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दिसंबर–मार्च क्यों है लिक्विड और मनी मार्केट फंड्स में निवेश का ‘गोल्डन पीरियड’? Tata MF नें गिनाए 5 बड़े कारण

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मार्च से अप्रैल के बीच में यील्ड्स बढ़ना कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है, बल्कि यह हर साल होने वाला एक पैटर्न है

Last Updated- March 19, 2026 | 5:11 PM IST
Mutual Fund
फोटो: एआई जनरेटेड

दिसंबर से मार्च के बीच का समय निवेशकों के लिए मनी मार्केट फंड्स (Money Market Funds) और लिक्विड फंड्स (Liquid Funds) में निवेश के लिहाज से ऐतिहासिक रूप से अनुकूल माना जाता है। इस अवधि में शॉर्ट-टर्म यील्ड्स में तेजी देखने को मिलती है, जिससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न का मौका मिल सकता है। टाटा म्युचुअल फंड के एक नोट के मुताबिक, खासतौर पर फरवरी और मार्च के महीने मनी मार्केट यील्ड्स के लिए सबसे मजबूत माने जाते हैं। यही वजह है कि इस दौरान लिक्विड और अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म फंड्स में निवेश को एक रणनीतिक कदम माना जाता है।

मार्च-अप्रैल में क्यों बढ़ती हैं यील्ड्स?

मार्च से अप्रैल के बीच में यील्ड्स बढ़ना कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है, बल्कि यह हर साल होने वाला एक पैटर्न है। टाटा म्युचुअल फंड के एक नोट के मुताबिक, इस समय पूरे सिस्टम में पैसों की “कमी” (liquidity tightness) हो जाती है। इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई फैक्टर एक साथ मिलकर काम करते हैं।

1. वित्त वर्ष के अंत में नकदी (लिक्विडिटी) की कमी: कई कंपनियां और वित्तीय संस्थान वित्त वर्ष खत्म होने से पहले अपनी बैलेंस शीट को एडजस्ट करते हैं। इससे शॉर्ट-टर्म फंड्स की मांग बढ़ जाती है, जिससे अल्ट्रा शॉर्ट-टर्म इंस्ट्रूमेंट्स की यील्ड्स ऊपर चली जाती हैं।

2. टैक्स और डिविडेंड पेमेंट से नकदी की मांग बढ़ना: टैक्स पेमेंट और डिविडेंड बांटने के चलते बाजार में नकदी की कमी हो जाती है। कंपनियां और निवेशक टैक्स चुकाने के लिए फंड्स निकालते हैं, जिससे लिक्विडिटी और घटती है।

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3. सरकारी उधारी और ट्रेजरी बिल जारी होना: सरकार भी इस समय ज्यादा ट्रेजरी बिल और बॉन्ड जारी करती है, ताकि वित्त वर्ष के अंत में अपने कैश फ्लो को मैनेज कर सके। इस वजह से शॉर्ट-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स की सप्लाई बढ़ जाती है। जब बाजार में ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स ज्यादा हो जाते हैं, तो निवेशकों का पैसा आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ती है, जिससे शॉर्ट-टर्म ब्याज दरें ऊपर चली जाती हैं।

4. बैंकिंग सेक्टर में लिक्विडिटी पोजीशन एडजस्टमेंट: बैंक मार्च के अंत और पहली तिमाही में अपनी लिक्विडिटी पोजीशन को एडजस्ट करते हैं, जिससे इंटरबैंक मार्केट में ब्याज दरों में अस्थायी उछाल देखने को मिलता है।

5. विदेशी निवेश और करेंसी एडजस्टमेंट: इस समय विदेशी निवेशक अपने निवेश को रीबैलेंस करते हैं या पैसा वापस निकालते हैं, जिससे अल्ट्रा शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी पर असर पड़ता है।

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निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

इन सभी कारणों से मार्च और अप्रैल का समय लिक्विड और मनी मार्केट फंड्स में निवेश के लिए खास माना जाता है। इस दौरान यील्ड्स अपने हाई पर होती हैं, जो बाद में सामान्य हो जाती हैं। ऐसे में, जो निवेशक कम जोखिम के साथ बेहतर शॉर्ट-टर्म रिटर्न चाहते हैं, उनके लिए यह अवधि निवेश का अच्छा मौका हो सकती है।

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First Published - March 19, 2026 | 5:11 PM IST

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