इस महीने की 23 तारीख को लगभग डेढ़ दशक बाद भारत नए एकीकृत इस्पात संयंत्र के शिलान्यास का गवाह बनेगा। आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएमएनएस इंडिया) का यह संयंत्र आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली जिले के राजय्यापेटा में लगेगा।
आंध्र प्रदेश ने 15 महीनों के भीतर सभी जरूरी मंजूरियों के साथ परियोजना को पटरी पर लाने में कामयाबी हासिल की है। उद्योग के एक सूत्र के अनुसार किसी भी नई इस्पात संयंत्र परियोजना के लिए पिछली बार शिलान्यास समारोह वर्ष 2010 में ओडिशा के कलिंगनगर में टाटा स्टील संयंत्र के लिए हुआ था।
राजय्यापेटा संयंत्र को कथित तौर पर कई चरणों में विकसित किया जाएगा। इसकी क्षमता को 2.4 करोड़ टन प्रति वर्ष तक बढ़ाने की योजना है। इस पर लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। एएमएनएस इंडिया ने कहा कि परियोजना के पहले चरण में लगभग 70,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा और यह संयंत्र 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक चालू हो सकता है।
एएमएनएस इंडिया के निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी दिलीप उम्मेन ने कहा, ‘भारत में एक नई परियोजना काफी समय बाद आ रही है और ऐसी परियोजना में हमेशा अपनी चुनौतियां होती हैं। यहीं पर सरकार की भूमिका भी परखने को मिलती है। राष्ट्र को यह प्रति वर्ष 30 करोड़ टन के लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करेगी, राज्य को इससे बड़े निवेश हासिल करने में मदद मिलेगी जिससे उस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में काफी सकारात्मक बदलाव लाएगा।’ 16 महीनों में मंजूरी मिलना बेहद महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि अतीत में ऐसी कई परियोजनाएं पर्यावरण की चुनौतियों के कारण लंबे समय तक अटक गई थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के इस कार्यक्रम में उपस्थित रहने की उम्मीद है।
घटनाक्रम से अवगत एक सूत्र ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि 2024 में नायडू सरकार के कार्यभार संभालने के एक तिमाही के भीतर यह करार हो गया था। दिलचस्प यह है कि राज्य ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए बिना ही इस करार को अंतिम रूप दिया और आदित्य मित्तल और मंत्री नारा लोकेश के बीच जूम कॉल और व्हाट्सएप चैट के माध्यम से ही सब कुछ तय किया गया।
उम्मेन ने कहा कि जमीन के लिए अनुरोध 30 अगस्त 2024 को किया गया था और 26 नवंबर 2024 तक सरकार ने आवंटन पत्र जारी कर दिया था। उन्होंने कहा, ‘यह राज्य का सर्वश्रेष्ठ प्रयास था। राज्य सरकार ने समय-सीमा कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसकी सिंगल-विंडो ने भी परियोजना को प्रस्ताव से शिलान्यास तक के सफर को डेढ़ साल में बदलने में मदद की। मुख्यमंत्री स्वयं नियमित रूप से हमारे प्रतिनिधियों से बात कर रहे थे।’
सरकारी सूत्रों के अनुसार कंपनी के लिए एक बड़ा फायदा यह है कि उसके पास पहले से ही एक स्लरी पाइपलाइन है जो छत्तीसगढ़ में एनएमडीसी की बैलाडिला खदानों से निकलती है और वर्तमान में उसके पैलेट प्लांट को सेवा मुहैया करा रही है। इसलिए, आवश्यक एकमात्र मंजूरी लगभग 54 किलोमीटर के विस्तार के लिए राजय्यापेटा तक इस पाइपलाइन के लिए कानूनी थी।