विश्व की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) बड़े रणनीतिक परिवर्तनों में के लिए तैयार हो रही है। सरकारी कंपनी अपनी खदानों में पड़े कोयले के स्टॉक को कम करने, निकासी संबंधी बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने, विविधीकरण परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और परिचालन सुधारों को तेज करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। नई दिल्ली में साकेत कुमार और सुधीर पाल सिंह के साथ बातचीत में सीआईएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) बी साईराम ने कंपनी की आपूर्ति-केंद्रित रणनीति, गैसीकरण परियोजनाओं, धन जुटाने की योजनाओं, सहायक कंपनियों की ताजा लिस्टिंग और ताप बिजली के विस्तार के बारे में बात की। संपादित अंश:
कोल इंडिया की 3 प्राथमिकताओं में आपूर्ति या कोयले का उठान, उत्पादन और बड़े पैमाने पर सुधार और समेकन शामिल है। आपूर्ति अब सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है क्योंकि हमने इस वर्ष अपनी खदानों में लगभग 13 करोड़ टन कोयले के स्टॉक के साथ शुरुआत की थी। हमारा लक्ष्य धीरे धीरे भंडारण घटाकर लगभग 5 करोड़ टन करना है, जिससे परिचालन संबंधी लचीलापन बना रहे। पिछले साल हमने 76.8 करोड़ टन उत्पादन किया, और इन्वेंट्री वार्षिक उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत थी। हमारा प्रयास धीरे धीरे इस अनुपात को 10 प्रतिशत के करीब लाना है।
हाँ, निश्चित रूप से। पिछले साल, हमने बीसीसीएल और सीएमपीडीआई को सूचीबद्ध किया, और दोनों ने अच्छा प्रदर्शन किया। खनन क्षेत्र की कंपनियों में निवेशकों के उत्साह से हमारा भरोसा मजबूत हुआ। सूचीबद्धता के बाद सीएमपीडीआई में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि बीसीसीएल में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आज सीएमपीडीआई का बाजार पूंजीकरण (एम-कैप) लगभग 14,000 करोड़ रुपये है, जबकि बीसीसीएल का एम-कैप लगभग 15,500 करोड़ रुपये है। इस साल हम साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स और महानदी कोलफील्ड्स के लिए आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) लाने की योजना पर काम कर रहे हैं। लगभग 25 प्रतिशत हिस्सेदारी घटाने पर पर विचार किया जा रहा है। अगस्त या सितंबर के आसपास इसके वक्त को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
वर्तमान वित्त वर्ष को कोल इंडिया में सुधार के वर्ष के रूप में देखा जा रहा है। हमने अन्वेषण, निकासी संबंधी बुनियादी ढांचे, मार्केटिंग, मानव संसाधन (एचआर) और अनुसंधान और विकास (आरऐंडडी) में सुधार के 60 उपायों की पहचान की है। इनमें अन्वेषण और भूवैज्ञानिक मानचित्रण में आर्टीफिशल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के एकीकरण के साथ ही हाइड्रोलिक और इलेक्ट्रो-हाइड्रोलिक ड्रिलिंग सिस्टम की ओर बदलाव शामिल है। मार्केटिंग संबंधी सुधारों में आयातित कोयले पर निर्भरता कम करना और शक्ति नीति व्यवस्था का सुचारु रूप से लागू करना शामिल है।
एक प्रमुख पहल कर्मचारी स्वास्थ्य और मानसिक बेहतरी की नीति है। यह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के हिसाब से एक अनूठी पेशकश है। दूसरी नीति कॉरपोरेट कम्युनिकेशन है। मशीनीकरण, डिजिटलीकरण और फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी की व्यवस्था भी मानव संसाधन नियंत्रण में मदद कर रहे हैं। भर्ती अब काफी हद तक कार्यकारी पदों और भूमि अधिग्रहण से जुड़े रोजगार तक सीमित है। मध्य स्तर के प्रबंधन की भी कमी थी। हम अब तेजी से पदोन्नति करके इसका समाधान कर रहे हैं। हाल ही में हमने लगभग 550 अधिकारियों को ई-4 से ई-5 स्तर तक पदोन्नत किया है। वरिष्ठ स्तर पर और पदोन्नति की भी योजना है।
सीआईएल पारंपरिक रूप से ऋण-मुक्त रही है। कंपनी ने ऐतिहासिक रूप से ऋण बाजारों का रुख नहीं किया है। हालांकि कोयला गैसीकरण जैसी विविधीकरण परियोजनाएं 70:30 ऋण-इक्विटी संरचना के हिसाब से होंगी। लखनपुर गैसीकरण परियोजना के लिए बैंकों को चिह्नित किया गया है और ऋण इसी वर्ष मिलना शुरू हो सकता है। निकासी से जुड़े बुनियादी ढांचे, रेल प्रणाली और कैप्टिव नवीकरणीय परियोजनाओं जैसी आंतरिक परियोजनाओं के लिए आंतरिक संसाधनों से धन लगाया जाना जारी रहेगा।
इस साल बिजली और गैर-बिजली दोनों क्षेत्रों से अपेक्षित मांग का मूल्यांकन करने के बाद सीआईएल का उत्पादन लक्ष्य 81.5 करोड़ टन रखा गया है, जबकि 85 करोड़ टन आपूर्ति का लक्ष्य है। दक्षता को अब न केवल उत्पादन के संदर्भ में मापा जाएगा, बल्कि आपूर्ति और लदान के हिसाब से भी देखा जाएगा। यदि हम 81.5 करोड़ टन उत्पादन करते हैं और 85 करोड़ की आपूर्ति करते हैं, तो वित्त वर्ष 2027 के अंत तक इन्वेंट्री लगभग 3.5 करोड़ टन घटकर 9.5 करोड़ टन रह सकती है।
ग्राहक हमारी रणनीति के केंद्र में हैं। सभी डिस्पैच के लिए हमारी थर्ड पार्टी सैंपलिंग व्यवस्था है। रेल और मैरी-गो-राउंड व्यवस्था से चलने वाले लगभग आधे कोयले को अब कोल हैंडलिंग प्लांट साइलो व्यवस्था से रूट किया जा रहा है, जहां ताजे और स्टॉक किए गए कोयले को स्वचालित कन्वेयर सिस्टम से मिलाया जाता है, ताकि गुणवत्ता एकसमान बनी रहे।
सबसे आधुनिक गैसीकरण परियोजना महानदी कोलफील्ड्स के तहत ओडिशा में लखनपुर में है। परियोजना में लगभग 25,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा, जिसकी क्षमता 6,60,000 टन अमोनियम नाइट्रेट की है। हम ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के तहत आसनसोल के पास और वेस्टर्न कोलफील्ड्स के तहत चंद्रपुर के पास परियोजनाओं का भी मूल्यांकन कर रहे हैं, जिनके विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार किए जा रहे हैं। खासकर पश्चिम एशिया संकट ने कोयला गैसीकरण भारत के लिए रणनीतिक महत्त्व को उजागर किया है।
मुख्य रूप से डीजल और एक्सप्लोसिव्स लागत बढ़ने से असर पड़ा है। हालांकि उपलब्धता कोई मसला नहीं है। सीआईएल और इसके कॉन्ट्रैक्टर प्रमुख डीजल उपभोक्ता हैं। परिचालन के के हिसाब से फिलहाल कोई व्यवधान नहीं है, क्योंकि आपूर्ति काफी हद तक हो रही है।
पिछला वित्त वर्ष कुछ हद तक मिश्रित था। उत्पादन वृद्धि अपेक्षाकृत मामूली रही, लेकिन हम मांग पूरी करने और रणनीतिक भंडार संतोषजनक बनाए रखने में सक्षम थे, जो ऊर्जा सुरक्षा व आपूर्ति में स्थिरता के हिसाब से महत्त्वपूर्ण है। कम गर्मी व भारी बारिश से पिछले साल कोयले की मांग कम रही। हालांकि जनवरी से मांग बढ़ी है। इस वर्ष देश में बिजली की मांग पहले ही 256 गीगावाट के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है।
हम दामोदर घाटी निगम के साथ साझेदारी में चंद्रपुर में 1,600 मेगावाट की अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना विकसित कर रहे हैं। इसे वित्त वर्ष 2031 से चालू किए जाने का लक्ष्य है। हम ओडिशा में महानदी बेसिन पावर प्रोजेक्ट को भी आगे बढ़ा रहे हैं।