ऐक्सिस बैंक ने बुधवार को घोषणा की कि वह अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ऐक्सिस फाइनैंस में लगभग 1,500 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश करेगा। देश के तीसरे सबसे बड़े निजी क्षेत्र के इस बैंक के बोर्ड ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) में 31 मार्च, 2027 तक एक या अधिक किस्तों में राइट्स इश्यू के माध्यम से पूंजी निवेश को मंजूरी दी। बैंक ने एक्सचेंज को बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 10 मार्च के अपने पत्र में इस निवेश को मंजूरी दी थी।
यह अधिग्रहण संबंधित पक्ष लेन देन के अंतर्गत आता है। यह केंद्रीय बैंक के संशोधित दिशानिर्देशों के बाद किया गया है। यह बैंकिंग समूह के भीतर कई संस्थाओं को बोर्ड की मंजूरी और पर्याप्त तर्क व औचित्य के अधीन एक ही प्रकार का व्यवसाय करने की अनुमति देते हैं।
रिजर्व बैंक के अक्टूबर, 2024 के ‘व्यवसाय के स्वरूप’ संबंधी परिपत्र के तहत प्रस्ताव दिया गया था कि बैंक समूह के भीतर केवल एक ही इकाई किसी विशेष प्रकार का स्वीकृत व्यवसाय कर सकती है।
ऐक्सिस बैंक को बताया गया था कि वह ऐक्सिस फाइनैंस के विकास के लिए उसमें अतिरिक्त पूंजी नहीं लगा सकता। परिणामस्वरूप बैंक ने विस्तार के लिए पूंजी जुटाने के लिए ऐक्सिस फाइनैंस में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर निवेशक लाने का प्रयास किया और निवेशकों की खोज के लिए मॉर्गन स्टेनली को नियुक्त किया।
संशोधित दिशानिर्देशों में बैंकों और उनकी सहायक एनबीएफसी को एक ही व्यवसाय में संचालन करने से रोकने वाले खंड को हटा दिए जाने के बाद ऐक्सिस बैंक के पास अपनी एनबीएफसी सहायक कंपनी में पूंजी लगाने का विकल्प उपलब्ध हो गया। इसके बाद बैंक ने ऐक्सिस फाइनैंस के मजबूत प्रदर्शन को देखते हुए उसमें पूंजी लगाने के प्रस्ताव के साथ रिजर्व बैंक से संपर्क किया।
ऐक्सिस बैंक ने जनवरी में परिणाम घोषित करने के कार्यक्रम के दौरान कहा था कि वह ऐक्सिस फाइनैंस में पूंजी लगाने के सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसमें रणनीतिक निवेशकों को हिस्सेदारी बेचना भी शामिल है। बैंक के प्रबंधन ने कहा था, ‘हम यह तय करेंगे कि पूंजी व्यवसाय के लिए बाधा न बने। हम नियामक दिशानिर्देशों और हाल ही में हुए दिशानिर्देशों में बदलाव के आधार पर पूंजी लगाने के सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम हिस्सेदारी बेचने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं। यह विकल्प अभी भी विचाराधीन है।’
बैंक ने बताया था कि ऐक्सिस फाइनैंस के 2026-27 तक उच्च स्तरीय एनबीएफसी बनने की उम्मीद है। इसके बाद बैंक कंपनी को सूचीबद्ध करने पर विचार करेगा। रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार उच्च स्तरीय एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत होने पर उसे इस श्रेणी में आने के तीन साल के भीतर अपने शेयर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कराने होते हैं।
ऐक्सिस फाइनैंस खुदरा, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और थोक क्षेत्रों में ग्राहकों की मांग के अनुरूप वित्तीय समाधान प्रदान करता है। इसके थोक ऋण पोर्टफोलियो में कॉर्पोरेट ऋण, गिरवी ऋण और रियल एस्टेट वित्तपोषण शामिल हैं। खुदरा क्षेत्र में संपत्ति के बदले ऋण, गृह ऋण, व्यक्तिगत ऋण और व्यावसायिक ऋण शामिल हैं। एमएसएमई क्षेत्र छोटे कॉर्पोरेट ऋणों पर केंद्रित है, जो मुख्य रूप से गिरवी द्वारा समर्थित होते हैं और गैर-महानगरीय बाजारों में इसकी मजबूत उपस्थिति है।
ऐक्सिस फाइनैंस की 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के अंत तक प्रबंधित संपत्ति लगभग 45,000 करोड़ रुपये थी। कंपनी ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त नौ महीनों के लिए लगभग 571 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ और 0.95 प्रतिशत का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात दर्ज किया।