महाराष्ट्र में चावल स्टॉक पर पहरेदारी
चावल के बढ़ते मूल्यों को नियंत्रित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने चावल की स्टॉक-सीमा तय कर दी है। केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद राज्य सरकार ने निगम और गैर-निगम क्षेत्रों के थोक विक्रेताओं के लिए क्रमश: 5,000 क्विंटल और 3,000 क्विंटल की सीमा तय कर दी है जबकि खुदरा विक्रेताओं […]
पाम ऑयल में तेजी का रुख
मलयेशिया में लगातार दूसरे हफ्ते पाम ऑयल की कीमतों में तेजी का रुख रहा। इसकी वजह दुनिया भर में खाद्य और जैव ईंधन के रूप में इसकी बढ़ती मांग को समझा जा रहा है। दरअसल इस समय कच्चे तेल की कीमतें पूरे उफान पर हैं, और जैवईंधन बनाने के लिए काम में आने वाले सोयाबीन […]
सुहाने मौसम में मची है आडू क़ी धूम
इस बारिश के मौसम में लोगों को अपना मुंह मीठा करने के लिए आड़ू खूब खाने को मिलेंगे। ज्यादा आवक और कम कीमत के चलते आजादपुर फल और सब्जी मंडी आडू से भरी नजर आ रही है। आजादपुर मंडी के फल विक्रेताओं का कहना है कि इस बार आडू क़ी आवक पिछले साल की तुलना […]
जीरा वायदा पर सर्किट का ‘छौंक’
निर्यात की भारी मांग और जीरे की कम आपूर्ति की वजह से घरेलू वायदा बाजार की शुरुआती कारोबार में जीरे का मूल्य दो प्रतिशत के ऊपरी सर्किट को छू गया। कार्वी कॉमट्रेड शोध प्रमुख हरीश जी ने कहा, ‘मांग और आपूर्ति की असमानता के कारण जीरे के भाव में तेजी देखी जा रही है। फिलहाल […]
डॉलर की मजबूती ने सोने को दिया झटका
डॉलर के मजबूत होने से लंदन के मेटल एक्सचेंज में इस हफ्ते सोने के मूल्य में मंदी का रुख देखा गया और इसमें 3.7 फीसदी की कमी दर्ज की गई। जानकारों के अनुसार, यूरो की तुलना में डॉलर के मजबूत होकर पिछले तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाने से वैकल्पिक निवेश के […]
फाउंड्री निर्यातकों का नई मूल्य प्रणाली अपनाने का फैसला
देश के फाउंड्री उत्पाद निर्यातकों ने बाजार द्वारा संचालित होने वाली नई कीमत प्रणाली को अपनाने का फैसला किया है। इस नई प्रणाली में विचाराधीन सौदों के आधार मूल्य पर प्रभावी होने वाले ऊर्जा और अयस्क अधिभार जैसे अस्थिर पैमानों को शामिल किया गया है। तेल की रेकॉर्ड कीमत और मुद्राओं में हो रहे उतार-चढ़ाव […]
तेल के आगे सब फेल
तेल की कीमतें पिछले एक साल में ही दोगुनी क्यों हो गई हैं? आखिर क्या वजह है इसकी? सट्टेबाजी का खेलकारोबारी वायदा के जरिये आने वाले वक्त में तेल की कीमतों पर सट्टा लगाते हैं। यदि कोई प्राकृतिक आपदा आती है और देश में सत्ता शीर्ष पर बैठे व्यक्ति या फिर दुनिया की किसी बड़ी […]
मालविंदर के फैसले पर हंगामा क्यों?
रैनबैक्सी लैब के प्रमोटर पहले ऐसे मालिकान नहीं हैं, जिन्होंने अपनी कंपनी बेची हो (इसे पहले पारले के रमेश चौहान और मैक्स के अनलजीत सिंह भी ऐसा काम कर चुके हैं)। न ही वह आखिरी ऐसे मालिकान हैं, जो ऐसा काम कर रहे हैं। लेकिन यह इकलौती कामयाब, सूचीबध्द और एक हिंदुस्तानी के नेतृत्व में […]
भारत और ब्रिटेन के बीच रिश्तों की बदलती तस्वीर
लंदन में मेरे 10 दिन के प्रवास के दौरान भारत और ब्रिटेन के बीच रिश्तों की जटिलता और उलझनें साफ हुईं। पिछले सप्ताह भारत, ब्रिटेन के समाचार पत्रों में छाया था। रस्तोगी बंधुओं का हवाला केस, उसकी सुनवाई और उन्हें 9 वर्ष का कारावास इसका प्रमुख कारण था। ब्रिटेन में अब इस तरह के प्रकरणों […]
इक धुंध से आना है इक धुंध में जाना है
अमिताभ बच्चन ने अपनी एक फिल्म ‘शहंशाह’ में कहा था, कनफ्यूजन तो है ‘अटर’। इस वाक्य के गूढ़ रहस्य को अगर आप समझने की कोशिश करें तो यकीनन यह लगने लगेगा कि भारत को अपना सूत्र वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ से बदलकर यही रख लेना चाहिए। पिछले एक दशक के दौरान इसे सरकारी नीतियों का नायाब […]
