सरकारी स्वामित्व वाली कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने चालू वित्त वर्ष में चिली और सिंगापुर में सहायक इकाई स्थापित करने की योजना बनाई है। कंपनी लीथियम, रेयर अर्थ, तांबा और कोकिंग कोल की दिशा में विदेश में संभावनाएं तलाश रही है। यह थर्मल कोल के कारोबार से आगे बढ़कर व्यापक विविधीकरण की योजना का हिस्सा है।
सीआईएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक बी साईराम ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि कंपनी ने चिली में एक लीथियम ब्लॉक की पहचान की है और जरूरी काम पूरे कर लिए हैं। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए कंपनी को चिली सरकार से अंतिम मंजूरी का इंतजार है। उन्होंने कहा, ‘अगर चिली सरकार से मंजूरी मिल जाती है तो हम 2-3 साल में वहां खनन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।’
सिंगापुर की सहायक कंपनी महत्त्वपूर्ण खनिजों, रेयर अर्थ, तांबा और कोकिंग कोल में ऑस्ट्रेलिया के कामकाज के लिए सीआईएल के मंच के रूप में काम करेगी। उन्होंने कहा, ‘हम महत्त्वपूर्ण खनिजों, रेयर अर्थ, कोकिंग कोल और तांबे के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया के कुछ अच्छे खनन ऑपरेटरों के साथ सहयोग करने का प्रयास कर रहे हैं। इन सभी पर काम चल रहा है।’ साईराम का कहना है कि सहायक इकाइयों का ढांचा सिर्फ खनन के कामकाज के लिए ही नहीं, बल्कि प्रॉसेसिंग, बेनीफिकेशन, लॉजिस्टिक्स, नियामक मंजूरियों और महत्त्वपूर्ण खनिजों की मूल्य श्रृंखला से जुड़े बाजार के हिसाब से होगा।
उन्होंने कहा, ‘खनन एक क्षेत्र है और प्रसंस्करण पूरी तरह से अलग काम है। ये सहायक कंपनियां प्रॉसेसिंग, लॉजिस्टिक्स और बाजार की पहचान सहित पूरी मूल्य श्रृंखला का ध्यान रखेंगी।’ सीआईएल को उम्मीद है कि दोनों सहायक कंपनियां इस वित्त वर्ष में अस्तित्व में आ जाएंगी, जिसमें पहले सिंगापुर इकाई में और उसके बाद चिली में कामकाज शुरू होगा।