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ADIF ने ऐपल पर जांच में देरी का आरोप लगाया, CCI से अंतरिम राहत की मांग

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ऐपल ने प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम में हाल में हुए संशोधनों को चुनौती दी है। ये संशोधन किसी कंपनी के वैश्विक कारोबारी आंकड़े के आधार पर जुर्माना लगाने की अनुमति देते हैं

Last Updated- January 12, 2026 | 10:47 PM IST
Apple iPhones

एलायंस ऑफ डिजिटल इंडिया फाउंडेशन (एडीआईएफ) ने भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (सीसीआई) को सौंपे एक आवेदन में आरोप लगाया है कि आईफोन निर्माता कंपनी ऐपल अपनी जांच में टालमटोल और जान बूझकर देरी कर रही है। इस मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार एडीआईएफ ने सीसीआई से अंतरिम राहत की मांग की है।

ऐपल ने प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम में हाल में हुए संशोधनों को चुनौती दी है। ये संशोधन किसी कंपनी के वैश्विक कारोबारी आंकड़े के आधार पर जुर्माना लगाने की अनुमति देते हैं। ऐपल ने अपनी याचिका में कहा है कि जुर्माना लगाने का नया ढांचा कंपनी को 38 अरब डॉलर तक का नुकसान पहुंचा सकता है जो पिछले तीन वर्षों में उसके औसत वैश्विक राजस्व का 10 फीसदी है।

एडीआईएफ ने कहा है कि मुकदमेबाजी से अंतिम निर्णय प्रक्रिया में देरी हो रही है और सीसीआई द्वारा भारतीय स्टार्टअप एवं डिजिटल कंपनियों को तत्काल राहत के लिए अंतरिम आदेश पर विचार किया जाना चाहिए। उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने कहा, ‘ऐपल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आदेश भी आए हैं। आयोग अब अंतरिम उपाय के रूप में कोई रुख अपना सकता है।’ प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम की धारा 33 के तहत सीसीआई किसी मामले में अंतिम आदेश आने तक किसी भी पक्ष को कोई ऐसा कार्य करने से अस्थायी रूप से रोक सकता है जो प्रतिस्पर्द्धा कानून के खिलाफ जाता है।

हालांकि सूत्रों ने पुष्टि की है कि एडीआईएफ ने सीसीआई को एक पत्र भेजा है और उसे उम्मीद है कि उनके आवेदन पर जल्द ही कोई कदम उठाया जाएगा।
इस बारे में जानकारी के लिए हमने ऐपल को जो ई-मेल भेजा उसका कोई जवाब नहीं आया और एडीआईएफ सदस्यों से भी संपर्क नहीं साधा जा सका।

एक गैर-लाभकारी संस्था ‘टुगेदर वी फाइट सोसाइटी’ की शिकायत पर ऐपल द्वारा ऐप स्टोर बाजार में अपने दबदबे का कथित दुरुपयोग पर सीसीआई द्वारा जांच की जा रही है। सीसीआई ने ऐपल पर कोई जुर्माना नहीं लगाया है और उसे अभी इस मामले में निर्णय लेना लेना है।

वर्ष 2010 में सेल बनाम सीसीआई मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि सीसीआई अंतरिम आदेश जारी कर सकता है लेकिन उसे अपने इस अधिकार का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। न्यायालय ने कहा था,‘अत्यधिक सूझबूझ के साथ ही ऐसे मामलों में आदेश जारी करना चाहिए और इससे जुड़े निश्चित कारणों का उल्लेख किया जाना चाहिए। इसके अलावा यह भी जरूरी है कि सूचना देने वाले आवेदक का मामला प्रथम दृष्टया मामले से भी अधिक पुख्ता हो।’

वैश्विक कारोबार पर लगाए जा रहे जुर्माने के मुद्दे पर ऐपल की याचिका का सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में विरोध किया है। सरकार ने न्यायालय को बताया है कि इस तरह के जुर्माने से बहुराष्ट्रीय कंपनियां नियमों का उल्लंघन करने से डरेंगी।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने न्यायालय में सरकार द्वारा दायर हलफनामे का हवाला देते हुए कहा है कि नियामक के अनुसार केवल भारत में कारोबार के आधार पर जुर्माने की गणना (खासकर वैश्विक डिजिटल कंपनियों के मामले में) ऐसे मामलों में कारगर नहीं रह सकती है।

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First Published - January 12, 2026 | 10:26 PM IST

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