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BharatPe का यूनिटी स्मॉल फाइनैंस बैंक में हिस्सेदारी घटाने से इनकार

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आरबीआई (RBI) के नियमों के तहत किसी बैंक में 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सा खरीदने की इच्छा रखने वाली कंपनियों को नियामक से पहले मंजूरी लेनी होती है।

Last Updated- May 20, 2024 | 10:20 PM IST
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फिनटेक दिग्गज भारतपे (BharatPe) यूनिटी स्मॉल फाइनैंस बैंक में अपने निवेश को बेचना चाहती है। इसके लिए वह अपनी हिस्सेदारी 49 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करने की योजना बना रही है। सूत्रों ने बताया कि कंपनी मुख्य रूप से अपने कर्ज देने के कारोबार ट्रिलियन लोन्स के लिए पूंजी जुटाने के वास्ते कदम उठाने की सोच रही है।

सेंट्रम फाइनैंशियल सर्विसेज के पास यूनिटी एसएफबी की बाकी 51 फीसदी हिस्सेदारी है। हालांकि दिल्ली की कंपनी ने हिस्सेदारी बेचने की खबर से इनकार किया है।

हिस्सेदारी बेचने की खबर पूरी तरह गलत: भारतपे 

कंपनी ने एक बयान में कहा कि भारतपे (BharatPe) की तरफ से यूनिटी बैंक की हिस्सेदारी बेचने की खबर पूरी तरह गलत है। हम इसका जोरदार खंडन करते हैं और मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह अफवाह पर ध्यान न दे।

एक सूत्र ने कहा कि भारतपे अपने निवेश से कमाई करना चाहती है। इससे मिलने वाली रकम बैंक को नहीं मिलेगी। इसमें कहा गया है कि भारतपे को अपनी हिस्सेदारी नए निवेशक को बेचने के लिए यूनिटी की मंजूरी की जरूरत होगी। यूनिटी एसएफवी ने इस पर टिप्पणी से मना कर दिया। हिस्सेदारी बिक्री भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी पर निर्भर करेगी।

आरबीआई (RBI) के नियमों के तहत किसी बैंक में 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सा खरीदने की इच्छा रखने वाली कंपनियों को नियामक से पहले मंजूरी लेनी होती है। पिछले साल अप्रैल में भारतपे ने मुंबई की एनबीएफसी ट्रिलियन लोन्स की बहुलांश हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था।

यूनिटी एसएफबी ने नवंबर 2021 में अपना परिचालन पंजाब ऐंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के बाद शुरू किया था। जनवरी में आ्रबीआई ने स्मॉल फाइनैंस बैंकों के लिए न्यूनतम पूंजी की जरूरत 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दी थी। एसएफबी को न्यूनतम पूंजी व जोखिम भारांकित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) 15 फीसदी रखना होता है।

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First Published - May 20, 2024 | 9:59 PM IST

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