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सरकारी 3.2 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय राहत पैकेज के बावजूद BSNL, MTNL पर अब भी दबाव

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इनकी संयुक्त राजस्व बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025 में घटकर 4 प्रतिशत रह गई  जो वित्त वर्ष 2017 के बाद से नौ वर्षों में सबसे निचला स्तर है

Last Updated- August 28, 2025 | 11:17 PM IST
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बोफा ग्लोबल रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019 से भारत संचार निगम (बीएसएनएल) और महानगर टेलीफोन निगम (एमटीएनएल) को सरकार से मिले 3.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय राहत पैकेज के बावजूद इन कंपनियों को दबाव से उबरने में मदद नहीं मिली है। इनकी संयुक्त राजस्व बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025 में घटकर 4 प्रतिशत रह गई  जो वित्त वर्ष 2017 के बाद से नौ वर्षों में सबसे निचला स्तर है।

एजेंसी के निष्कर्ष भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के कुल समूचे राजस्व आंकड़े पर आधारित हैं। वित्त वर्ष 2017 में बीएसएनएल/एमटीएनएल की राजस्व हिस्सेदारी 9 प्रतिशत थी जो वित्त वर्ष 2019 में राहत पैकेज लागू होने के समय घटकर 6 प्रतिशत रह गई। वित्त वर्ष 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर 7 प्रतिशत हो गया। लेकिन 2022-23 में फिर से घटकर 5 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025 में 4 प्रतिशत रह गया।  

ग्राहक आधार हिस्सेदारी लगभग स्थिर बनी हुई है। वित्त वर्ष 2017 में यह 9 प्रतिशत थी, 2018-19 और 2019-20 में 11 प्रतिशत की ऊंचाई पर पहुंची और फिर 2023-24 तथा वित्त वर्ष 2025 में घटकर 8 प्रतिशत रह गई। इस साल जून में ग्राहक आधार हिस्सेदारी घटकर 7.81 प्रतिशत रह गई जो मई में 7.86 प्रतिशत और अप्रैल में 7.92 प्रतिशत थी।

सरकारी स्वामित्व वाली दूरसंचार कंपनियों का यह निराशाजनक प्रदर्शन ऐसे समय सामने आया है जब सरकार ने कई चरणों में बीएसएनएल/एमटीएनएल में 3.22 लाख करोड़ रुपये डाले हैं। सरकार ने 2019 में 69,000 करोड़ रुपये का रिवाइवल पैकेज, 2022 में 1.64 लाख करोड़ रुपये, 2023 में 89,000 करोड़ रुपये के 4जी और 5जी स्पेक्ट्रम का आवंटन तथा 2025 में पूंजीगत व्यय सहायता के रूप में 6,982 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश जैसी सहायता प्रदान कीं।

बीएसएनएल ने तब से पूरे भारत में 4जी सेवाएं शुरू कर दी हैं और नेटवर्क स्थिर होने पर 5जी शुरू करने की योजना बना रही है। उसने स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके देश भर में 1,00,000 से ज्यादा 4जी टावर लगाए हैं। दूरसंचार कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में लगातार दो तिमाहियों में शुद्ध लाभ अर्जित किया, तीसरी तिमाही में 262 करोड़ रुपये और चौथी तिमाही में 280 करोड़ रुपये कमाए जो 18 वर्षों में उसका पहला शुद्ध लाभ था। इस वर्ष घाटा पिछले वर्ष के 5,370 करोड़ रुपये की तुलना में घटकर 2,247 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, 2025-26 की पहली तिमाही में 1,049 करोड़ रुपये के भारी नुकसान के साथ कंपनी फिर से घाटे में चली गई। इस दौरान वास्तविक विजेता रिलायंस जियो और भारती एयरटेल रही हैं, जिन्हें मुख्य रूप से बीएसएनएल और वोडाफोन आइडिया (वी) को हुए नुकसान की वजह से फायदा हुआ है।

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First Published - August 28, 2025 | 10:16 PM IST

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