HDFC Bank के पूर्व अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने सोमवार को कहा कि उन्होंने किसी एक वजह से इस्तीफा नहीं दिया था बल्कि यह पिछले दो वर्षों में उनके मूल्यों और नैतिकता के साथ बढ़ती ‘असंगति’ का परिणाम था। चक्रवर्ती ने 18 मार्च को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी चक्रवर्ती ने कई मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। इन मुद्दों में शामिल दुबई में एटी-1 बॉन्ड की गलत बिक्री, बैंक के शेयर मूल्य का कमजोर प्रदर्शन, धीमी ऋण वृद्धि, चालू और बचत खातों (कासा) में कम जमा राशि और लागत तथा आय के उच्च अनुपात जैसी वजहों से उन्होंने यह फैसला लिया।
सीएनबीसी टीवी18 के साथ बातचीत में चक्रवर्ती ने कहा, ‘मेरा यही कहना था कि यह मेरी अपनी समझ के अनुरूप नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘यह एक महत्त्वपूर्ण मामला है लेकिन इसकी गंभीरता अलग-अलग हो सकती है क्योंकि मुझे लगता है कि मेरा पैमाना उस समय के प्रचलित मानदंड से अलग था। ऐसे में, किसी पर दोष डाले बिना अलग हो जाना ही बेहतर है और साथ ही बोर्ड के लिए आत्ममंथन का दरवाजा भी खुला रखना चाहिए। अगर बोर्ड आत्ममंथन करता है और उसे लगता है कि सब कुछ ठीक है तो मुझे कोई परेशानी नहीं है।’
चक्रवर्ती ने जिन बातों पर जोर दिया उनमें से एक एटी-1 बॉन्ड का मामला था। चक्रवर्ती के इस्तीफे के दो दिन बाद बैंक ने गलत तरीके से इसकी बिक्री की चिंता के चलते अपने तीन कार्याधिकारियों को नौकरी छोड़ने के लिए कहा था। बैंक के मुताबिक उसने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अपनी डीआईएफसी ब्रांच में ग्राहकों को जोड़ने की जरूरतों में कुछ खामी की पहचान की थी। समीक्षा के बाद उसने अपनी अंदरूनी नीतियों के मुताबिक जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जिनमें कर्मचारियों में बदलाव भी शामिल था।
खबरों के मुताबिक अधिकारियों को नौकरी छोड़ने के लिए कहने का फैसला दुबई ब्रांच में क्रेडिट सुइस के एडिशनल टियर-1 (एटी-1) बॉन्ड की खुदरा ग्राहकों को गलत तरीके से बिक्री से जुड़ा था। यहां इन बॉन्ड को प्रवासी भारतीयों को नियत परिपक्वता वाले बॉन्ड के तौर पर बेचा गया था। क्रेडिट सुइस के दिवालिया होने और फिर एक अन्य बैंकिंग दिग्गज यूबीएस द्वारा उसका अधिग्रहण किए जाने के बाद इन बॉन्ड को बट्टे खाते में डाल दिया गया था।
चक्रवर्ती ने कहा कि एचडीएफसी बैंक के सीईओ ने इसे दस्तावेज और नियमकीय नियमों की व्याख्या में ‘तकनीकी चूक’ बताया है।
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अगर बड़ी संख्या में ग्राहकों को नुकसान पहुंचता है तो बैंक पर नियामक एजेंसियों का ध्यान काफी ज्यादा बढ़ जाता है। इससे बैंक की साख को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए भले ही इन समस्याओं को सुलझा लिया गया हो, तीन वरिष्ठ प्रबंधकों को नौकरी से निकाल दिया गया हो और 12 अन्य लोगों को छोटे-बड़े दंड दिए गए हों, मगर ये सभी कदम घटना के बाद उठाए गए हैं।’
चक्रवर्ती ने कहा, ‘मुझे लगता है कि आचरण से जुड़ी ये समस्याएं तो शुरू में ही पता चलनी चाहिए थीं या फिर कड़ी निगरानी से यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अगर ऐसी स्थिति होती है तो उसे शुरू में ही खत्म कर दिया जाए।’ उन्होंने कहा कि ‘यहीं पर विसंगति हुई’।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद एक बयान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि बैंक के के संचालन के संबंध में कोई बड़ी चिंता नहीं है। आरबीआई ने यह भी कहा कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी है और बैंक की वित्तीय स्थिति पर्याप्त तरलता के साथ संतोषजनक बनी हुई है। चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद नियामक ने केकी मिस्त्री को 3 महीने के लिए अंतरिम अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी।
चक्रवर्ती ने कहा, ‘और भी कई मामले हैं और शेयर का प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं था। जिसका मतलब था कि शेयरधारक की संपत्ति बढ़ नहीं रही थी। साथ ही कासा कम था और लागत-आय का अनुपात ज्यादा था। बहुत से लोग कहते हैं और मैंने बैंक के अंदर भी ऐसी बातें सुनी हैं कि ऐसा विलय की वजह से हुआ है। लेकिन मेरे विचार से विलय सबसे अच्छी चीज थी। इसने सही मायने में बैलेंस शीट को बिगाड़ा नहीं और अगर थोड़ा-बहुत असर भी पड़ा हो तो उसे दुरुस्त कर दिया जाना चाहिए था।’
चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद एचडीएफसी बैंक का शेयर 13 फीसदी तक गिर गया और बैंक के बाजार पूंजीकरण में 1.7 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है।
चक्रवर्ती ने इसे सिरे से खारिज किया कि शेयर भाव में गिरावट उनके इस्तीफे की वजह से हुई है। उन्होंने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि उनका इस्तीफा बैंक के मौजूदा एमडी एवं सीईओ के तौर पर अगले तीन साल के लिए दोबारा नियुक्ति पर उनकी असहमति की वजह से था। उन्होंने कहा कि इस मामले पर चर्चा ही नहीं हुई थी।
चक्रवर्ती ने दोहराया कि उन्होंने एक बार भी यह नहीं कहा कि कोई सही है या कोई गलत। उन्होंने कहा, ‘मैंने जो बात कही, वह मेरे अपने अंदर की बात थी। इसने मेरे लिए दुविधा पैदा कर दी। अगर इससे बैंक के लिए कोई दुविधा पैदा होती है तो उसके बोर्ड को इस पर विचार करना चाहिए।’ एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ने चक्रवर्ती के इस्तीफे के पत्र की समीक्षा के लिए बाहरी लॉ फर्मों को नियुक्त किया है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि बैंक में कुछ घटनाएं और तौर-तरीके उनके मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थे।
चक्रवर्ती ने कहा, ‘मेरा इस्तीफा असल में कॉरपोरेट गवर्नेंस और उससे जुड़े मामलों का बड़ा मुद्दा है जिस पर बैंक के निदेशक मंडल को विचार करना चाहिए। कोई बाहरी वकील उनके लिए ऐसा नहीं करेगा।’