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लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: लोक सभा में 131वां संशोधन विधेयक ढेर, 12 साल में NDA की पहली बड़ी हार

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की लोक सभा में पराजय, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की 12 वर्षों में पहली ऐसी हार है। इस हार ने सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच विश्वास में कमी की गहराई को रेखांकित किया। लोक सभा और राज्य विधान सभाओं में एक-तिहाई सीटों के लिए महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने तथा […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: नोएडा हिंसा के पीछे श्रम तनाव, वेतन असमानता और रोजगार संकट की गहरी परतें

हाल के दिनों में नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में फैली हिंसा को केवल कानून-व्यवस्था बिगड़ने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि यह भारत के श्रम बाजार में बढ़ते तनाव को दर्शाती है। उच्च पारिश्रमिक की मांग से शुरू हुआ यह मामला तेजी से बढ़ा, लेकिन असंतोष समय के साथ बढ़ता रहा है। इसके […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: बढ़ते सार्वजनिक कर्ज के बीच भारत के लिए आर्थिक चेतावनी

पश्चिम एशिया के संकट के हल का दुनिया बहुत उत्सुकता से इंतजार कर रही है। खबरें बताती हैं कि दोनों पक्ष बातचीत के लिए उत्सुक हैं। इसका असर वित्तीय बाजारों पर भी नजर आया है। अगर संकट जल्दी हल होता है तो विश्व अर्थव्यवस्था को बहुप्रतीक्षित स्थिरता मिलेगी और विभिन्न देश अपनी ढांचागत चुनौतियों से […]

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Editorial: समय और संसाधन जरूरी, SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विवाद तेज

सर्वोच्च न्यायालय के 13 अप्रैल के निर्णय ने एक बार फिर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के संचालन पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। अपने फैसले में न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के उन मतदाताओं को अंतरिम मतदान का अधिकार देने से इनकार कर दिया है जिनके नाम एसआईआर की प्रक्रिया में हटा दिए गए […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: IMF की चेतावनी, भू-राजनीतिक तनाव से वैश्विक विकास धीमा

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के नवीनतम वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में यह स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है कि भू-राजनीतिक तनावों की वजह से उत्पन्न वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता में इजाफा हो रहा है। आईएमएफ के पूर्वानुमानों पर पूरी दुनिया की नजर रहती है और इसमें विभिन्न परिदृश्य प्रस्तुत किए गए हैं। संदर्भित पूर्वानुमान के अनुसार, […]

आज का अखबार, संपादकीय

Editorial: UPI फ्रॉड पर RBI का एक्शन डिजिटल सुरक्षा के लिए जरूरी

अपनी शुरुआत के एक दशक बाद यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था का अनिवार्य अंग बन चुका है। यह तेज गति से मुद्रा हस्तांतरण से लेकर परस्पर संचालन के जरिये विभिन्न प्लेटफॉर्म और संस्थानों के बीच अबाध गति से लेनदेन सुनिश्चित करता है। 45 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं के साथ यह […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, संपादकीय

Editorial: अमेरिका-ईरान वार्ता के विफल होने से बढ़ी दुनिया की टेंशन

ईरान में सन 1979 की क्रांति के बाद उसके और अमेरिका के बीच हो रही पहली सीधी वार्ता की विफलता ने इस बात को रेखांकित किया है कि दोनों के रिश्तों में विश्वास की कितनी कमी है और उनमें कितना अधिक सांस्कृतिक भेद है। एक दिन से भी कम की बातचीत के बाद इस्लामाबाद से […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: बांग्लादेश-भारत संबंधों में सुधार की उम्मीद

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने इस सप्ताह नए प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर के साथ भारत का दौरा किया। उम्मीद है कि इस दौरे से ढाका में बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाली नई सरकार और भारत सरकार के बीच संबंधों में सुधार होगा। विदेश मंत्री के रूप में […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद भी तनाव बरकरार

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा का व्यापक रूप से स्वागत किया गया लेकिन इस घोषणा के दो दिन बाद भी तनाव बना हुआ है जो स्थायी शांति की संभावनाओं को क्षति पहुंचा सकता है। यहां तक कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इस सप्ताहांत बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचने के ऐन पहले […]

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

Editorial: पश्चिम एशिया संकट के बीच अनिश्चितता पर ‘वेट एंड वॉच’ रुख

रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने बुधवार को नीतिगत रीपो दर को अपरिवर्तित रखने का सही निर्णय लिया। नए वित्त वर्ष में यह समिति की पहली बैठक थी। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद पश्चिम एशिया संकट की गहनता भले ही कम हुई है लेकिन अनिश्चितता बरकरार है और ऐसे […]

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