अपने चाचा नादिर गोदरेज के सेवानिवृत्त होने के बाद पिरोजशा गोदरेज अगस्त में गोदरेज इंडस्ट्रीज समूह के चेयरमैन का पद संभालेंगे। विशाल छाबड़िया और शार्लीन डिसूजा के साथ विशेष साक्षात्कार में पिरोजशा ने समूह को लेकर अपने दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से बात की। मुख्य अंश:
आपका पहला कदम क्या होगा और आप समूह की पहचान बनाए रखते हुए इसे नए जमाने के क्षेत्रों में कैसे ले जाने की योजना बना रहे हैं?
सबसे पहले मौजूदा व्यवसायों को उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचाने पर मेरा ध्यान होगा। मैं तब तक नए क्षेत्रों में नहीं जाना चाहूंगा जब तक कि हमें विश्वास न हो जाए कि वर्तमान व्यवसाय अपनी क्षमता के करीब पहुंच रहे हैं। हमने हाल के वर्षों में बहुत प्रगति देखी है। उदाहरण के लिए गोदरेज प्रॉपर्टीज पिछले तीन वर्षों में आवासीय बिक्री के मामले में लगातार देश का नंबर एक डेवलपर रहा है और इसने विभिन्न शहरों में काफी विस्तार किया है। यह अब शीर्ष पांच बाजार में से प्रत्येक में पहला या दूसरा सबसे बड़ा डेवलपर है।
मेरा मानना है कि समूह की सभी कंपनियों में इसी तरह की विकासपरक सोच और महत्त्वाकांक्षा होनी चाहिए। हमने हाल ही में वित्तीय सेवा जैसे नए क्षेत्रों में प्रवेश किया है, जहां हम डिजिटल और एआई प्रथम व्यवसाय बनाने के लिए विशेष रूप से तकनीक पर बहुत काम कर रहे हैं। हम सबसे तेजी से 25,000 करोड़ रुपये प्रबंधनाधीन संपत्ति (एयूएम) तक पहुंचने वाली वित्तीय सेवा कंपनी हैं, जिसने व्यवसाय शुरू करने के लगभग साढ़े चार साल के भीतर यह उपलब्धि हासिल का ली। हमारा लक्ष्य अगले पांच वर्षों में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये एयूएम हासिल करना है। हमारे पास काफी दमदार पोर्टफोलियो है।
क्या आपने समूह के लिए कोई पंचवर्षीय योजना बनाई है और क्या निकट भविष्य में किसी इकाई को सूचीबद्ध कराने की योजना है?
हमारी महत्त्वाकांक्षा 5 लाख करोड़ रुपये बाजार पूंजीकरण वाला समूह बनने की है। आज समूह की 3 सूचीबद्ध कंपनियां और 3 गैर-सूचीबद्ध इकाई है। सूचीबद्ध व्यवसाय गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, गोदरेज प्रॉपर्टीज और गोदरेज एग्रोवेट हैं और गैर-सूचीबद्ध व्यवसाय में गोदरेज कैपिटल, गोदरेज केमिकल्स और गोदरेज वेंचर्स शामिल हैं। समूह में अन्य कंपनियां भी हैं लेकिन वे इन 6 मुख्य कंपनियों की सहायक कंपनियां हैं। 31 मार्च तक सूचीबद्ध व्यवसायों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये था। गैर-सूचीबद्ध व्यवसायों का भी कुछ मूल्य होगा। कुल मिलाकर हमारा लक्ष्य 2031 तक मूल्यांकन 2.5 गुना से 3 गुना तक बढ़ाने का है।
अभी कुछ भी स्पष्ट रूप से घोषित करने योग्य नहीं है। मध्यम अवधि में हम सभी बड़े व्यवसायों को सूचीबद्ध करना चाहेंगे। हमारा इरादा एस्टेक जैसी छोटी इकाई को सूचीबद्ध कराने का नहीं है। 5 साल के दौरान सूचीबद्ध फर्मों की संख्या 5 तक हो सकती है। मुझे उम्मीद है कि उनमें से एक वित्तीय सेवाएं वाली होगी।
पिछले 5 वर्षों में समूह की कंपनियों की सालाना वृद्धि और शेयर बाजार से मिलने वाले रिटर्न के मामले में अच्छा प्रदर्शन रहा था। मगर पिछले 5 साल में वृद्धि थोड़ी धीमी रही है और समूह के अधिकांश शेयर बेंचमार्क से पिछड़ रहे हैं। आप इसमें कैसे बदलाव लाएंगे?
परिचालन वृद्धि धीमी नहीं हुई है। वास्तव में, पिछले 5 वर्षों में इससे पिछले पांच वर्षों की तुलना में काफी तेजी आई है। यदि आप इन छह व्यवसायों के कुल प्रदर्शन को देखें तो बिक्री सालाना 20 फीसदी की चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ी है और शुद्ध लाभ में भी 20 फीसदी सीएजीआर की वृद्धि हुई है। इस विकास का एक बड़ा हिस्सा गोदरेज प्रॉपर्टीज और गोदरेज कैपिटल से आया है। हमने पिछले कुछ वर्षों में, विशेष रूप से पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्थिति के कारण शेयर बाजार में व्यवधान देखा है। शेयर मूल्य का प्रदर्शन खराब रहा है। इसके लिए कोई उचित परिचालन कारण नहीं है।
वास्तव में, हमने गोदरेज प्रॉपर्टीज में कंपनी का 5 फीसदी हिस्सा वापस खरीदा है जो हमारे विश्वास को दर्शाता है। गोदरेज प्रॉपर्टीज ने 2010 में अपने आईपीओ के बाद से ऐसे पांच अलग-अलग उदाहरण देखे हैं जहां शेयर की कीमत 45 फीसदी या उससे अधिक गिरी है। उन निचले स्तरों के बाद औसत एक साल का रिटर्न 100 फीसदी से अधिक रहा है और तीन साल का औसत रिटर्न 200 फीसदी से अधिक रहा है। इसलिए हमें पूरा विश्वास है कि शेयर मूल्य अंततः मजबूत होगा। कारोबार की बात करें तो बिक्री, लाभ या नकदी प्रवाह सभी में पिछले कुछ वर्षों में 30 से 40 फीसदी सीएजीआर की दर से वृद्धि हो रही है।
जब कारोबार का विभाजन हुआ तो यह परिवार के सदस्यों के बीच बिना किसी कड़वाहट के हुआ। कई परिवार इस तरह के बदलाव से गुजरते हैं। ऐसे परिवारों के लिए सुचारु बदलाव सुनिश्चित करने के लिए आपकी क्या सलाह है?
हम बहुत आभारी और गौरवान्वित हैं कि हम इसे सही भावना से और गोदरेज के मूल्यों के अनुरूप कर सके जो हम सभी को बहुत कम उम्र से ही सिखाया गया है। लेकिन मुझे लगता है कि यह एक भावनात्मक अनुभव है, जाहिर तौर पर व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों मामलों में। परिवारों को व्यवसाय के हित को सामने रखना चाहिए और यथासंभव निष्पक्ष रहने का प्रयास करना चाहिए। यदि आप 50-50 की स्थिति में हैं और अपने लिए 70 फीसदी रखने की कोशिश करते हैं तो शायद आपको न तो वह 70 फीसदी नहीं मिलेगा और न ही परिवार खुशहाल रहेगा।
हम सभी ने ईमानदारी से महसूस किया कि यह व्यवसाय और परिवार दोनों के लिए सबसे अच्छा था। अब तक यह सही साबित हुआ है। जब हम पारिवारिक स्तर पर इसे देखते हैं तो रिश्ते बहुत अच्छे हैं। मैं अपने चचेरे भाइयों के साथ छुट्टियों पर भी जाता हूं। मेरा मानना है कि इसकी सफलता की वजह निष्पक्षता की भावना के साथ उचित दृष्टिकोण अपनाना है।
हम वर्तमान में पश्चिम एशिया संकट से निपट रहे हैं और उत्पादन लागत के मामले में कई बाधाएं हैं, जिसका भारत में व्यवसायों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव भी पड़ रहा है। आपको क्या लगता है कि आप इस संकट से समूह को कैसे निकाल पाएंगे?
यह स्पष्ट रूप से एक बहुत गंभीर स्थिति है। हमारा अभी भी मानना है कि ये शांति वार्ता अगले कुछ हफ्तों में सफल होगी और संकट धीरे-धीरे कम होगा तथा स्थिति सामान्य हो जाएगी। यदि उम्मीद के मुताबिक स्थितियां बनती हैं तो हमें कारोबार पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं दिखेगा। उदाहरण के लिए हमने अभी तक व्यवसायों की वार्षिक परिचालन योजनाओं में कोई बदलाव नहीं किया है। यदि यह संकट छह महीने, 12 महीने या उससे अधिक समय तक बना रहता है तो तेल की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं।
ऐसे पूर्वानुमान हैं कि तेल 150 डॉलर या 200 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच जाएगा लेकिन हमें लगता है कि ऐसा नहीं होगा। यदि आप रूस-यूक्रेन जैसे पिछले झटकों को देखें तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं लेकिन अंततः काफी कम हो गईं। यहां तक कि एक विस्तारित परिदृश्य में भी, हमें विश्वास है कि ऐसे चरम पूर्वानुमानों की संभावना नहीं है, क्योंकि उच्च कीमतों से ऐसे स्रोतों से अतिरिक्त आपूर्ति आएगी जो 50-60 डॉलर प्रति बैरल पर व्यवहार्य नहीं थे लेकिन 80-90 डॉलर प्रति बैरल पर व्यवहार्य हो जाते हैं। यदि स्थिति बिगड़ती है तो स्पष्ट रूप से सभी व्यवसायों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
वर्तमान में, कुछ व्यवसायों को अस्थायी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। निर्माण और एफएमसीजी जैसे क्षेत्रों में कच्चे माल की लागत बढ़ गई है। मोटे तौर पर कहें तो यदि स्थिति अगले कुछ हफ्तों में हल हो जाती है तो मामूली, अस्थायी प्रभाव होगा। यदि संकट जारी रहता है, बिगड़ता है या लंबा खिंचता है तो निश्चित रूप से हमें पुनर्मूल्यांकन करना होगा।