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सिन्नर थर्मल पावर प्लांट खरीदने की दौड़ में अदाणी, जिन्दल पावर शामिल

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सिन्नर थर्मल पावर प्लांट फिलहाल रत्तनइंडिया पावर के स्वामित्व में है

Last Updated- October 16, 2024 | 3:59 PM IST
Sinnar Thermal Power Plant

भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट बिजली कंपनी अदाणी पावर लिमिटेड ने जिन्दल पावर लिमिटेड, वेदांता ग्रुप, ओडिशा मेटलिक्स और वीएफएसआई होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर 1,350 मेगावाट के सिन्नर थर्मल पावर प्लांट को खरीदने के लिए बोली लगाई है। यह प्लांट महाराष्ट्र के नासिक के पास स्थित है।

इसके साथ ही, दो सरकारी कंपनियां महाजेनको और एनटीपीसी ने भी इस प्लांट के लिए संयुक्त रूप से बोली लगाई है। यह जानकारी द इकोनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से दी है।

सिन्नर थर्मल पावर प्लांट फिलहाल रत्तनइंडिया पावर के स्वामित्व में है। इसे पहले इंडियाबुल्स पावर ने विकसित किया था। सितंबर 2022 में इस प्लांट को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा कॉरपोरेट दिवालियापन प्रक्रिया में शामिल किया गया था। जनवरी 2023 में शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी की याचिका के बाद इसे दिवालियापन की प्रक्रिया में डाला गया, जिसमें प्लांट निर्माण से जुड़ी बकाया राशि के भुगतान की मांग की गई थी।

इस महीने की शुरुआत में प्लांट के लिए छह समाधान योजनाएं प्रस्तुत की गई हैं, जिनकी जांच अभी चल रही है। इन बोलियों का मूल्य अभी तय नहीं हुआ है, क्योंकि समाधान पेशेवर और लेनदारों के बीच बातचीत जारी है। सभी बोलीदाताओं ने अपनी प्रारंभिक योजनाओं के साथ 10 करोड़ रुपये की जमा राशि भी दी है।

प्लांट के प्रमुख लेनदारों में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) पर 6,553 करोड़ रुपये और इसकी सहायक कंपनी रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन (REC) पर 5,262 करोड़ रुपये का बकाया है। कुल बकाया राशि 15,909 करोड़ रुपये है, जिसमें पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और जीवन बीमा निगम (LIC) भी शामिल हैं।

यह प्लांट सिन्नर विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में स्थित है, जो नासिक से लगभग 50 किलोमीटर और एक राष्ट्रीय राजमार्ग से 4 किलोमीटर की दूरी पर है।

सिन्नर थर्मल पावर प्लांट के आसपास 1,600 एकड़ जमीन होने से नए मालिक के पास प्लांट की क्षमता को 1,350 मेगावाट और बढ़ाने की संभावना है। हालांकि, जमीन विवाद, कोयले की सप्लाई की समस्या और बिजली खरीद समझौते (PPA) की कमी के कारण प्लांट का मूल्यांकन जटिल हो सकता है। द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, एक सूत्र ने बताया कि प्लांट के पास रेलवे लाइन की सुविधा नहीं है और जमीन से जुड़े विवाद भी हैं। 150 से 200 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बनाने में सैकड़ों करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसे खरीदार को ध्यान में रखना होगा।

फिलहाल, प्लांट की केवल 270 मेगावाट की एक यूनिट चल रही है, जबकि बाकी यूनिट्स कभी-कभी काम करती हैं। MAHAGENCO और NTPC की संयुक्त बोली मजबूत मानी जा रही है, क्योंकि वे मौजूदा सुविधाओं का फायदा उठा सकते हैं। खासकर, MAHAGENCO का नागपुर के पास 2,190 मेगावाट का कोराडी पावर प्लांट सिन्नर प्लांट के लिए कोयले की सप्लाई कर सकता है। MAHAGENCO, जिसकी 13,000 मेगावाट से ज्यादा की क्षमता है, भारत की सबसे बड़ी राज्य सरकार की बिजली उत्पादक कंपनी है।

दिसंबर 2022 में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने प्लांट के कोयला अनुबंध को रद्द कर दिया था, तब से कोयले की सप्लाई यह एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इसके पीछे कारण PPA की कमी और प्लांट का आंशिक रूप से चालू होना था। महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी (MSEDC) के साथ प्लांट का पुराना PPA भी कई साल पहले समाप्त हो चुका है, जिससे बोली प्रक्रिया और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।

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First Published - October 16, 2024 | 3:59 PM IST

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