सरकार ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) में संचालित होने वाली इकाइयों को एक बार की राहत देने की घोषणा की है। सेज इकाइयों को 1 साल की अवधि के लिए कम सीमा शुल्क पर माल बेचने की अनुमति मिल गई है। यह कदम भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते उठाया गया है। इस रियायती शुल्क से निर्यातकों को वर्तमान भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस समय सेज इकाइयों से निर्यात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसे देखते हुए वे अपनी कुछ क्षमता का उपयोग घरेलू बाजार में कर सकेंगी।
वित्त मंत्रालय की एक अधिसूचना के अनुसार यह उपाय 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगा और इसमें प्लास्टिक, कपड़ा, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कई उत्पाद श्रेणियां शामिल होंगी। हालांकि रत्न और आभूषण और पेट्रोल व डीजल उत्पाद जैसे क्षेत्रों को इस सूची से बाहर रखा गया है।
यह कम शुल्क उन इकाइयों तक सीमित रहेगा जिन्होंने 31 मार्च 2025 को या उससे पहले उत्पादन शुरू किया था। इसके लिए कम से कम 20 प्रतिशत मूल्य संवर्धन सुनिश्चित करना होगा और पिछले 3 वर्ष के दौरान इकाइयों के उच्चतम निर्यात मूल्य का 30 प्रतिशत ही घरेलू बाजार में बेचा जा सकेगा।
अधिसूचना में कहा गया है, ‘यह छूट केवल तभी मिलेगी, जब सेज में इकाई ने 31 मार्च 2025 को या उससे पहले माल का उत्पादन शुरू कर दिया हो। इकाइयों को लाभ का दावा करने के लिए सक्षम अधिकारियों के समक्ष यह सुनिश्चित करना होगा वे छूट की सभी शर्तों का पालन कर रही हैं।’हालांकि, फ्री ट्रेड वेयरहाउसिंग जोन में चलने वाली इकाइयों पर यह छूट लागू नहीं होगी।
शुल्क की घटाई गई दरें 5 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत के बीच हैं। अब तक, यदि कोई तैयार उत्पाद घरेलू बाजार में बेचना होता था तो सेज को पूर्ण सीमा शुल्क का भुगतान करना पड़ता था। कुछ मामलों में कृषि बुनियादी ढांचा और विकास उपकर (एआईडीसी) में भी कमी की गई है।
वित्त मंत्री ने बजट भाषण में घोषणा की थी कि सरकार जल्द ही सेज में काम करने वाली पात्र विनिर्माण इकाइयों को रियायती शुल्क पर घरेलू बाजार में माल बेचने के उपाय पेश करेगी। उसके बाद सरकार ने यह घोषणा की है।
सीतारमण ने बजट भाषण में कहा था, ‘वैश्विक व्यापार व्यवधानों के कारण विशेष आर्थिक क्षेत्रों में काम करने वाली विनिर्माण इकाइयों द्वारा क्षमता के उपयोग के बारे में उत्पन्न चिंताओं को दूर करने के लिए मैं एक एक बार के विशेष उपाय के रूप में सेज की विनिर्माण इकाइयों द्वारा रियायती दरों पर घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) में बिक्री की सुविधा का प्रस्ताव करती हूं।’
वाणिज्य विभाग की ओर से सेज में बने उत्पादों की घरेलू बाजार में बिक्री की अनुमति देने की लंबे समय से मांग की जा रही थी। यह मांग तैयार उत्पाद के मामले में नहीं, बल्कि कच्चे माल पर शुल्क छूट देकर राहत की मांग की जा रही थी।
दिल्ली स्थित थिंक टैंक जीटीआरआई ने कहा है कि इस उपाय का प्रभाव मामूली रहने की संभावना है। कई उत्पादों के लिए शुल्क कटौती बहुत कम, लगभग 1 प्रतिशत है। आईजीएसटी पर किसी तरह की राहत न होने से प्रोत्साहन और सीमित हो रहा है। जीटीआरआई की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इसके अलावा कम से कम 20 प्रतिशत मूल्य संवर्धन की जरूरत और घरेलू बिक्री पर 30 प्रतिशत की सीमा सेज फर्मों के लचीलेपन पर प्रतिबंध लगाती हैं। पेट्रोल और डीजल को बाहर रखा जाना विशेष रूप से रिफाइनरी से जुड़े सेज के लिए नीति को कमजोर करता है। यदि उद्देश्य घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देना है, तो चीन और सिंगापुर जैसे देशों की तरह पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने जैसे मजबूत उपायों की आवश्यकता हो सकती है।’