भारत में निवेश का माहौल तेजी से बदल रहा है। अब महिलाएं भी बड़ी संख्या में निवेश की दुनिया से जुड़ रही हैं। एक्सिस डायरेक्ट (Axis Direct) के हालिया कंज्यूमर ट्रेंड्स के अनुसार, 2021 के बाद से महिलाओं द्वारा खोले गए डीमैट खातों (Demat Accounts) में 129 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह रुझान दिखाता है कि देश में महिलाओं की वित्तीय भागीदारी और जागरूकता लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला निवेशकों को सबसे अलग बनाता है उनका निवेश करने का तरीका। उनके कुल निवेश का एक बड़ा हिस्सा म्युचुअल फंड में जाता है। एकमुश्त निवेश (लंपसम) के जरिये महिलाएं 49 फीसदी और SIP के माध्यम से 33 फीसदी पैसा लगाती है। इससे पता चलता है कि वे जल्दी मुनाफे के बजाय लंबी अवधि के लिए सोचकर और अनुशासन के साथ निवेश करती हैं।
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डायरेक्ट इक्विटी, डेरिवेटिव्स और कमोडिटीज में उनका निवेश बहुत कम रहता है, जो उनके जोखिम को समझकर निवेश करने के नजरिए को दर्शाता है। यह रुझान बताता है कि महिला निवेशक लगातार निवेश, डाइवर्सिफिकेशन और लक्ष्य आधारित निवेश पर ज्यादा ध्यान देती हैं।
26 से 45 साल की आयु वर्ग की महिलाओं में सिस्टेमैटिक निवेश (SIP) की पसंद सबसे ज्यादा देखी जा रही है, और यही ग्रुप SIP अपनाने में आगे है। वहीं 25 साल से कम उम्र की और 45 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं म्युचुअल फंड में लंपसम के जरिये निवेश को ज्यादा पसंद करती हैं। इससे यह साफ होता है कि म्युचुअल फंड हर उम्र में भरोसेमंद और आसान निवेश विकल्प बने हुए हैं।
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डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं। महिलाओं द्वारा किए गए लगभग 64 फीसदी इक्विटी ऑर्डर ऑनलाइन पूरे होते हैं, जो यह दिखाता है कि वे तकनीक आधारित निवेश के साथ तेजी से सहज हो रही हैं और डिजिटल पहुंच बाजार में भागीदारी बढ़ा रही है।
ये सभी रुझान मिलकर निवेश की एक नई कहानी बताते हैं। अब महिलाएं सिर्फ ज्यादा संख्या में बाजार में नहीं आ रही हैं, बल्कि एक अनुशासित और मजबूत निवेश संस्कृति भी बना रही हैं। जैसे-जैसे उनकी भागीदारी बढ़ेगी, यह वर्ग भारत के इन्वेस्टमेंट इकोसिस्टम के भविष्य को तय करने में और भी अहम भूमिका निभाएगा।