी भी टेक्नोलॉजी जैसे कुछ ही सेक्टर्स में ज्यादा केंद्रित हैं।

सीमित फंड्स में ही सब्सक्रिप्शन उपलब्ध

निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि म्युचुअल फंड्स के विदेशी निवेश पर 7 अरब डॉलर की नियामकीय सीमा लागू होती है, जिससे निवेशकों पर असर पड़ सकता है। किसी भी समय केवल कुछ ही अमेरिका-फोक्स्ड फंड्स में नए निवेश (inflows) के लिए जगह उपलब्ध होती है।

पाठक के अनुसार, नए सब्सक्रिप्शन को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है, खासकर एकमुश्त (lump sum) निवेश को। इसी तरह SIP को भी रोका या सीमित किया जा सकता है।

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टैक्स के लिहाज से कम फायदेमंद

अमेरिका-फोक्स्ड फंड्स पर टैक्स का नियम घरेलू इक्विटी फंड्स की तुलना में कम अनुकूल है। टैक्स के लिहाज से इन्हें नॉन-इक्विटी फंड माना जाता है। पुंज बताते हैं, “24 महीने के बाद होने वाले लाभ को लॉन्ग टर्म माना जाता है और उस पर 12.5 फीसदी टैक्स लगता है। शॉर्ट-टर्म गेन पर निवेशक की इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।” इसके अलावा, इन फंड्स के डिविडेंड पर अमेरिका में 25 फीसदी विथहोल्डिंग टैक्स लगता है, जिसे भारत में टैक्स क्रेडिट के रूप में क्लेम किया जा सकता है।

मौजूदा निवेशक क्या करें?

मौजूदा निवेशकों को अनुशासित और लंबी अवधि की निवेश रणनीति अपनानी चाहिए। भट्टाचार्य के अनुसार, “उन्हें बाजार को टाइम करने की कोशिश करने के बजाय नियमित रूप से SIP जारी रखना चाहिए।”

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अगर अमेरिकी इक्विटी में निवेश तय सीमा से ज्यादा हो गया है, तो निवेशकों को पोर्टफोलियो को बैलेंस करने के लिए आंशिक मुनाफावसूली (partial profit booking) पर विचार करना चाहिए।

नए निवेशक क्या करें?

भौगोलिक विविधता (Geographical diversification) भारतीय निवेशकों के लिए एक समझदारी भरी रणनीति है। नेक्सएज कैपिटल के CIO गौरव कुलश्रेष्ठ ने कहा, “अमेरिका दुनिया का सबसे गहरा और सबसे ज्यादा इनोवेशन वाला इक्विटी बाजार है।”

पुंज ने कहा, “लगभग 20-25 फीसदी इक्विटी निवेश भारत के बाहर किया जाना चाहिए ताकि बाजार और मुद्रा (currency) दोनों का जोखिम संतुलित रहे, और इसमें अमेरिका अंतरराष्ट्रीय निवेश का बड़ा हिस्सा होना चाहिए।”

अमेरिकी बाजार अब सस्ता नहीं रह गया है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह किसी बुलबुले (bubble) जैसी स्थिति में भी नहीं है। नए निवेशकों को अमेरिका में निवेश को लंबी अवधि की रणनीति के रूप में देखना चाहिए। पुंज बताते हैं, “सिर्फ इसलिए कि पिछले 18 महीनों में अमेरिका-फोक्स्ड फंड्स ने भारतीय बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया है, उनमें निवेश करना ‘mean-reversion trap’ (यानी बाद में रिटर्न उलटने का जोखिम) बन सकता है।”

इन फंड्स में निवेश के लिए 7 से 10 साल का लंबा निवेश का समय रखना चाहिए। वह कहते हैं, “लंबी अवधि रखने से हाई वैल्यूएशन पर एंट्री का असर कम हो जाता है।”

कुलश्रेष्ठ सुझाव देते हैं कि नए निवेशकों को अपने तय निवेश को 18-24 महीनों में SIP या सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के जरिए धीरे-धीरे निवेश करना चाहिए। अंत में, नए निवेशकों को अपने रिटर्न की उम्मीदों को भी संतुलित रखना चाहिए। वह कहते हैं, “उन्हें पहले दो से तीन साल को आधार बनाने की अवधि के रूप में देखना चाहिए, जिसमें डॉलर रिटर्न कम रह सकते हैं या नेगेटिव भी हो सकते हैं।”

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First Published - April 20, 2026 | 8:14 PM IST

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