facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

Adani-Hindenburg मामले में समीक्षा याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट का फैसला बरकरार

Advertisement

न्यायालय ने जनवरी में बाजार नियामक को इस मामले में अपनी शेष दो जांच तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया था।

Last Updated- July 15, 2024 | 11:04 PM IST
Adani-Hindenburg

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को अदालत के 3 जनवरी के निर्णय की समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया। इस निर्णय में अमेरिका स्थित शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा अदाणी समूह के खिलाफ लगाए गए आरोपों की भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की जांच को या तो विशेष जांच दल (एसआईटी) या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने से इनकार कर दिया गया था।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा के पीठ ने कहा, ‘समीक्षा याचिका का अवलोकन करने के बाद, रिकॉर्ड में कोई त्रुटि नहीं पाई गई है। सर्वोच्च न्यायालय के नियम 2013 के ऑर्डर 47 रूल 1 के अंतर्गत समीक्षा का कोई मामला नहीं है। इसलिए, समीक्षा याचिका खारिज की जाती है।’

यह समीक्षा याचिका अनामिका जायसवाल द्वारा दायर कराई गई थी, जो मुख्य मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक थीं। इसमें दावा किया गया कि फैसले में ‘गलतियां और त्रुटियां’थीं और याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण द्वारा प्राप्त नए मैटेरियल ने फैसले की समीक्षा के लिए पर्याप्त कारण प्रदान किए।

याचिका में कहा गया था कि 3 जनवरी, 2024 के आदेश में स्पष्ट त्रुटियां थीं, जिसमें इस अदालत ने अदाणी समूह के प्रमोटरों के स्वामित्व वाली ऑफशोर इकाइयों के माध्यम से बाजार में हेरफेर से जुड़ी धोखाधड़ी की जांच के लिए अदालत की निगरानी में एसआईटी गठित करने की याचिकाकर्ता की मांग को खारिज कर दिया था। इसलिए, इस आदेश की समीक्षा की जानी चाहिए।

न्यायालय ने जनवरी में बाजार नियामक को इस मामले में अपनी शेष दो जांच तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया था। अदालत ने सेबी और केंद्र सरकार से यह भी जांच करने को कहा था कि क्या हिंडनबर्ग रिसर्च और किसी अन्य संस्था द्वारा शॉर्ट पोजीशन लेने की वजह से भारतीय निवेशकों को हुए नुकसान में किसी तरह का कानूनी उल्लंघन तो शामिल नहीं है।

Advertisement
First Published - July 15, 2024 | 11:04 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement