कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने बुधवार को इन अटकलों को खारिज कर दिया कि तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में विलय हो सकता है। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से और बुधवार को पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोक सभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की।
बंगाल में सत्ता गंवाने वाली तृणमूल कांग्रेस के विधायक और सांसद तेजी से पार्टी से दूर हो रहे हैं। बुधवार को राज्य सभा सदस्य सुष्मिता देव ने भी इस्तीफा दे दिया। वह इस्तीफा देने वाली पार्टी की दूसरी राज्य सभा सांसद हैं। उनसे पहले सुखेंदु शेखर रॉय ने इस्तीफा दिया था। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से भी मुलाकात की थी।
बुधवार को शिवसेना (उद्धव ठाकरे) नेता संजय राउत ने कहा कि तृणमूल और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) जो कभी कांग्रेस का हिस्सा थीं, उन्हें फिर से एकजुट होकर इस पुरानी पार्टी को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने इसे वक्त की जरूरत बताया और दावा किया कि कांग्रेस और अन्य दलों में पहले ही इस दिशा में विचार चल रहा है।
बागी तृणमूल नेता ऋतव्रत बनर्जी ने बुधवार को यह कहते हुए तृणमूल कांग्रेस पर दावा किया कि असंतुष्ट गुट ही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस है और उनका कांग्रेस में विलय करने का कोई इरादा नहीं है।
उन्होंने कहा कि असंतुष्ट गुट की ताकत 58 से बढ़कर 64 विधायकों तक पहुंच गई है। उन्होंने यह भी कहा कि लोक सभा में बागी सांसद भाजपा-नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का समर्थन जारी रखेंगे। जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस आंकड़े का विरोध किया है वहीं बागी गुट ने दावा किया है कि तृणमूल के 28 में से 20 सांसद पहले ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को काकली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में अलग संसदीय गुट बनाने की सूचना दे चुके हैं और उन्होंने राजग को समर्थन देने की घोषणा की है। ममता बनर्जी ने 1997 में कांग्रेस से अलग होकर 1 जनवरी 1998 को तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी।