Adani Green Energy Ltd ने वित्त वर्ष 2026-27 में बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा निवेश करने की योजना बनाई है। कंपनी करीब 15,000 करोड़ रुपये खर्च कर 10 गीगावाट-घंटे से ज्यादा बैटरी स्टोरेज जोड़ना चाहती है।
कंपनी पहले ही करीब 3 गीगावाट-घंटे स्टोरेज क्षमता हासिल करने की तैयारी में है, जिसमें FY26 के दौरान 1.4 गीगावाट-घंटे की नई क्षमता जोड़ी जा रही है। इसके बाद अब बड़े स्तर पर बैटरी प्रोजेक्ट्स पर फोकस किया जा रहा है।
यह नई स्टोरेज क्षमता गुजरात के खावड़ा में बन रहे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी पार्क के साथ विकसित की जा रही है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल प्रोजेक्ट बताया जा रहा है।
इन बैटरियों का मकसद शाम के समय बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करना है, जब सोलर पावर का उत्पादन कम हो जाता है। इससे लगातार और भरोसेमंद साफ ऊर्जा सप्लाई देने में मदद मिलेगी।
कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में बैटरी क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है और 10 गीगावाट-घंटे से ज्यादा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 में 1.4 गीगावाट घंटे क्षमता जोड़ी गई है और आने वाले कुछ दिनों में खावड़ा परियोजना में कुल स्थापित क्षमता 3 गीगावाट घंटे तक पहुंचने की उम्मीद है।
कंपनी के पास इस समय 19.3 गीगावाट की ऑपरेशनल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता है, जो देश में सबसे बड़ी मानी जाती है। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 तक इसे बढ़ाकर 50 गीगावाट करना है।
मौजूदा पोर्टफोलियो में करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी सोलर प्रोजेक्ट्स की है, जबकि 13 प्रतिशत विंड और 17 प्रतिशत हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स का योगदान है।
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 38 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन किया, जो पिछले वित्त वर्ष के 28 अरब यूनिट की तुलना में 34 प्रतिशत ज्यादा है।
बैटरी स्टोरेज के क्षेत्र में भी कंपनी तेजी से विस्तार कर रही है। योजना के तहत 10 गीगावाट घंटे से अधिक की क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें से 75 प्रतिशत हिस्से को 25 साल के तय टैरिफ वाले पावर परचेज एग्रीमेंट का समर्थन मिलेगा।
कंपनी का यह कदम भारत के पावर सेक्टर में हो रहे बड़े बदलाव को भी दिखाता है। अब केवल रिन्यूएबल क्षमता बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि बिजली की सप्लाई को स्थिर और भरोसेमंद बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
हालांकि सरकार की नीतियों और टेंडर गतिविधियों में तेजी आई है, लेकिन ज्यादातर प्रोजेक्ट अभी निर्माण, परीक्षण या ग्रिड से जुड़ने के अलग-अलग चरणों में हैं।
देश में सोलर और विंड ऊर्जा की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है और बिजली की मांग भी लगातार ऊपर जा रही है। ऐसे में बिजली की सप्लाई को संतुलित रखने और पीक समय में मांग को पूरा करने के लिए ऊर्जा भंडारण यानी बैटरी स्टोरेज की जरूरत अहम हो गई है।
इसी दिशा में अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड यानी AGEL अपनी रणनीति को आगे बढ़ा रही है। कंपनी अब सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उसे जरूरत के मुताबिक उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दे रही है। इसके लिए वह बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज को अपने प्रोजेक्ट्स के साथ जोड़ने की योजना बना रही है।
भारत के ऊर्जा क्षेत्र में अब फोकस केवल क्षमता बढ़ाने से हटकर भरोसेमंद और लगातार उपलब्ध बिजली पर आ गया है। सोलर और विंड से उत्पादन तो तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसे हर समय जरूरत के हिसाब से उपलब्ध कराना अगली बड़ी चुनौती है।
इस बदलते परिदृश्य में बैटरी स्टोरेज को एक अहम समाधान के रूप में देखा जा रहा है और AGEL इस क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने की तैयारी कर रही है। कंपनी अब स्टोरेज को सहायक सुविधा नहीं, बल्कि जरूरी ऊर्जा ढांचे के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।