facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

‘लीज अ​धिसूचना से विमानन कंपनियां अनि​श्चितता में’

Advertisement

Go First ने राष्ट्रीय कंपनी वि​धि पंचाट (NCLT) के समक्ष दिवालिया आवेदन सौंपने के बाद 3 मई को परिचालन बंद कर दिया था।

Last Updated- February 27, 2024 | 10:58 PM IST
‘Indian Aircraft Bill, 2024’ introduced

एयर इंडिया के जनरल काउंसिल जुबिन मसानी ने मंगलवार को कहा कि सरकार की 3 अक्टूबर की अ​धिसूचना के कारण भारतीय विमानन कंपनियां अनि​श्चितता में फंसी हुई हैं। इस अ​धिसूचना में विमान और उनके इंजनों से संबंधित सभी समझौतों को आईबीसी, 2016 की धारा 14 में निर्दिष्ट अधिस्थगन अ​धिकारों से अलग रखा गया है।

गो फर्स्ट ने राष्ट्रीय कंपनी वि​धि पंचाट (एनसीएलटी) के समक्ष दिवालिया आवेदन सौंपने के बाद 3 मई को परिचालन बंद कर दिया था। 10 मई को, पंचाट ने एयरलाइन की परिसंप​त्तियों पर रोक लगा दी और इस वजह से पट्टादाताओं को विमानन कंपनी से अपने करीब 45 विमान ​पाने का दावा करने से रोक दिया गया। इस निर्णय ने पट्टादाताओं में गहरा असंतोष पैदा हो गया है।

इसलिए, कंपनी मामलों के मंत्रालय ने पिछले साल 3 अक्टूबर को एक अ​धिसूचना जारी की थी, जिसमें कहा गया कि यदि कोई एयरलाइन अब दिवालिया प्रक्रिया में जाती है तो वह धारा 14 का हवाला देकर अदालत से पट्टेदारों को अपने विमानों को पुनः प्राप्त करने से रोकने के लिए नहीं कह सकती है।

एयरलाइन इकोनॉमिक्स ग्रोथ फ्रंटियर्स इंडिया 2024 में बोलते हुए मसानी ने कहा, ‘मैं पट्टादाताओं को यह समझाने की को​शिश करूंगा कि वास्तव में क्षेत्रा​धिकार संबं​धित जो​खिम वह नहीं है जो वे महसूस करते हैं, खासकर 3 अक्टूबर की इस अ​​धिसूचना के बाद। मेरा मानना है कि पट्टादाता अब ज्यादा सहज महसूस कर सकते हैं, क्योंकि भारतीय एयरलाइन पहले की तुलना में ज्यादा खराब हालत में हैं। इसलिए हम वाकई अनि​श्चितता के बीच फंसे हुए हैं।’

उन्होंने कहा, ‘यदि पट्टादाताओं को क्षेत्रा​धिकार जो​खिम से अवगत नहीं कराया जाता है तो क्रेडिट जो​खिम का भी सवाल है। हमारे पास एएए क्रेडिट रेटिंग वाली एयरलाइन हैं जिन्हें अपने अनुबं​ध संबं​धित दायित्वों पर कभी विफलताओं का सामना नहीं करना पड़ा। ये ऐसी चीजें हैं जिनसे उन्हें बड़ी मदद मिल सकेगी।’

वर्ष 2008 में, भारत ने केप टाउन कन्वेंशन में हस्ताक्षर किए थे। यह सं​धि पट्टादाताओं को अपने विमान वापस पाने, उनके जो​खिम दूर करने के उपाय मुहैया कराती है। पट्टादाता भारत से इस संधि को लागू करने के लिए एक संसदीय विधेयक पारित करने का आग्रह कर रहे हैं, जो दिवाला कानूनों पर सीटीसी को प्राथमिकता देगा। 3 अक्टूबर की अ​धिसूचना के साथ, भारत सरकार ने इस सं​धि को अपनाया। हालां​कि मसानी ने इसमें समस्याओं का संकेत दिया है।

सीटीसी के तहत विमान को पट्टादाता द्वारा पुनः प्राप्त करने से पहले एयरलाइन को 60 दिन की ‘प्रतीक्षा अवधि’ दी जानी होती है, लेकिन 3 अक्टूबर की अ​धिसूचना के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

Advertisement
First Published - February 27, 2024 | 10:58 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement