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अंबानी की रिलायंस क्विक कॉमर्स में देश में पकड़ बनाने की कोशिश में

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पहले जहां डिलीवरी में एक या दो दिन लगते थे, अब रिलायंस का लक्ष्य 10 से 30 मिनट में सामान पहुंचाने का है।

Last Updated- October 30, 2024 | 11:41 AM IST
Reliance

एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति Mukesh Ambani अब अपने रिटेल कारोबार में बदलाव के लिए भारत के लोकप्रिय किराना स्टार्टअप्स की रणनीति अपना रहे हैं। पहले जहां डिलीवरी में एक या दो दिन लगते थे, अब Reliance का लक्ष्य 10 से 30 मिनट में सामान पहुंचाने का है।

भारत में “क्विक कॉमर्स” ने खरीदारी का तरीका बदल दिया है। जोमैटो, स्विगी और ज़ेप्टो जैसी कंपनियां 10 मिनट के भीतर पड़ोस के गोदामों से डिलीवरी कर रही हैं, यहां तक कि ये अमेज़न को भी पीछे छोड़ रही हैं। हालांकि ये कंपनियां घाटे में चल रही हैं, लेकिन इन्होंने छोटे दुकानों और सुपरमार्केट्स की बिक्री को प्रभावित किया है क्योंकि अब लोग दूध, चॉकलेट से लेकर iPhone तक की इंस्टेंट डिलीवरी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

क्विक कॉमर्स का क्षेत्र इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि अंबानी की रिलायंस इसे नज़रअंदाज नहीं कर सकती। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस को इस बिजनेस में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे कि छोटे गोदामों की कमी और सुपरमार्केट्स से इस बिजनेस को चलाने की दिक्कतें।

Datum Intelligence का अनुमान है कि क्विक कॉमर्स की बिक्री इस साल 6 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, जबकि 2020 में यह केवल 100 मिलियन डॉलर थी। रिलायंस अपनी 1,150 शहरों में फैली 3,000 सुपरमार्केट्स की चेन का इस्तेमाल करके इंस्टेंट डिलीवरी की योजना बना रही है। इसके लिए सुपरमार्केट्स में विशेष कियोस्क बनाए जाएंगे, जहां से छोटे दल काम करेंगे।

रिलायंस रिटेल के IPO से पहले अंबानी क्विक कॉमर्स से अपने बिजनेस को और मजबूत बनाना चाहते हैं। पिछले साल रिलायंस रिटेल का मूल्यांकन $100 बिलियन किया गया था और इसमें KKR जैसे निवेशक भी शामिल हैं।

रिलायंस भारत के $600 बिलियन के किराना बाजार में सबसे बड़ा फिजिकल रिटेलर है, हालांकि ई-कॉमर्स में वह अभी भी अमेज़न से पीछे है। रिलायंस ने क्विक कॉमर्स को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन इसके प्रतिद्वंद्वी डीमार्ट ने कहा है कि ऑनलाइन किराना सेवाओं का असर उसके बड़े शहरों के स्टोर्स पर साफ दिख रहा है।

रिलायंस की “हाइपरलोकल” सेवा नवी मुंबई और बेंगलुरु के कुछ स्टोर्स में शुरू हो चुकी है और जल्द ही दिल्ली और चेन्नई में भी शुरू करने की योजना है। इसके अलावा, कंपनी अपने डिलीवरी ड्राइवरों को साप्ताहिक बोनस देकर कारोबार को और बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है।

रिलायंस ने तेजी से डिलीवरी के लिए Dunzo, जिसमें उसकी 26% हिस्सेदारी है, का उपयोग करने की योजना भी बनाई है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अंबानी मुफ्त डिलीवरी का भी प्रस्ताव दे रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, मुंबई में जियोमार्ट ऐप के जरिए ग्राहक ₹40 की कोका-कोला की कैन बिना किसी डिलीवरी शुल्क के मंगवा सकते हैं, जबकि प्रतिस्पर्धी कंपनियां ऐसे ऑर्डर पर ₹65 तक का “छोटे ऑर्डर शुल्क” और “उच्च मांग शुल्क” लगाती हैं।

रिलायंस के बेलापुर स्टोर में राइडर्स की हर मिनट ट्रैकिंग की जाती है और काम की दक्षता के आधार पर “टॉप पिकर” और “टॉप राइडर” का नाम बोर्ड पर लिखा जाता है, जबकि धीमे काम करने वालों को “बॉटम पिकर” और “बॉटम राइडर” के रूप में चिन्हित किया जाता है। जियोमार्ट की डिलीवरी कार्यकारी सुप्रिया नाइक ने कहा, “ग्राहक का ऑर्डर 30 मिनट के भीतर डिलीवर करना होता है, इसके लिए मुझे काफी दौड़भाग करनी पड़ती है।”

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First Published - October 30, 2024 | 11:41 AM IST

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