भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2020-21 सीरीज-III के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को समय से पहले भुनाने (premature redemption) की कीमत का ऐलान कर दिया है। इस SGB सीरीज को समय से पहले भुनाने का विकल्प चुनने वाले निवेशकों को 16 जून 2026 के लिए घोषित लेटेस्ट रिडेप्शन प्राइस के आधार पर लगभग 219 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न मिला है। RBI के बयान के अनुसार, इस SGB सीरीज को जारी करने की तारीख से पांचवें वर्ष के बाद ही उस तारीख को भुनाया जा सकेगा, जब ब्याज का भुगतान किया जाता है।
SGB 2020-21 सीरीज-III के लिए 16 जून 2026 को समय से पहले रिडेम्प्शन (premature redemption) की कीमत 14,774 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। रिजर्व बैंक के मुताबिक, यह पिछले तीन कारोबारी दिनों यानी 11 जून, 12 जून और 15 जून 2026 के सोने के बंद भाव के साधारण औसत पर आधारित है।
SGB 2020-21 सीरीज-III को ऑनलाइन निवेशकों के लिए 4,627 रुपये प्रति ग्राम की दर पर जारी किया गया था। इस पर निवेशकों को समय से पहले रिडेम्प्शन की तारीख पर 219 फीसदी का साधारण रिटर्न मिलेगा।
उसी सीरीज के ऑफलाइन निवेशकों के लिए इश्यू प्राइस 4,677 रुपये प्रति ग्राम था, जबकि ऑनलाइन खरीद पर 50 रुपये की छूट दी गई थी।
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SGB 2020-21 सीरीज-III को मूल रूप से 16 जून, 2020 को 4,627 रुपये प्रति ग्राम के भाव पर जारी किया गया था। इस SGB सीरीज को समय से पहले भुनाने की कीमत 14,774 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। इस तरह से, ऑनलाइन खरीदे गए बॉन्ड को समय से पहले भुनाने पर लगभग 219 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिला है।
कुछ समझ नहीं आया, कोई बात नहीं। चलिए इसे कैलकुलेशन की मदद से समझते हैं।
एब्सोल्यूट रिटर्न का कैलकुलेशन:
एब्सोल्यूट रिटर्न = समय से पहले इस SGB सीरीज को भुनाने की कीमत – इस SGB सीरीज की शुरुआती कीमत
₹14,774 − ₹4,627 = ₹10,147 (ब्याज को शामिल किए बिना)।
प्रतिशत के रूप में यह होगा = (कुल लाभ ÷ शुरुआती निवेश) × 100
= (₹10,147 ÷ ₹4,627) × 100
= 219.30%
लगभग 219% रिटर्न का मतलब है कि यदि किसी निवेशक ने 2020 में इस SGB सीरीज में 1 लाख रुपये निवेश किया होता, तो उसका निवेश करीब तीन गुना से ज्यादा बढ़कर ₹3.19 लाख से ज्यादा हो गया होता।
सोने की कीमतों में बढ़ोतरी से होने वाले पूंजीगत लाभ के अलावा, SGB होल्डर्स को शुरुआती निवेश राशि पर 2.5 फीसदी सालाना का निश्चित ब्याज भी मिलता है, जिसका भुगतान हर छह महीने में किया जाता है। इसका मतलब है कि होल्डिंग अवधि के दौरान मिलने वाले कुल ब्याज को शामिल करने पर निवेशकों का कुल रिटर्न और ज्यादा हो जाता है। बता दें कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की परिपक्वता अवधि (maturity period) आठ वर्ष होती है। हालांकि, निवेशकों को पांचवें वर्ष से निर्धारित तारीखों पर समय से पहले बाहर निकलने की अनुमति होती है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) सरकारी प्रतिभूतियां (government securities) होती हैं, जो सोने के ग्राम में निर्धारित होती हैं। ये फिजिकल सोना रखने का एक विकल्प हैं। निवेशकों को बॉन्ड खरीदते समय नकद भुगतान करना होता है और परिपक्वता (maturity) पर राशि नकद में ही वापस मिलती है। इन गोल्ड बॉन्ड सीरीज को भारत सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जारी करता है।
RBI ने नए SGB (सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड) जारी करना बंद कर दिया है, लेकिन मौजूदा निवेशकों को उनके मूल नियमों के अनुसार ब्याज और रिडेम्प्शन (परिपक्वता पर भुगतान) का लाभ मिलता रहेगा।