भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल (68 वर्ष) ने एक क्रमिक उत्तराधिकार योजना अपनाने का निर्णय लिया है। यह भारतीय पारिवारिक व्यवसायों में दुर्लभ है। पिछले सप्ताह मित्तल ने अर्निंग कॉल (नतीजे घोषित होने के बाद का आयोजन) में एक 10-वर्षीय पीढ़ीगत बदलाव योजना की घोषणा की जिसे वे भारती एयरटेल में लागू करना चाहते हैं।
चेयरमैन के रूप में पांच साल का नया कार्यकाल सुरक्षित करने के बाद, मित्तल जल्द ही नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू कर पाएंगे, जबकि अपने नेतृत्व में व्यवसाय की निरंतरता और स्थिरता बनाए रखेंगे। उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में ही संकेत दिया था कि उत्तराधिकार योजना उनके मन में है लेकिन हाल ही में हुई अर्निंग कॉल में उनकी अप्रत्याशित उपस्थिति और उसके लिए रोडमैप प्रस्तुत करने से स्थिति स्पष्ट हो गई। भारती एयरटेल के शेयर मूल्यों पर भी इस घोषणा का सकारात्मक असर हुआ है।
इस समूह में उत्तराधिकार योजना को समय और प्रयास दोनों की आवश्यकता होगी क्योंकि एसबीएम (जैसा कि उनके सहयोगी उन्हें कहते हैं) जुलाई 1995 में भारती एयरटेल की स्थापना के समय से ही कंपनी का नाम और चेहरा रहे हैं। यह भारत में मोबाइल टेलीफोनी की शुरुआत के साथ मेल खाता है। अक्सर एक पेशेवर रूप से संचालित पारिवारिक व्यवसाय के उदाहरण के रूप में उद्धृत किए जाने वाले भारती समूह के भावी नेता से इसी मॉडल का पालन करने की अपेक्षा की जाएगी।
कंपनी के कई शीर्ष अधिकारियों ने, जिनमें पूर्व मुख्य कार्याधिकारी और वर्तमान कार्यकारी उपाध्यक्ष गोपाल विट्टल शामिल हैं, लंबे समय तक मुख्य व्यवसाय का संचालन किया है जबकि मित्तल ने दृष्टि प्रदान की और बड़े परिदृश्य को संबोधित किया। मित्तल के जुड़वा बेटे श्रवण और कविन उद्यमिता का अनुभव रखते हैं।
श्रवण टेक स्टार्टअप अनबाउंड के संस्थापक हैं और लंदन स्थित भारती ग्लोबल के प्रबंध निदेशक हैं जो भारती एंटरप्राइजेज की अंतरराष्ट्रीय निवेश शाखा है। वहीं कविन ने हाइक नामक टेक कंपनी की स्थापना की थी, जो हाल ही में बंद हो गई। उनकी बेटी ईशा, भारती फाउंडेशन नामक एक परोपकारी संगठन के बोर्ड में हैं और फैशन तथा लाइफस्टाइल व्यवसाय में रुचि रखती हैं।
वर्षों से मित्तल के नेतृत्व में कंपनी कई तूफानों से निपटने में सफल रही है। जैसे 2जी स्पेक्ट्रम विवाद के बाद दूरसंचार बाजार में उत्पन्न व्यवधान, रिलायंस जियो का प्रवेश और उसके बाद शुल्क की जंग और समायोजित सकल राजस्व यानी एजीआर बकाया पर कानूनी उलझन आदि। लेकिन नई पीढ़ी को उस स्तर की दक्षता और फुर्ती हासिल करने के लिए मार्गदर्शन और सहयोग की आवश्यकता होगी। पिछले सप्ताह के परिणामों के बाद हुई अर्निंग कॉल में मित्तल द्वारा कही गई एक और बात भी ध्यान देने योग्य थी।
उन्होंने कहा कि जब वे अगली पीढ़ी को नेतृत्व सौंपेंगे तब प्रवर्तक इकाई भारती टेलीकॉम को 51 फीसदी हिस्सेदारी के साथ कंपनी का एकमात्र नियंत्रक शेयरधारक बने रहना चाहिए। वर्तमान में भारती टेलीकॉम, एयरटेल में 40.5 फीसदी हिस्सेदारी रखती है। एक जटिल शेयरधारिता संरचना में, सिंगटेल (सिंगापुर का दूरसंचार ऑपरेटर) भारती टेलीकॉम में 20 फीसदी हिस्सेदारी और भारती समूह 20.46 फीसदी हिस्सेदारी रखती है।
मित्तल ने जिस शेयरधारिता समेकन का उल्लेख किया वह उनके भारती एयरटेल को एक दूरसंचार दिग्गज बनाने पर केंद्रित दृष्टिकोण के अनुरूप है। समूह की खुदरा क्षेत्र में अस्थायी रुचि 2013 में समाप्त हो गई जब वॉलमार्ट के साथ भारती का महत्त्वाकांक्षी संयुक्त उद्यम नीतिगत अस्थिरता के कारण आगे नहीं बढ़ पाया। हाल ही में, ब्रिटेन की प्रूडेंशियल पीएलसी ने भारती लाइफ इंश्योरेंस में 75 फीसदी हिस्सेदारी 3,500 करोड़ रुपये में अधिग्रहित करने पर सहमति जताई है।
दूरसंचार क्षेत्र के भीतर, कंपनी की सहयोगी यूटेलसैट वनवेब भारत में अपना सैटेलाइट दूरसंचार उद्यम शुरू करने की प्रतीक्षा कर रही है। इसका अंतरराष्ट्रीय विस्तार, विशेषकर अफ्रीका का दूरसंचार व्यवसाय, भी समूह के लिए अत्यधिक ध्यान का क्षेत्र है। इस हिसाब से देखें तो अगले वर्षों में चरणबद्ध उत्तराधिकार योजना सही दिशा में उठाया गया कदम है ताकि भविष्य में किसी भी विभाजन और विवाद की आशंका को रोका जा सके जो न केवल दूरसंचार क्षेत्र बल्कि भारत के व्यापक आर्थिक परिदृश्य को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।