भारत में बैलिस्टिक मिसाइलों और दुश्मन के लड़ाकू विमानों को मार गिराने के लिए डिजाइन किए गए लंबी दूरी के एयर-टू-एयर हथियारों के उत्पादन में तेजी आ सकती है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा इनके उत्पादन में घरेलू निजी कंपनियों साझेदार बनाए जाने की संभावना है। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर रक्षा मंत्रालय के एक सूत्र ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।
पश्चिम एशियाऔर यूक्रेन में चल रहे युद्ध से मिली सीख और पाकिस्तान द्वारा मिसाइल फोर्स के गठन को देखते हुए इस दिशा में काम किया जा रहा है।
सूत्र ने कहा, ‘डीआरडीओ को निजी क्षेत्र को मिसाइल प्रौद्योगिकी का लाइसेंस देने का निर्देश दिया गया है।’ उन्होंने बताया कि जहां तक उन्हें जानकारी है, संगठन पहले ही छोटी दूरी की वायु-रक्षा मिसाइलों और एंटी-शिप मिसाइलों जैसे हथियारों के लिए निजी साझेदारों को सूचीबद्ध कर चुका है।
सूत्र ने आगे कहा, ‘डीआरडीओ द्वारा आने वाले दिनों में अन्य गैर रणनीतिक मिसाइलों के लिए भी ऐसा ही किए जाने की संभावना है।’ उन्होंने एस्ट्रा बियॉन्ड विजुअल रेंज, एयर टू एयर मिसाइल और विकास के अधीन विभिन्न प्रकार की सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को इसके लिए सबसे मुफीद चिह्नित किया गया है।
इस सिलसिले में जानकारी के लिए डीआरडीओ को भेजे गए मेल का जवाब खबर प्रकाशित होने को भेजे जाने तक नहीं मिल सका।
एस्ट्रा और ये बैलिस्टिक मिसाइलें दोनों डीआरडीओ, रक्षा मंत्रालय की अनुसंधान और विकास विंग द्वारा विकसित स्वदेशी हथियार हैं।
एस्ट्रा को पायलट की नजर से बचते हुए 100 किलोमीटर से अधिक सीमा तक के हवाई लक्ष्य को भेदने की क्षमता के हिसाब से डिजाइन किया गया है, जो एक गाइडेड मिसाइल है। विचाराधीन बैलिस्टिक मिसाइलों में सतह से सतह पर मार करने वाले हथियार शामिल हैं जो विभिन्न प्रकार के पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम हैं।
अप्रैल में राष्ट्रीय राजधानी में एक सुरक्षा शिखर सम्मेलन में बोलते हुए रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि पारंपरिक मिसाइल बल स्थापित करने पर विचार हो रहा है। उन्होंने कहा था कि ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच संघर्ष, पाकिस्तान द्वारा पिछले अगस्त में आर्मी रॉकेट फोर्स बनाने की घोषणा को देखते हुए इस पर काम चल रहा है।
उसके बाद मई में एक इंडस्ट्री समिट में सिंह ने तर्क दिया कि विभिन्न प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइलों की तकनीक को निजी क्षेत्र को हस्तांतरित करने पर विचार करने का समय आ गया है। उन्होंने ऐसे हथियारों के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला, जो कभी न्यूक्लियर डिलिवरी तक सीमित थे। उन्होंने कहा, ‘आप सरकार द्वारा उस क्षेत्र में भी पर्याप्त निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदम देखेंगे।’
इस समय रक्षा से जुड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (डीपीएसयू) भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) इन मिसाइलों का उत्पादन करता है।