एअर इंडिया (Air India) में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयरलाइन के सीईओ Campbell Wilson ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि कंपनी लगातार घाटे, डिलीवरी में देरी और सुरक्षा से जुड़े मामलों में बढ़ती सख्ती के बीच जूझ रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, विल्सन फिलहाल नोटिस पीरियड में हैं और नए सीईओ की नियुक्ति तक कंपनी के साथ बने रहेंगे। हालांकि, Tata Group ने उनके उत्तराधिकारी को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
पिछले साल हुए एक विमान हादसे, जिसमें 260 लोगों की जान गई थी, के बाद एयर इंडिया पर नियामकों की निगरानी और सख्त हो गई है। जांच के दौरान सुरक्षा में कई खामियां सामने आई थीं। इनमें बिना एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट के विमान उड़ाना और इमरजेंसी उपकरणों की जांच में लापरवाही जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। इसी बीच, Air India एयरलाइन ने खुद भी माना था कि उसके संचालन में सुधार की जरूरत है, खासकर प्रोसेस, कम्युनिकेशन और नियमों के पालन को लेकर।
गौरतलब है कि Campbell Wilson को साल 2022 में एयर इंडिया की कमान सौंपी गई थी, जब टाटा ग्रुप ने सरकार से एयरलाइन का अधिग्रहण किया था। उनका मकसद एयरलाइन को घाटे से निकालकर एक मजबूत ब्रांड बनाना था, लेकिन मौजूदा हालात में यह चुनौती बनी हुई है।
यह पढ़ें: इंडिगो की उड़ान अब ‘विली’ के हाथ: IATA चीफ विलियम वॉल्श बने नए CEO, अगस्त में संभालेंगे कमान
टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद से Air India लगातार घाटे में चल रही है। साल 2022 में कंपनी को खरीदने के बाद से इसकी वित्तीय स्थिति में सुधार की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हालात आसान नहीं हुए हैं। पिछले साल पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद किए जाने के बाद एयरलाइन पर दबाव और बढ़ गया है।
अब अगर ईरान से जुड़ा संघर्ष लंबा खिंचता है, तो एयर इंडिया की पश्चिमी देशों के लिए अहम उड़ानों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। ये वही रूट हैं जहां से कंपनी को अच्छा राजस्व मिलता है, लेकिन पाकिस्तान के एयरस्पेस प्रतिबंध के चलते इनमें पहले ही कटौती करनी पड़ी है।एयर इंडिया की कमान फिलहाल एन चंद्रशेखरन के हाथों में है, जो टाटा समूह के चेयरमैन भी हैं। वहीं, Singapore Airlines की कंपनी में 25 फीसदी हिस्सेदारी है।
कैम्पबेल विल्सन एअर इंडिया के सीईओ और एमडी थे, जिन्हें जुलाई 2022 में नियुक्त किया गया था। वे टाटा समूह द्वारा एअर इंडिया के अधिग्रहण के बाद पहले सीईओ बने। विल्सन इससे पहले सिंगापुर एयरलाइंस की सहायक कंपनी Scoot के सीईओ रह चुके हैं। उनके पास एविएशन इंडस्ट्री में 25 साल से ज्यादा का अनुभव है।
कैम्पबेल ने एअर इंडिया के ट्रांसफॉर्मेशन प्लान ‘Vihaan.AI’ को लागू करने में अहम भूमिका निभाई। कैम्पबेल के नेतृत्व में एअर इंडिया ने नई एयरक्राफ्ट डील (बड़े पैमाने पर विमान खरीद) की घोषणा की। कैम्पबेल ने सेवा सुधार, ऑन-टाइम परफॉर्मेंस और ब्रांड इमेज बेहतर करने पर जोर दिया।
एअर इंडिया के डिजिटल और ऑपरेशनल सुधारों को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका रही।
टाटा समूह की विमानन कंपनी पर मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। समूह के भीतर शुरू किए गए नए कारोबारों का घाटा अनुमान से कहीं ज्यादा बढ़ने की आशंका है।एक रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस के इन नए बिजनेस का कुल नुकसान वित्त वर्ष 2026 में करीब 29,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। पहले यह अनुमान सिर्फ 5,700 करोड़ रुपये के आसपास लगाया गया था।
इन घाटे वाले कारोबारों में एयर इंडिया सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी है। कंपनी का नुकसान अकेले ही 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पहले के 2,000 करोड़ रुपये के अनुमान से करीब दस गुना ज्यादा है।खास बात यह है कि इस अनुमानित नुकसान में से करीब 15,000 करोड़ रुपये का घाटा वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में ही दर्ज किया जा चुका है।
तुलना करें तो वित्त वर्ष 2025 में एयर इंडिया का कुल घाटा 11,000 करोड़ रुपये रहा था। इन आंकड़ों से साफ है कि टाटा समूह के एविएशन बिजनेस में चुनौतियां कम होने के बजाय और गहराती जा रही हैं।
अहमदाबाद विमान हादसे को दस महीने बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों का दर्द अब भी कम नहीं हुआ है। इस हादसे में जान गंवाने वाले करीब 30 परिवारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर अहम जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
शनिवार को अहमदाबाद में एक साथ जुटे इन परिवारों ने कहा कि विमान के कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर यानी ब्लैक बॉक्स का डेटा जारी होना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि इससे इस भीषण हादसे के पीछे की सच्चाई सामने आ सकेगी।
परिजनों ने खास तौर पर ब्लैक बॉक्स और सीवीआर डेटा सार्वजनिक करने की अपील की है, ताकि हादसे की असली वजह का पता चल सके।गौरतलब है कि 12 जून को एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171, जो अहमदाबाद से लंदन जा रही थी, उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। यह बोइंग 787-8 विमान सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से टेकऑफ करने के बाद मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में जा गिरा था।
हादसा इतना भीषण था कि विमान में सवार 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि जमीन पर मौजूद 19 लोगों ने भी अपनी जान गंवाई थी। अब पीड़ित परिवारों का कहना है कि सच सामने आना जरूरी है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और हादसे की असल वजह स्पष्ट हो सके।