Bank Nifty: बड़े बैंकों के शेयरों में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे बैंक निफ्टी करीब 4 फीसदी नीचे आ गया। वहीं, व्यापक बाजार भी 2.14 फीसदी नीचे रहा। यह गिरावट भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक अप्रत्याशित कदम के बाद देखने को मिली, जिसमें देसी विनिमय बाजार में बैंकों की ‘शुद्ध ओपन पोजीशन’ (एनओपी) की सीमा 10 करोड़ डॉलर तय कर दी गई है।
इस कदम से चौथी तिमाही में बैंकों को ‘मार्क-टु-मार्केट’ (एमटीएम) में 3,000 से 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है क्योंकि अनुमान है कि बैंकों की बकाया पोजीशन काफी बड़ी यानी करीब लगभग 30 से 40 अरब डॉलर है।
शुक्रवार को जारी यह निर्देश (जिसका अनुपालन 10 अप्रैल तक किया जाना है) ऐसे समय में आया है जब डॉलर पर लंबी अवधि का दांव काफी बढ़ गया था। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम शायद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले घरेलू मुद्रा में आई भारी गिरावट और ऑफशोर (एनडीएफ) तथा देसी बाजारों के बीच बढ़ते अंतर के कारण उठाया गया हो।
जब बाजार में उतार-चढ़ाव कम होता है तो ऑफशोर और ऑनशोर बाजारों में डॉलर-रुपये अनुबंध के लिए 3 महीने आगे का स्प्रेड काफी कम यानी 5-15 आधार अंक के दायरे में होता है। हालांकि जब भी उतार-चढ़ाव बढ़ता है तो स्प्रेड भी बढ़ जाता है। 2025 में यह 30-50 आधार अंक तक पहुंच गया था और अब (पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और तेल-गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण) यह 75-90 आधार अंक तक पहुंच चुका है।
जेफरीज ने सोमवार को एक नोट में कहा, हम समझते हैं कि फ़ॉरेक्स डेरिवेटिव बाजार पर बड़े बैंकों एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, ऐक्सिस बैंक और भारत में काम कर रहे प्रमुख विदेशी बैंकों का दबदबा है, जिनकी कुल ऑनशोर पोजीशन 30-40 अरब की हैं।
बैंक निफ्टी में यूनियन बैंक और केनरा बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जिनके शेयर क्रमशः 6.43 फीसदी और 5.37 फीसदी गिर गए। इंडसइंड बैंक में 5.06 फीसदी की गिरावट आई जबकि आईडीएफसी फ़र्स्ट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा में 4.88 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। येस बैंक 4.80 फीसदी नीचे रहा।
बड़े बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक में 3.93 फीसदी की गिरावट आई; आईसीआईसीआई बैंक 2.26 फीसदी गिरा, एचडीएफसी बैंक 3.26 फीसदी नीचे रहा, कोटक महिंद्रा बैंक में 3.48 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, ऐक्सिस बैंक 3.64 फीसदी गिरा।